उत्तर प्रदेश के सीतापुर में पुलिस के हत्थे एक ऐसा शातिर दंपती चढ़ा है जो खुद को बड़ा सरकारी अफसर बताकर लोगों की गाढ़ी कमाई हड़प रहा था। सस्ते दाम पर नीलामी का सोना दिलाने और कटे-फटे या खराब नोट बदलवाने का झांसा देकर इस जोड़े ने स्थानीय लोगों से करीब 27 लाख रुपये की चपत लगाई और फरार हो गया। पुलिस की पड़ताल में सामने आया है कि यह कोई पहली वारदात नहीं थी, बल्कि यह जोड़ा पिछले कई सालों से अलग-अलग राज्यों में लोगों को अपना शिकार बनाता आ रहा था।
फर्जी पहचान बनाकर मोहल्ले में जमाई धाक
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान कन्नौज निवासी रोहित बाजपेयी और उसकी पत्नी अन्नू बाजपेयी उर्फ चंद्रा के रूप में हुई है, जो मूल रूप से नेपाल के चितवन की रहने वाली है। इस दंपती ने सीतापुर शहर के प्रेम नगर इलाके में एक मकान किराये पर लिया था। वहां रहते हुए दोनों ने खुद को सरकारी विभाग का वरिष्ठ अधिकारी बताया और आसपास के लोगों के बीच अपनी गहरी पैठ बना ली। रसूखदार दिखने की वजह से पड़ोसियों और जान-पहचान वालों को उन पर जरा भी संदेह नहीं हुआ।
सस्ते सोने और नोट बदलने के नाम पर वसूली
सीतापुर के पुलिस अधीक्षक अंकुर अग्रवाल ने पूरे मामले की जानकारी साझा करते हुए बताया कि आरोपियों ने अपने मकान मालिक रामनरेश जायसवाल को सबसे बड़ा निशाना बनाया। उन्हें सरकारी नीलामी से बेहद कम कीमत पर सोना दिलाने का लालच दिया गया और इस बहाने उनसे अकेले 20 लाख रुपये ऐंठ लिए गए। इसके अलावा खराब नोट बदलने का भरोसा देकर 2 लाख रुपये लिए गए। आरोपियों ने इलाके के एक अन्य शख्स से 1 लाख रुपये और कपड़े धोने वाले एक स्थानीय लॉन्ड्री संचालक से 4 लाख रुपये की ठगी की। इस तरह कुल मिलाकर 27 लाख रुपये जुटाए गए।
रुपये समेटकर कई शहरों में बदले ठिकाने
रकम हाथ लगते ही दोनों आरोपी 14 सितंबर को चुपचाप सीतापुर छोड़कर भाग निकले। पुलिस से बचने के लिए उन्होंने लगातार अपने ठिकाने बदले और आगरा, कोटा, बैतूल से लेकर चेन्नई तक शरण ली। जांच में यह भी पता चला कि लोगों से ठगे गए पैसों में से आरोपियों ने करीब 6 लाख रुपये के सोने के जेवर और दो महंगे मोबाइल फोन खरीदे थे, ताकि नकदी को आसानी से खपाया जा सके।
लाखों की नकदी और फर्जी पहचान पत्र बरामद
पुलिस टीम ने बुधवार को आखिरकार दोनों को गिरफ्तार कर लिया। तलाशी के दौरान आरोपियों के पास से 14 लाख रुपये की नकद रकम, लगभग 38.740 ग्राम सोने के आभूषण और चार मोबाइल फोन बरामद किए गए। इसके साथ ही उनके पास से पीएनबी, आयकर विभाग, आधार कार्ड और पैन कार्ड के फर्जी पहचान पत्र भी जब्त किए गए हैं, जिनका इस्तेमाल वे लोगों पर रौब जमाने और खुद को असली अधिकारी साबित करने के लिए करते थे।
पांच राज्यों में फैला है आपराधिक नेटवर्क
पुलिस पूछताछ में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ कि यह दंपती वर्ष 2005 से ही इसी तरह की ठगी की गतिविधियों में लिप्त रहा है। उनके खिलाफ उत्तर प्रदेश के अलावा मध्य प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान और बिहार में भी आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस अब इनके पूरे नेटवर्क, पुराने मुकदमों और ठगी में शामिल अन्य संभावित मददगारों का ब्योरा जुटाने में लगी हुई है।



















