सिनेमा के पर्दे पर कई ऐसे कलाकार आते हैं जो बहुत कम समय के लिए स्क्रीन पर दिखते हैं लेकिन दर्शकों के दिलों पर अपनी अमिट छाप छोड़ जाते हैं। राजकुमार हिरानी के निर्देशन और संजय दत्त के मुख्य अभिनय वाली लोकप्रिय फिल्म मुन्ना भाई एमबीबीएस में एक ऐसा ही किरदार था। अस्पताल के वार्ड में भर्ती वह युवक, जिसने प्यार में धोखा खाने के बाद हताश होकर अपनी जान देने की कोशिश की थी। फिल्म में जब वह मायूस बैठा होता है, तब मुख्य किरदार उसे जिंदगी की नई उम्मीद देता है और बैकग्राउंड में अपुन जैसे टपोरी गाना बजता है। पर्दे पर उस भावुक और यादगार किरदार को निभाने वाले युवा कलाकार का नाम विशाल ठक्कर था। विडंबना यह रही कि जिस किरदार को फिल्म में प्यार में गहरे धोखे से जूझते दिखाया गया था, असल जिंदगी में भी उस अभिनेता की दास्तान बेहद रहस्यमय और दर्दनाक मोड़ पर जाकर ठहर गई।
चांदनी बार से लेकर छोटे पर्दे तक का शानदार सफर
विशाल ठक्कर ने बेहद कम उम्र में ही अभिनय की दुनिया में कदम रख दिया था और अपनी प्रतिभा से कई दिग्गज निर्देशकों का ध्यान खींचा था। मुन्ना भाई एमबीबीएस में उनका रोल भले ही लगभग सात मिनट का रहा हो, मगर उनकी अदाकारी ने उस दृश्य को हमेशा के लिए यादगार बना दिया। इस बड़ी फिल्म से पहले वह मधुर भंडारकर की बहुचर्चित फिल्म चांदनी बार में भी एक भूमिका निभा चुके थे। फिल्मों के अलावा टेलीविजन की दुनिया में भी उनका काम लगातार सराहा जा रहा था। उन्होंने आहट, किस देश में है मेरा दिल, कहानी हमारे महाभारत की, बेहद चर्चित कॉमेडी शो तारक मेहता का उल्टा चश्मा और थपकी प्यार की जैसे कई धारावाहिकों में अलग-अलग भूमिकाएं निभाई थीं। उनका करियर धीरे-धीरे एक मजबूत मुकाम की तरफ बढ़ रहा था, लेकिन साल 2015 के अंत में एक ऐसी घटना घटी जिसने उनके पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।
साल की आखिरी रात और 500 रुपये का उधार
साल 2015 का आखिरी दिन यानी 31 दिसंबर की तारीख विशाल ठक्कर के परिजनों के लिए कभी न भूलने वाला दिन बन गई। उस शाम विशाल ने अपनी मां से 500 रुपये उधार लिए थे। उन्होंने मां को बताया था कि वह अपने दोस्तों के साथ नई रिलीज हुई हॉलीवुड फिल्म स्टार वॉर्स: द फोर्स अवेकेंस देखने के लिए सिनेमा हॉल जा रहे हैं। मां ने बेटे को खुशी-खुशी विदा किया और रात करीब 10:30 बजे विशाल अपने घर से बाहर निकल गए। पूरा देश और मुंबई शहर नए साल के स्वागत के जश्न में डूबा हुआ था। देर रात करीब 1:00 बजे विशाल ने अपने बिजनेसमैन पिता महेंद्र को मोबाइल पर एक टेक्स्ट मैसेज भेजा। इस संदेश में उन्होंने लिखा कि वह अपने एक दोस्त के यहां पार्टी में जा रहे हैं और अगले दिन घर आकर मिलेंगे। परिवार के सदस्यों के लिए विशाल का यह आखिरी संपर्क साबित हुआ, क्योंकि इसके बाद उनका कोई सीधा संदेश या कॉल कभी नहीं आया।
अहमदाबाद हाईवे का रिजॉर्ट और आखिरी बातचीत
