ब्रिटिश टेनिस खिलाड़ी हैरियट डार्ट ने अपने पेशेवर करियर में एक ऐतिहासिक मुकाम हासिल कर लिया है। चीन में आयोजित ग्वांगझू ओपन के खिताबी मुकाबले में उन्होंने ऑस्ट्रिया की 18 वर्षीय उभरती हुई खिलाड़ी लिली टैगर को मात देकर पहली बार किसी डब्ल्यूटीए टूर एकल टूर्नामेंट की ट्रॉफी अपने नाम की। तनाव और रोमांच से भरे इस फाइनल में 30 वर्षीय डार्ट ने 4-6, 6-3, 6-4 से जीत दर्ज की। मैच खत्म होते ही वह अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सकीं और खुशी के आंसुओं के साथ कोर्ट पर गिर पड़ीं।
क्वालिफायर से चैंपियन बनने तक का सफर
डार्ट के लिए ग्वांगझू में यह खिताबी जीत किसी सपने के सच होने जैसी रही। उन्होंने इस डब्ल्यूटीए 250 स्तर की प्रतियोगिता में एक क्वालिफायर के तौर पर अपनी शुरुआत की थी। मुख्य ड्रॉ में जगह बनाने से लेकर सीधे फाइनल तक पहुंचकर ट्रॉफी उठाना उनकी मानसिक मजबूती को दर्शाता है। विश्व रैंकिंग में 115वें स्थान पर मौजूद डार्ट ने पूरे हफ्ते कोर्ट पर गजब का जुझारूपन दिखाया। फाइनल में उनके सामने 53वीं रैंकिंग वाली युवा खिलाड़ी टैगर थीं, जिन्होंने टूर्नामेंट के शुरुआती दौर में सात बार की ग्रैंड स्लैम चैंपियन वीनस विलियम्स जैसी दिग्गज को हराकर खलबली मचाई थी।
तीसरे सेट का उतार-चढ़ाव और निर्णायक क्षण
फाइनल मैच का तीसरा सेट बेहद नाटकीय रहा, जहां दोनों खिलाड़ियों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। डार्ट ने निर्णायक सेट में दो बार बढ़त बनाई, लेकिन 2025 फ्रेंच ओपन जूनियर चैंपियन टैगर ने दोनों बार शानदार वापसी करते हुए स्कोर बराबर कर दिया। इसके बावजूद ब्रिटिश खिलाड़ी ने अपना धैर्य नहीं खोया और सातवें गेम में तीसरी बार टैगर की सर्विस तोड़कर 4-3 की बढ़त बना ली। इसके बाद उन्होंने अपनी सर्विस बचाते हुए मुकाबले को 5-3 पर पहुंचा दिया और जीत से सिर्फ एक गेम दूर रह गईं।
नौवें गेम में जब टैगर सर्विस कर रही थीं, तब डार्ट के पास दो चैंपियनशिप अंक थे। दूसरे चैंपियनशिप पॉइंट पर वह मिड-कोर्ट में आई एक आसान गेंद को नेट में मार बैठीं और मौका चूक गईं। हालांकि, इस गलती के बाद भी उन्होंने अपना संयम बनाए रखा। दसवें गेम में अपनी सर्विस पर खेलते हुए उन्होंने तीसरे चैंपियनशिप पॉइंट पर एक शानदार सर्विस विनर लगाया और अपने करियर की सबसे बड़ी जीत दर्ज की। जीत की पुष्टि होते ही वह खुशी से झूम उठीं और अपनी टीम के साथ इस ऐतिहासिक पल का जश्न मनाया।
हार के मुहाने से पलटा मुकाबला
इस पूरे टूर्नामेंट में डार्ट की सफलता की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि वह मुश्किल से मुश्किल हालात से मुकाबला पलटने में माहिर साबित हुईं। फाइनल में टैगर के खिलाफ पहले सेट में पिछड़ने के बाद वापसी करना कोई इत्तेफाक नहीं था। इस प्रतियोगिता में खेले गए सात मैचों में यह चौथा मौका था जब डार्ट ने पहला सेट गंवाने के बावजूद अंतिम जीत अपने नाम की। इस तरह के जुझारू प्रदर्शन ने साबित कर दिया कि वह दबाव में भी अपना सर्वश्रेष्ठ खेल दिखाने की क्षमता रखती हैं।
मैरियन बार्टोली का मार्गदर्शन और रैंकिंग में छलांग
डार्ट की इस शानदार वापसी में विंबलडन की पूर्व चैंपियन मैरियन बार्टोली के मार्गदर्शन की बेहद अहम भूमिका रही है। उनके साथ काम शुरू करने के बाद से डार्ट के खेल और आत्मविश्वास में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है। डार्ट वर्ष 2024 में विश्व रैंकिंग में अपने करियर के सर्वश्रेष्ठ 70वें पायदान तक पहुंची थीं। उस सत्र में उन्होंने विंबलडन के तीसरे दौर और यूएस ओपन के दूसरे दौर में जगह बनाई थी, लेकिन पिछले दो सत्रों के अधिकांश हिस्से में वह शीर्ष 100 से बाहर ही संघर्ष कर रही थीं।
इस सत्र के दूसरे हाफ में डार्ट ने गेंद पर अपनी पकड़ लगातार मजबूत रखी है। विंबलडन के बाद से हार्ड कोर्ट पर खेले गए 24 टूर-स्तरीय मुकाबलों में से उन्होंने 19 में जीत दर्ज की है। इसके साथ ही इस पूरे सीजन में डब्ल्यूटीए टूर पर उनका रिकॉर्ड 34 मैचों में 23 जीत का हो गया है, जो उनके पूरे पेशेवर करियर का सबसे बेहतरीन जीत प्रतिशत है।
शीर्ष 100 में वापसी और ऑस्ट्रेलियन ओपन का टिकट
ग्वांगझू में चैंपियन बनने का इनाम डार्ट को न केवल एक खूबसूरत ट्रॉफी के रूप में मिला है, बल्कि इससे उनकी रैंकिंग में भी जबरदस्त सुधार होगा। सोमवार को जारी होने वाली नई विश्व रैंकिंग में ब्रिटेन की यह नंबर पांच खिलाड़ी एक बार फिर शीर्ष 100 में प्रवेश कर लेंगी। इस छलांग का सबसे बड़ा व्यावहारिक लाभ यह होगा कि जनवरी में जब साल का पहला ग्रैंड स्लैम ऑस्ट्रेलियन ओपन शुरू होगा, तो डार्ट को किसी क्वालिफाइंग राउंड से गुजरे बिना सीधे मुख्य ड्रॉ में प्रवेश मिल जाएगा।
उपविजेता रहीं टैगर ने भी डार्ट के प्रदर्शन की खुलकर तारीफ की। मैच के बाद उन्होंने ब्रिटिश खिलाड़ी से कहा कि आज कोर्ट के दूसरी तरफ खड़े होना कतई आसान नहीं था और आपका यह पूरा साल बेहद शानदार रहा है। 30 साल की उम्र में डार्ट की यह कामयाबी साबित करती है कि लगातार मेहनत और सही मार्गदर्शन से किसी भी उम्र में अपने सपनों को साकार किया जा सकता है।



















