सिनेमाघरों में ऐतिहासिक कारोबार करने वाली फिल्म हनुमान अंश की अभूतपूर्व सफलता ने पूरे मनोरंजन जगत को चौंका दिया है। बेहद सीमित संसाधनों और महज 2 करोड़ रुपये से भी कम के मामूली बजट में तैयार की गई इस धार्मिक गाथा ने दुनिया भर के बॉक्स ऑफिस पर 400 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई का मील का पत्थर पार किया। इस शानदार उपलब्धि के तुरंत बाद फिल्म निर्माताओं ने इसके दूसरे अध्याय यानी सीक्वल के निर्माण की आधिकारिक घोषणा कर दी। हालांकि इसके साथ ही दर्शकों और समीक्षकों के बीच यह चर्चा तेज हो गई थी कि क्या पहली किस्त में बजट की तंगी झेलने वाली प्रोडक्शन टीम अब सीक्वल के लिए 10 से 20 करोड़ रुपये जैसा बड़ा बजट आवंटित करने जा रही है।
सीक्वल के बजट पर निर्माता ने रखी अपनी बात
इन तमाम अटकलों और सवालों पर पूर्ण विराम लगाते हुए फिल्म की निर्माता अनुप्रिया नागर ने अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। उन्होंने साफ लहजे में कहा कि सीक्वल को भी लगभग उसी नियंत्रित और संतुलित बजट में बनाया जाएगा, जिस तरह पहली फिल्म का निर्माण हुआ था। निर्माता का मानना है कि केवल सफलता मिल जाने के आधार पर फिजूलखर्ची करना बिल्कुल गलत रणनीति है। अगर पटकथा अथवा दृश्य संयोजन की मांग होगी, तभी अतिरिक्त धन लगाया जाएगा। बिना किसी ठोस आवश्यकता के बजट का दिखावा खड़ा करने का उनका कोई इरादा नहीं है।
वीएफएक्स और तकनीक पर बेवजह खर्च से परहेज
हनुमान अंश 2 की वित्तीय योजना पर चर्चा करते हुए निर्माता अनुप्रिया नागर ने बताया कि 10 या 20 करोड़ रुपये का भारी भरकम बजट झोंकने का कोई वास्तविक औचित्य नहीं बनता। प्रोडक्शन टीम का लक्ष्य केवल तकनीकी तड़क भड़क पर रुपया लुटाना नहीं है। उन्होंने रेखांकित किया कि व्यर्थ के वीएफएक्स अथवा आधुनिक एआई उपकरणों पर अनावश्यक पूंजी नहीं लगाई जाएगी। परियोजना में निवेश केवल कहानी और पटकथा की स्वाभाविक प्राथमिकताओं के अनुरूप ही तय किया जाएगा।
अनुप्रिया नागर ने जोर देकर कहा कि उनकी सबसे पहली प्राथमिकता सिनेमाई यथार्थवाद को कायम रखना है। जिस समर्पण, आस्था और सच्चाई के साथ पहली फिल्म की पटकथा बुनी गई थी, दूसरे भाग में भी उसी भावना को सुरक्षित रखा जाएगा। केवल चर्चा बटोरने अथवा कृत्रिम प्रचार तैयार करने के लिए कोई भी दिखावटी कदम नहीं उठाया जाएगा।
यथार्थवादी परिवेश और प्रामाणिकता पर जोर
फिल्म की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पृष्ठभूमि पर बात करते हुए निर्माता ने समझाया कि वे जिस कालखंड की दास्तान पर्दे पर पेश कर रहे हैं, उसमें केवल पात्रों का जीवंत होना ही पर्याप्त नहीं है। उस दौर के सामाजिक परिवेश, प्राकृतिक दृश्यों और समग्र वातावरण का वास्तविक दिखना अनिवार्य है। इसी कारण निर्माण दल ने हर छोटे बड़े पहलू में ऐतिहासिक प्रामाणिकता और यथार्थ का विशेष ध्यान रखा है ताकि दर्शक उस दौर से सहजता से जुड़ सकें।
दर्शकों से मिले अपार स्नेह और विश्वास का उल्लेख करते हुए अनुप्रिया नागर ने कहा कि इस सफलता ने निर्माताओं के कंधों पर नैतिक जिम्मेदारी बढ़ा दी है। जब दर्शकों का भरोसा इतना गहरा हो, तो वित्तीय प्रबंधन में और अधिक सतर्कता बरतनी पड़ती है। पूंजी का इस्तेमाल केवल रचनात्मक उत्थान के लिए होना चाहिए, न कि व्यर्थ की चमक धमक दिखाने के लिए। यदि कहानी वास्तव में किसी बड़े दृश्य निर्माण की मांग करेगी, तभी बजट बढ़ाया जाएगा।
पहले भाग की लागत और फिल्म की पृष्ठभूमि
पहली फिल्म के वास्तविक खर्च का खुलासा करते हुए अनुप्रिया नागर ने साझा किया कि हनुमान अंश का कुल बजट 2 करोड़ रुपये से भी कम रहा था। असल में फिल्म के निर्माण में करीब 1.5 करोड़ रुपये से थोड़ा ही अधिक खर्च आया था। इतने संक्षिप्त बजट में बनी कृति ने सिनेमाघरों में जाकर असाधारण इतिहास रच दिया।
उल्लेखनीय है कि हनुमान अंश 7 अगस्त को बड़े पर्दे पर रिलीज की गई थी। यह फिल्म श्रद्धेय नीम करोली बाबा के प्रेरक जीवन दर्शन और उनकी गाथा पर आधारित है। इस आध्यात्मिक कथानक में शोभिनव सत्या ने मुख्य भूमिका निभाई थी, जबकि निर्देशन की कमान डॉ विशाल चतुर्वेदी ने संभाली थी। सीमित बजट और प्रभावशाली विषय वस्तु के बल पर इस फिल्म ने दुनिया भर में 400 करोड़ रुपये का विशाल संग्रह अर्जित किया है।



















