अंतरराष्ट्रीय पर्यटन के नक्शे पर अनोखे और रोमांचक अनुभवों की तलाश करने वाले भारतीय यात्रियों के लिए मंगोलिया का सफर अब बेहद सुगम हो गया है। नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से मंगोलिया की राजधानी उलान बटोर के बीच एक नई सीधी हवाई सेवा की शुरुआत की गई है। इस नए वायु मार्ग के शुरू होने से पहले तक भारत से मंगोलिया जाने के इच्छुक लोगों को सियोल, बीजिंग अथवा बैंकॉक के रास्ते कनेक्टिंग उड़ानों पर निर्भर रहना पड़ता था, जिसमें 13 से 18 घंटे तक का लंबा समय खर्च हो जाता था। हुन्नू एयर की इस नई नॉन-स्टॉप उड़ान ने इस फासले को समेटकर केवल 5 घंटे 30 मिनट का कर दिया है। फिलहाल यह विमान सेवा सप्ताह में एक दिन संचालित की जा रही है, हालांकि मांग और यात्रियों की संख्या में वृद्धि होने पर इसकी उड़ानों के फेरे बढ़ाए जाएंगे।
नासा ने माना धरती का सबसे सर्द प्रशासनिक केंद्र
अक्सर लोग रूस की राजधानी मास्को को दुनिया की सबसे ठंडी राजधानी मानने का भ्रम पाल लेते हैं, लेकिन अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक यह खिताब वास्तव में उलान बटोर के नाम दर्ज है। भौगोलिक और मौसमी बनावट के चलते उलान बटोर में सर्दियों का औसत तापमान शून्य से 13 डिग्री नीचे (-13 डिग्री सेल्सियस) से लेकर शून्य से 25 डिग्री नीचे (-25 डिग्री सेल्सियस) तक गिर जाता है। जनवरी के महीने में यहां का पारा अक्सर लुढ़ककर शून्य से 40 डिग्री नीचे (-40 डिग्री सेल्सियस) तक पहुंच जाता है।
तुलनात्मक दृष्टि से देखें तो मास्को में दिसंबर से फरवरी के दौरान औसत तापमान -5 डिग्री सेल्सियस से -10 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया जाता है, जबकि जनवरी के सबसे ठंडे दिनों में यह गिरकर शून्य से 25 डिग्री नीचे तक जाता है। दोनों राजधानियों के बीच ठंड के स्वरूप और बर्फबारी में भी गहरा अंतर पाया जाता है। उलान बटोर में बर्फबारी बहुत हल्की होती है, लेकिन यहां का मौसम अत्यधिक शुष्क रहने के कारण चुभने वाली तीखी ठंड पैदा करता है। सर्दियों के मौसम में इस पूरे इलाके में वायुमंडलीय दबाव बहुत ज्यादा बना रहता है, जिसके परिणामस्वरूप यहां बड़े बर्फीले तूफान तो नहीं आते, परंतु हाड़ कंपाने वाली भीषण ठंड की वजह से गिरने वाली हल्की बर्फ भी महीनों तक नहीं पिघलती और समूचे शहर पर लंबे समय तक सफेद चादर की तरह बिछी रहती है।
गोबी मरुस्थल: पथरीली जमीन और जीवाश्मों का समृद्ध संसार
मंगोलिया का सबसे बड़ा भौगोलिक आकर्षण गोबी मरुस्थल है, जिसे एशिया महाद्वीप का दूसरा सबसे बड़ा मरुस्थल होने का गौरव प्राप्त है। अफ्रीका के सहारा जैसे पारंपरिक रेतीले रेगिस्तानों के उलट, गोबी मरुस्थल का अधिकांश हिस्सा नग्न चट्टानों, बजरी और पथरीले विशाल मैदानों से ढका हुआ है। यह एक अत्यधिक ठंडे स्वभाव वाला मरुस्थल है, जहां कड़ाके की सर्दियों में तापमान शून्य से 40 डिग्री नीचे (-40 डिग्री सेल्सियस) तक चला जाता है और इसके पथरीले टीलों पर बर्फ जमी नजर आती है।
