ब्लैक हैट सम्मेलन में साइबर शोधकर्ता केटल का खुलासा, इंसानी तालमेल से ही सामने आ रहे हैं गंभीर साइबर खतरेसनी देओल और अमृता सिंह की डेब्यू फिल्म बेताब के 43 साल, जानिए 1.5 करोड़ के बजट वाली फिल्म की ऐतिहासिक कमाईकैमरन नॉरी ने इग्नासियो बुसे को सीधे सेटों में हराकर मॉन्ट्रियल के अंतिम 32 में बनाई जगहहोर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पर ओमान के साथ बनी सहमति, ईरान ने दिया संकेतनई दिल्ली में अफ्रीका दिवस 2026 समारोह, एस जयशंकर ने भारत और अफ्रीका के ऐतिहासिक संबंधों की सराहना कीपुरुष हॉकी विश्व कप 2026 के लिए पाकिस्तान की 20 सदस्यीय टीम का ऐलान, 19 अगस्त को भारत से महामुकाबलाहैशडेक्स का बिटकॉइन ETF DEFI होगा बंद, कम ट्रेडिंग वॉल्यूम के बीच 17 अगस्त से थमेगा कारोबारमूलांक 3 अंकराशि 6 अगस्त 2026: अत्यधिक विश्वास से बचें और दस्तावेज जांचने में न बरतें लापरवाहीइंदौर की डिजिटल क्रिएटर श्रेया कालरा ने जीता लॉक अप 2 का खिताब, 1 करोड़ रुपये की ट्रॉफी की अपने नामफिल्म हमजोली के गाने ढल गया दिन हो गई शाम के 50 साल, बैडमिंटन मैच से मिली थी खास पहचान
बाबा बैद्यनाथ के दर्शन के बाद दुमका की ये 5 जगहें देखना न भूलेंयात्रा
21 जून 2026, 11:33 pm (45 दिन पहले)· 6

बाबा बैद्यनाथ के दर्शन के बाद दुमका की ये 5 जगहें देखना न भूलें

देवघर से मात्र 65 से 70 किलोमीटर दूर स्थित दुमका में आस्था, इतिहास और प्रकृति का अनोखा संगम देखने को मिलता है। बाबा बासुकिनाथ धाम से लेकर मसानजोर डैम और मालूटी के टेराकोटा मंदिरों तक, यह शहर हर यात्री…

बाबा बैद्यनाथ की तीर्थनगरी देवघर से महज डेढ़ से दो घंटे की ड्राइव पर एक ऐसा शहर है जो हर यात्री को कुछ अलग और यादगार देता है। झारखंड की उप-राजधानी दुमका देवघर से 65 से 70 किलोमीटर दूर है और सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है। संताल परगना की राजधानी दुमका केवल प्रशासनिक नजरिये से ही नहीं, बल्कि अपने धार्मिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों के कारण भी हर साल हजारों सैलानियों को अपनी ओर खींचती है।

बाबा बासुकिनाथ धाम: यहां आए बिना दर्शन है अधूरा

दुमका के धार्मिक स्थलों में सबसे पहला नाम बाबा बासुकिनाथ धाम का आता है, जो देवघर से करीब 45 किलोमीटर दूर है। यहां की आस्था बेहद गहरी है। मान्यता यह है कि जब तक कोई श्रद्धालु बासुकिनाथ में भगवान शिव के दर्शन नहीं कर लेता, तब तक बाबा बैद्यनाथ का दर्शन पूर्ण नहीं माना जाता। इसीलिए तीर्थयात्री देवघर के बाद यहां भी अवश्य पहुंचते हैं। सावन और भादो महीनों में लाखों भक्तों की भीड़ यहां उमड़ती है। सैकड़ों वर्ष पुराने इस मंदिर का आध्यात्मिक वातावरण मन को एक अलग ही सुकून और शांति देता है।

ये भी पढ़ें

मसानजोर डैम: पहाड़ों के बीच बसा कनाडियन डैम

देवघर से करीब 85 किलोमीटर दूर मयूराक्षी नदी पर बना मसानजोर डैम दुमका का सबसे आकर्षक पर्यटन स्थल है। इसे कनाडियन डैम भी कहते हैं क्योंकि इसके निर्माण में कनाडा सरकार ने सहयोग दिया था। ऊंची पहाड़ियों, विशाल जलराशि और चारों ओर फैली घनी हरियाली का यह नजारा पिकनिक और घूमने के लिए बेहद लोकप्रिय है। बरसात के दिनों में यहां का माहौल किसी हिल स्टेशन जैसा बन जाता है। डैम के पास बने कॉटेज में ठहरकर पर्यटक यहां की प्राकृतिक सुंदरता का भरपूर आनंद उठा सकते हैं।

