बाबा बैद्यनाथ की तीर्थनगरी देवघर से महज डेढ़ से दो घंटे की ड्राइव पर एक ऐसा शहर है जो हर यात्री को कुछ अलग और यादगार देता है। झारखंड की उप-राजधानी दुमका देवघर से 65 से 70 किलोमीटर दूर है और सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है। संताल परगना की राजधानी दुमका केवल प्रशासनिक नजरिये से ही नहीं, बल्कि अपने धार्मिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों के कारण भी हर साल हजारों सैलानियों को अपनी ओर खींचती है।
बाबा बासुकिनाथ धाम: यहां आए बिना दर्शन है अधूरा
दुमका के धार्मिक स्थलों में सबसे पहला नाम बाबा बासुकिनाथ धाम का आता है, जो देवघर से करीब 45 किलोमीटर दूर है। यहां की आस्था बेहद गहरी है। मान्यता यह है कि जब तक कोई श्रद्धालु बासुकिनाथ में भगवान शिव के दर्शन नहीं कर लेता, तब तक बाबा बैद्यनाथ का दर्शन पूर्ण नहीं माना जाता। इसीलिए तीर्थयात्री देवघर के बाद यहां भी अवश्य पहुंचते हैं। सावन और भादो महीनों में लाखों भक्तों की भीड़ यहां उमड़ती है। सैकड़ों वर्ष पुराने इस मंदिर का आध्यात्मिक वातावरण मन को एक अलग ही सुकून और शांति देता है।
मसानजोर डैम: पहाड़ों के बीच बसा कनाडियन डैम
देवघर से करीब 85 किलोमीटर दूर मयूराक्षी नदी पर बना मसानजोर डैम दुमका का सबसे आकर्षक पर्यटन स्थल है। इसे कनाडियन डैम भी कहते हैं क्योंकि इसके निर्माण में कनाडा सरकार ने सहयोग दिया था। ऊंची पहाड़ियों, विशाल जलराशि और चारों ओर फैली घनी हरियाली का यह नजारा पिकनिक और घूमने के लिए बेहद लोकप्रिय है। बरसात के दिनों में यहां का माहौल किसी हिल स्टेशन जैसा बन जाता है। डैम के पास बने कॉटेज में ठहरकर पर्यटक यहां की प्राकृतिक सुंदरता का भरपूर आनंद उठा सकते हैं।
तातलोई गर्म जल कुंड: जंगल में गर्म पानी का अनोखा चमत्कार
देवघर से लगभग 55 किलोमीटर की दूरी पर घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच छुपा तातलोई गर्म जल कुंड पर्यटकों में काफी लोकप्रिय है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसका पानी साल के बारहों महीने गर्म रहता है। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि यहां के गर्म पानी में स्नान करने से त्वचा से जुड़ी कई समस्याओं में राहत मिलती है। सर्दियों के मौसम में यहां पर्यटकों की संख्या और बढ़ जाती है। प्रकृति की गोद में गर्म पानी का यह अनोखा संगम इसे एक यादगार अनुभव बनाता है।
मालूटी के टेराकोटा मंदिर: इतिहास की जीवंत धरोहर
इतिहास और पुरानी वास्तुकला में रुचि रखने वालों के लिए मालूटी गांव किसी खजाने से कम नहीं। देवघर से इसकी दूरी करीब 75 किलोमीटर है। यह गांव पूरे देश में अपने प्राचीन टेराकोटा मंदिरों के लिए पहचाना जाता है। कहा जाता है कि कभी यहां 108 मंदिर हुआ करते थे, जिनमें से कई आज भी अपनी पुरानी भव्यता के साथ खड़े हैं। मंदिरों की दीवारों पर उकेरी गई कलाकृतियां और मूर्तियां बंगाल एवं संताल संस्कृति की झलक दिखाती हैं। झारखंड की ऐतिहासिक धरोहरों में मालूटी को विशेष स्थान प्राप्त है।
सेल्फी ब्रिज और सृष्टि पहाड़ पार्क: नए जमाने के पसंदीदा ठिकाने
मसानजोर डैम के पास बना सेल्फी ब्रिज इन दिनों दुमका का सबसे चर्चित स्थान बन चुका है। मानसून में डैम की पृष्ठभूमि में यह ब्रिज एक शानदार फोटो स्पॉट बन जाता है और सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल होता है। शाम के समय यहां से सूरज के ढलने का नजारा देखने लायक होता है। वीकेंड और छुट्टियों में युवाओं और परिवारों की बड़ी संख्या यहां तस्वीरें खिंचवाने और प्रकृति का आनंद लेने पहुंचती है।
देवघर से करीब 80 किलोमीटर दूर दुमका में स्थित सृष्टि पहाड़ पार्क परिवार के साथ पिकनिक के लिए एक आदर्श जगह है। पहाड़ी पर विकसित इस पार्क में पहुंचते ही चारों ओर फैली हरियाली, ठंडी हवा और दूर-दूर तक दिखने वाला खूबसूरत नजारा मन को तरोताजा कर देता है। बरसात के दिनों में पूरा इलाका हरियाली की चादर में लिपट जाता है और यहां की सुंदरता कई गुना बढ़ जाती है। बच्चों के लिए खेलने की व्यवस्था, बैठने के आकर्षक स्थान, सेल्फी प्वाइंट और सुंदर पैदल रास्ते इसे हर उम्र के सैलानियों के लिए पसंदीदा जगह बनाते हैं।