पुरातात्विक और वैज्ञानिक दृष्टि से गोबी मरुस्थल समूचे विश्व के सबसे प्रमुख धरोहर स्थलों में गिना जाता है। वर्ष 1920 के दशक में पहली बार इसी क्षेत्र में डायनासोर के दुर्लभ जीवाश्म और उनके अंडों की ऐतिहासिक खोज हुई थी। इसके अलावा, यह मरुस्थल बेहद दुर्लभ और लुप्तप्राय वन्यजीव प्रजातियों की शरणस्थली भी है, जिनमें दो कूबड़ वाले अनोखे बैक्टीरियन ऊंट, गोबी भालू और हिम तेंदुए शामिल हैं। ऐतिहासिक संदर्भों में देखें तो प्राचीन काल के प्रसिद्ध सिल्क रूट यानी रेशम मार्ग के कई रणनीतिक व्यापारिक रास्ते और महत्वपूर्ण पड़ाव इसी दुर्गम मरुस्थलीय भूभाग से होकर निकलते थे।
ऐतिहासिक धरोहरें, विशाल प्रतिमा और घुमंतू संस्कृति
उलान बटोर शहर और उसके इर्द-गिर्द पर्यटकों के लिए देखने योग्य कई प्रमुख ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थल मौजूद हैं। राजधानी के भीतर स्थित चंगेज़ खान राष्ट्रीय संग्रहालय में मंगोलियाई साम्राज्य के गौरवशाली इतिहास और समृद्ध बौद्ध धरोहरों से जुड़े अनगिनत दुर्लभ अवशेष प्रदर्शित किए गए हैं। शहर की सीमाओं में स्थित जैशन मेमोरियल भी ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है।
उलान बटोर शहर से करीब 54 किलोमीटर की दूरी पर चंगेज खान स्टैचू कॉम्पलेक्स स्थित है। इस परिसर में एक शक्तिशाली घोड़े पर सवार चंगेज़ खान की 40 मीटर ऊंची विशाल प्रतिमा स्थापित है, जिसे पूरी तरह चमकदार स्टेनलेस स्टील से तैयार किया गया है। प्रकृति और वन्य परिवेश से लगाव रखने वाले घुमक्कड़ों के लिए राजधानी के निकट बसा गोरखी तीरलेज नेशनल पार्क एक आदर्श गंतव्य है। वहीं देश के उत्तरी हिस्से में स्थित खुब्सगुल झील प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत नमूना पेश करती है। अपने बेहद स्वच्छ और पारदर्शी पानी के कारण इसे 'मंगोलिया का नीला मोती' पुकारा जाता है।
आधुनिकता की चकाचौंध से दूर मंगोलिया आज भी अपनी सदियों पुरानी आदिम घुमंतू संस्कृति को संजोए हुए है। यहां आने वाले यात्रियों के लिए चरवाहा समुदायों और पारंपरिक जनजातियों के साथ उनके गोल तंबुओं, जिन्हें स्थानीय भाषा में 'गेर' कहा जाता है, में ठहरना और स्थानीय पारंपरिक खान-पान का आस्वाद लेना एक जीवन भर याद रहने वाला अनुभव साबित होता है।
वीज़ा नियम, मौसम और यात्रा की सही योजना
भारतीय नागरिकों के लिए मंगोलिया का भ्रमण प्रशासनिक रूप से भी बेहद सुविधाजनक बनाया गया है। मौजूदा यात्रा दिशानिर्देशों के तहत भारतीय पर्यटक मंगोलियाई पर्यटक ई-वीज़ा के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं, जिसकी वैधता अवधि 30 दिनों तक की होती है। मौसमी दृष्टिकोण से मंगोलिया की यात्रा करने के लिए सबसे अनुकूल और सुहावना समय जून से अगस्त के महीनों के बीच माना जाता है, जब गर्मियों में मौसम घूमने लायक रहता है। यात्रा की योजना बना रहे पर्यटकों को सलाह दी जाती है कि वे रवाना होने से पहले मंगोलिया की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर मौसम की ताजा और सटीक जानकारी अवश्य जांच लें, ताकि भीषण मौसमी परिस्थितियों से बचा जा सके।



