जांच के दौरान जो कड़ियां सामने आईं, उनके अनुसार न्यू ईयर की उस शाम विशाल अपनी गर्लफ्रेंड के साथ मौजूद थे। दोनों अहमदाबाद हाईवे पर स्थित एक रिजॉर्ट में गए थे, जहां उन्होंने साथ में समय बिताया और खाना-पीना किया। कुछ देर बाद विशाल ने अपनी गर्लफ्रेंड से कहा कि उन्हें मुंबई के अंधेरी इलाके में रहने वाले अपने एक दोस्त से जरूरी मुलाकात करनी है, इसलिए उन्हें वहां से निकलना पड़ेगा। इसके बाद वह वहां से रवाना हो गए। अगली सुबह यानी 1 जनवरी 2016 को करीब 11:45 बजे विशाल को अंधेरी में देखा गया था, जहां वह सड़क किनारे से एक ऑटोरिक्शा ले रहे थे। इसके कुछ ही देर बाद, दोपहर लगभग 12:10 बजे उनके फेसबुक अकाउंट से नए साल की शुभकामनाओं का एक संदेश पोस्ट किया गया। यह पोस्ट उनके सोशल मीडिया का अंतिम अपडेट था। उसी समय के आसपास उनका मोबाइल फोन भी स्विच ऑफ हो गया और उनका आखिरी कॉल डेटा रिकॉर्ड ठाणे के पास घोड़बंदर रोड का पाया गया।
आरोपों का दौर, पुलिसिया जांच और अधूरा सच
जब विशाल घर नहीं लौटे तो परिजनों की चिंता बढ़ गई और मामले की शिकायत दर्ज कराई गई। शुरुआती दौर में जांच अधिकारियों का ध्यान उनकी गर्लफ्रेंड की तरफ गया, लेकिन गहन पड़ताल के बाद ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला जिससे उन पर कोई सीधा आरोप तय किया जा सके। यह मामला सामान्य अपहरण का भी प्रतीत नहीं होता था, क्योंकि परिवार के पास कभी किसी अज्ञात व्यक्ति या गिरोह से फिरौती की मांग का कोई फोन नहीं आया। हालांकि, जांच में एक पुरानी घटना जरूर सामने आई जिसने कई सवाल खड़े किए। विशाल की मां ने बताया था कि गायब होने से करीब तीन महीने पहले विशाल एक कानूनी विवाद में उलझ गए थे। उनकी एक पुरानी गर्लफ्रेंड ने आपसी विवाद और झगड़े के बाद उन पर दुष्कर्म और मारपीट का गंभीर आरोप लगाया था। मामला थाने तक पहुंचा था, लेकिन बाद में दोनों पक्षों में आपसी समझौता हो गया था और वह शिकायत वापस ले ली गई थी।
सवालों के घेरे में गायब हुआ एक होनहार कलाकार
विशाल के परिचितों और सहकर्मियों का मानना था कि उस पुराने कानूनी विवाद और बदनामी का अभिनेता के मानसिक स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर पड़ा था। इस विवाद के सामने आने के बाद उन्हें इंडस्ट्री में नए प्रोजेक्ट्स और काम हासिल करने में भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। इसके बावजूद, 31 दिसंबर की उस रात आखिर उनके साथ क्या हुआ, वे कहां गए या किसी अनहोनी का शिकार हुए, इसका कोई आधिकारिक जवाब आज तक सामने नहीं आ सका है। पुलिस की जांच कई सालों तक चलने के बावजूद किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। आज लगभग एक दशक बीत जाने के बाद भी उनकी बुजुर्ग मां इसी आस में दिन गुजार रही हैं कि उनका बेटा किसी रोज सकुशल घर वापस लौट आएगा।



















