राजस्थान के इकलौते हिल स्टेशन माउंट आबू तक पहुंचने का सफर जल्द ही छोटा और आसान होने वाला है। अब तक यहां आने के लिए आबूरोड से माउंट आबू वाली एकमात्र सड़क ही सहारा थी, लेकिन अब गुलाबगंज से माउंट आबू तक 23 किलोमीटर लंबी डबल लेन सड़क बनाने का रास्ता साफ हो गया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के माउंट आबू दौरे के दौरान इस सड़क परियोजना की डीपीआर को मंजूरी दे दी गई, जो लंबे समय से सरकार के पास लंबित पड़ी थी।
यह सड़क पहले स्वीकृत तो हो चुकी थी, मगर इसकी डीपीआर पर मुहर लगना बाकी था। सिरोही जिले की रेवदर तहसील के गुलाबगंज से माउंट आबू तक फिलहाल सिर्फ एक कच्चा रास्ता है, जिस पर लोग पैदल ही आना-जाना करते हैं। इसी कच्चे रास्ते को पक्की सड़क में बदलने की मांग बरसों से उठ रही थी।
सिर्फ एक रास्ता, इसलिए हर सीजन में जाम की मार
माउंट आबू तक पहुंचने का अब तक कोई दूसरा विकल्प नहीं होने की वजह से दिक्कतें बनी रहती हैं। बारिश के मौसम में पहाड़ों से गिरने वाले पत्थर और पर्यटन सीजन में वाहनों की भारी आवाजाही के चलते यह इकलौता रास्ता कई बार जाम हो जाता है। ऐसे में सैलानियों को खासी परेशानी झेलनी पड़ती है। सिरोही, रेवदर और कांडला हाईवे की तरफ से आने वाले पर्यटकों को तो माउंट आबू पहुंचने के लिए कहीं ज्यादा लंबा चक्कर काटना पड़ता है। इसी समस्या को देखते हुए सरकार ने गुलाबगंज से माउंट आबू तक 23 किलोमीटर लंबी डबल लेन सड़क बनाने का फैसला किया।
दूरी घटेगी, समय और ईंधन दोनों बचेंगे
नई सड़क बन जाने के बाद सिरोही जिला मुख्यालय से माउंट आबू पहुंचने में पौने घंटे का समय बचेगा। जिला मुख्यालय से माउंट आबू की दूरी 45 किलोमीटर तक कम हो जाएगी, जिससे सफर का समय और ईंधन दोनों की बचत होगी।
माउंट आबू के स्थानीय निवासी सुनील आचार्य के मुताबिक गुलाबगंज सड़क माउंट आबू के पर्यटन को नई रफ्तार देगी। इससे माउंट आबू की सीधी कनेक्टिविटी कांडला हाईवे से हो जाएगी। रेवदर के पावापुरी जैन मंदिर से माउंट आबू के देलवाड़ा जैन मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को इसका सीधा फायदा मिलेगा, क्योंकि उन्हें 40 से 50 किलोमीटर कम दूरी तय करनी होगी।
वन्यजीवों को नुकसान नहीं, 18 पुल प्रस्तावित
यह मार्ग वन्यजीव क्षेत्र से होकर गुजरता है, इसलिए यहां के वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 18 पुल भी प्रस्तावित किए गए हैं। पूरे प्रोजेक्ट में 17 किलोमीटर बिल्कुल नई डबल लेन सड़क बनेगी, जबकि 6 किलोमीटर हिस्से में सड़क का चौड़ाईकरण और सुदृढ़ीकरण किया जाएगा। डीपीआर को मंजूरी मिलने के बाद अब वन विभाग और पर्यावरण स्वीकृति के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा, और इसके बाद ही सड़क का काम शुरू हो सकेगा।