तातलोई गर्म जल कुंड: जंगल में गर्म पानी का अनोखा चमत्कार

देवघर से लगभग 55 किलोमीटर की दूरी पर घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच छुपा तातलोई गर्म जल कुंड पर्यटकों में काफी लोकप्रिय है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसका पानी साल के बारहों महीने गर्म रहता है। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि यहां के गर्म पानी में स्नान करने से त्वचा से जुड़ी कई समस्याओं में राहत मिलती है। सर्दियों के मौसम में यहां पर्यटकों की संख्या और बढ़ जाती है। प्रकृति की गोद में गर्म पानी का यह अनोखा संगम इसे एक यादगार अनुभव बनाता है।

मालूटी के टेराकोटा मंदिर: इतिहास की जीवंत धरोहर

इतिहास और पुरानी वास्तुकला में रुचि रखने वालों के लिए मालूटी गांव किसी खजाने से कम नहीं। देवघर से इसकी दूरी करीब 75 किलोमीटर है। यह गांव पूरे देश में अपने प्राचीन टेराकोटा मंदिरों के लिए पहचाना जाता है। कहा जाता है कि कभी यहां 108 मंदिर हुआ करते थे, जिनमें से कई आज भी अपनी पुरानी भव्यता के साथ खड़े हैं। मंदिरों की दीवारों पर उकेरी गई कलाकृतियां और मूर्तियां बंगाल एवं संताल संस्कृति की झलक दिखाती हैं। झारखंड की ऐतिहासिक धरोहरों में मालूटी को विशेष स्थान प्राप्त है।

सेल्फी ब्रिज और सृष्टि पहाड़ पार्क: नए जमाने के पसंदीदा ठिकाने

मसानजोर डैम के पास बना सेल्फी ब्रिज इन दिनों दुमका का सबसे चर्चित स्थान बन चुका है। मानसून में डैम की पृष्ठभूमि में यह ब्रिज एक शानदार फोटो स्पॉट बन जाता है और सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल होता है। शाम के समय यहां से सूरज के ढलने का नजारा देखने लायक होता है। वीकेंड और छुट्टियों में युवाओं और परिवारों की बड़ी संख्या यहां तस्वीरें खिंचवाने और प्रकृति का आनंद लेने पहुंचती है।

देवघर से करीब 80 किलोमीटर दूर दुमका में स्थित सृष्टि पहाड़ पार्क परिवार के साथ पिकनिक के लिए एक आदर्श जगह है। पहाड़ी पर विकसित इस पार्क में पहुंचते ही चारों ओर फैली हरियाली, ठंडी हवा और दूर-दूर तक दिखने वाला खूबसूरत नजारा मन को तरोताजा कर देता है। बरसात के दिनों में पूरा इलाका हरियाली की चादर में लिपट जाता है और यहां की सुंदरता कई गुना बढ़ जाती है। बच्चों के लिए खेलने की व्यवस्था, बैठने के आकर्षक स्थान, सेल्फी प्वाइंट और सुंदर पैदल रास्ते इसे हर उम्र के सैलानियों के लिए पसंदीदा जगह बनाते हैं।

सवाल-जवाब

दुमका, देवघर से कितनी दूर है और वहां पहुंचने में कितना समय लगता है?
दुमका देवघर से करीब 65 से 70 किलोमीटर दूर है और सड़क मार्ग से डेढ़ से दो घंटे में आसानी से पहुंचा जा सकता है।
बाबा बासुकिनाथ धाम देवघर से कितनी दूरी पर है?
बाबा बासुकिनाथ धाम देवघर से करीब 45 किलोमीटर दूर स्थित है।
मसानजोर डैम को कनाडियन डैम क्यों कहा जाता है?
इस डैम के निर्माण में कनाडा सरकार ने सहयोग दिया था, इसीलिए इसे कनाडियन डैम के नाम से जाना जाता है।
तातलोई गर्म जल कुंड में जाने का सबसे अच्छा समय कौन सा है?
तातलोई में सर्दियों के मौसम में पर्यटकों की संख्या सबसे ज्यादा होती है, हालांकि कुंड का पानी साल के बारहों महीने गर्म रहता है।
मालूटी गांव में कितने मंदिर थे?
कहा जाता है कि मालूटी में कभी 108 मंदिर हुआ करते थे, जिनमें से कई आज भी मौजूद हैं।
सृष्टि पहाड़ पार्क देवघर से कितना दूर है?
सृष्टि पहाड़ पार्क देवघर से करीब 80 किलोमीटर की दूरी पर दुमका में स्थित है।
मसानजोर डैम किस नदी पर बना है?
मसानजोर डैम मयूराक्षी नदी पर बना है।
बाबा बासुकिनाथ धाम में सबसे ज्यादा भीड़ किन महीनों में होती है?
सावन और भादो के महीनों में बाबा बासुकिनाथ धाम में लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR