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ट्रेन में मिडिल बर्थ खोलने को लेकर रेलवे के नियम, जानिए सफर के दौरान किन बातों का रखें ध्यानट्रैवल टिप्स
30 अक्तू॰ 2026, 6:27 am (1 घंटे पहले)· 1

ट्रेन में मिडिल बर्थ खोलने को लेकर रेलवे के नियम, जानिए सफर के दौरान किन बातों का रखें ध्यान

भारतीय ट्रेनों में सफर के दौरान मिडिल बर्थ को लेकर यात्रियों के बीच होने वाली कहासुनी आम है। रेलवे ने इसके लिए नियम तय किए हैं, जिनके तहत रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक ही मिडिल बर्थ खोली जा सकती है।

भारतीय रेलवे से सफर करते समय यात्रियों के बीच मिडिल बर्थ को लेकर होने वाली नोंकझोंक और बहस बहुत सामान्य सी बात है। कई बार यात्रा के दौरान मिडिल बर्थ पर यात्रा करने वाला व्यक्ति दिन के वक्त ही अपनी सीट को खोलकर सोने का प्रयास करने लगता है, जिसकी वजह से नीचे यानी लोअर बर्थ पर बैठे यात्रियों को काफी असुविधा का सामना करना पड़ता है। इसके विपरीत, कई बार लोअर बर्थ वाले यात्री रात के समय भी मिडिल बर्थ को खोलने की अनुमति नहीं देते हैं। इस तरह के आम विवादों और परेशानियों से बचने के लिए भारतीय रेलवे ने स्पष्ट नियम तय किए हैं, जिनकी जानकारी हर रेल यात्री के लिए होनी आवश्यक है।

मिडिल बर्थ के इस्तेमाल का निर्धारित समय

भारतीय रेलवे के तयशुदा नियमों के अनुसार, ट्रेन में मिडिल बर्थ को खोलने और उस पर लेटकर या सोकर सफर करने का आधिकारिक समय रात 10:00 बजे से लेकर सुबह 6:00 बजे तक का है। रात के 10 बजने से पहले मिडिल बर्थ को मोड़कर और उठाकर रखना पूरी तरह से अनिवार्य है, ताकि लोअर और अपर बर्थ पर बैठे अन्य यात्री बिना किसी रुकावट के नीचे सहज रूप से बैठ सकें। इसी प्रकार, सुबह के 6 बजते ही मिडिल बर्थ वाले यात्री को अपनी सीट को वापस नीचे गिरा देना होता है, जिससे दिन के समय कोच में मौजूद सभी सह-यात्री आराम से बैठकर यात्रा का आनंद ले सकें।

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गौरतलब है कि पहले रेलवे में यात्रियों के सोने और बर्थ खोलने का समय रात 9 बजे से सुबह 7 बजे तक निर्धारित था, लेकिन यात्रियों की सहूलियत और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने इस समयावधि में संशोधन किया और इसे बदलकर रात 10:00 बजे से सुबह 6:00 बजे तक कर दिया।

दिन के वक्त सीट शेयरिंग और बैठने के अधिकार

सुबह 6:00 बजे से लेकर रात 10:00 बजे तक की पूरी अवधि को 'डे टाइम' यानी दिन का समय माना जाता है। इस तयशुदा समय के दौरान लोअर बर्थ पर केवल लोअर बर्थ वाले का ही नहीं, बल्कि लोअर, मिडिल और अपर—तीनों श्रेणियों के यात्रियों का बैठने का साझा अधिकार होता है। यदि यात्रा के दौरान कोई सह-यात्री दिन के वक्त अपनी जिद के कारण जबरन मिडिल बर्थ को खोलकर सोने की कोशिश करता है, तो आप इस बात की सीधी शिकायत ट्रेन में मौजूद टीटीई से कर सकते हैं.

विशेष परिस्थितियों और मानवीय दृष्टिकोण

रेलवे के इन सामान्य नियमों के अलावा कुछ खास और संवेदनशील परिस्थितियां भी होती हैं जहाँ छूट दी जाती है। यदि आपके कूपे या बे में कोई गर्भवती महिला, बुजुर्ग नागरिक, गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति या फिर कोई दिव्यांग यात्री सफर कर रहा है, तो मानवीय आधार पर उन्हें दिन के वक्त भी मिडिल बर्थ खोलकर सोने की अनुमति दी जा सकती है। इसके अलावा लोअर बर्थ पर भी उन्हें आराम करने दिया जा सकता है। ऐसे संवेदनशील मामलों में कानून से ज्यादा आपसी समझदारी और तालमेल से काम लेना ही समझदारी का काम होता है।

विवाद की स्थिति में क्या कदम उठाएं

यदि कोई साथी यात्री रेलवे के इन निर्धारित नियमों को ताक पर रखकर तय समय से पहले ही बर्थ खोलने के लिए अपनी जिद पर अड़ा रहता है, तो उसे शालीनता से रेलवे का यह आधिकारिक समय समझाएं। अगर इसके बाद भी विवाद बढ़ता है और बात नहीं बनती है, तो आपस में उलझने या बहस करने के बजाय तुरंत ऑन-ड्यूटी TTE से संपर्क करें या फिर रेलवे की आधिकारिक 139 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके मदद मांग सकते हैं।

सवाल-जवाब

ट्रेन में मिडिल बर्थ खोलने का आधिकारिक समय क्या है?
रेलवे नियमों के अनुसार मिडिल बर्थ रात 10:00 बजे से सुबह 6:00 बजे तक ही खोली जा सकती है।
पहले सोने का निर्धारित समय क्या था?
पहले यह समय रात 9:00 बजे से सुबह 7:00 बजे तक था, जिसे बदलकर अब रात 10 से सुबह 6 बजे कर दिया गया है।
दिन के समय लोअर बर्थ पर बैठने का अधिकार किसका होता है?
सुबह 6:00 बजे से रात 10:00 बजे तक लोअर बर्थ पर लोअर, मिडिल और अपर तीनों श्रेणियों के यात्रियों का बैठने का साझा अधिकार होता है।
अगर कोई दिन में जबरन मिडिल बर्थ खोले तो क्या करें?
ऐसी स्थिति में आप ट्रेन में मौजूद टीटीई से इसकी शिकायत कर सकते हैं।
किन्हें दिन में भी मिडिल बर्थ खोलने की छूट मिलती है?
गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, बीमार व्यक्तियों और दिव्यांग यात्रियों को मानवीय आधार पर दिन में भी बर्थ खोलने की अनुमति दी जा सकती है।
विवाद बढ़ने पर यात्रियों को किससे संपर्क करना चाहिए?
विवाद होने पर उलझने के बजाय ऑन-ड्यूटी TTE या रेलवे की 139 हेल्पलाइन पर संपर्क करना चाहिए।
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