यूएसएआईडी में कागजी कार्रवाई के बिना ही फैसले लेते रहे जेरेमी लेविन, एचआर रिकॉर्ड में नहीं था नामबेंगलुरु में डीआरडीओ से जुड़ी एजेंसी के वरिष्ठ वैज्ञानिक की संदिग्ध मौत, काम के तनाव का आरोपलखनऊ ट्रिपल मर्डर मामला: एलडीए ने आरोपी के घर पर चलाया बुलडोजर, अवैध निर्माण बताकर किया सीलकेरल कांग्रेस ने मुख्य न्यायाधीश पर पोस्ट विवाद के बाद मांगी माफी, उठाया कड़ा कदम15 दिसंबर से शुरू होगा फॉग सीजन, उड़ानों में देरी पर यात्रियों की परेशानी कम करने के लिए सरकार ने बनाई खास रणनीतितुला राशि में वक्री शुक्र का वैवाहिक जीवन पर असर, करवाचौथ से पहले 28 अक्टूबर को उदय होंगेखरगे की टिप्पणी पर गरमाई राजनीति, सर्वे में 72 प्रतिशत लोगों ने माना संस्कारों पर सीधा प्रहारअरुणाचल प्रदेश में सुईंग प्रोजेक्ट पर मंत्री ओजिंग तासिंग ने प्रभावित लोगों से की चर्चाझालावाड़ में दम्पति का विवाद सुलझाना पड़ा भारी, बीच-बचाव करने गए दो युवकों पर चाकू से हमलाजोधपुर में भारतमाला एक्सप्रेस-वे पर केमिकल टैंकर में लगी भीषण आग, दमकल की गाड़ियों ने पाया काबू
हरिद्वार यात्रा: सिर्फ हर की पौड़ी नहीं, एक दिन में ऐसे करें इन 6 पौराणिक स्थलों के दर्शनयात्रा
22 अग॰ 2026, 4:42 pm (66 दिन पहले)· 3

हरिद्वार यात्रा: सिर्फ हर की पौड़ी नहीं, एक दिन में ऐसे करें इन 6 पौराणिक स्थलों के दर्शन

हरिद्वार यात्रा को सिर्फ गंगा स्नान तक सीमित न रखें। एक दिन के समय में शहर के इन छह प्रमुख पौराणिक और धार्मिक स्थलों के दर्शन आसानी से किए जा सकते हैं।

हरिद्वार का नाम सुनते ही सबसे पहले मन में हर की पौड़ी और वहां होने वाले गंगा स्नान की तस्वीर उभरती है। देश और दुनिया के कोने-कोने से हर साल भारी संख्या में श्रद्धालु यहां आस्था की डुबकी लगाने पहुंचते हैं। हालांकि, इस पावन शहर की पहचान केवल हर की पौड़ी तक ही सीमित नहीं है। इसके आसपास कई ऐसे प्राचीन और धार्मिक स्थल मौजूद हैं, जहां जाकर आप इस शहर की गहरी आध्यात्मिक विरासत को बहुत करीब से महसूस कर सकते हैं। यदि आपके पास यात्रा के लिए कम समय है, तो भी आप एक दिन के भीतर इन सभी प्रमुख स्थानों के दर्शन कर सकते हैं और अपनी इस छोटी यात्रा को यादगार बना सकते हैं।

ब्रह्मकुंड हर की पौड़ी से करें शुरुआत

हरिद्वार पहुंचने के बाद अपनी एक दिवसीय यात्रा की शुरुआत सीधे ब्रह्मकुंड हर की पौड़ी से की जा सकती है। यहां मां गंगा के पावन जल में डुबकी लगाने के बाद श्रद्धालु आसपास के जीवंत बाजारों में घूम सकते हैं और अपनी जरूरत का हर जरूरी सामान खरीद सकते हैं। यह स्थान हरिद्वार आने वाले हर एक यात्री और भक्त के लिए सबसे मुख्य और केंद्र बिंदु माना जाता है, जहां से शहर की असली रौनक शुरू होती है।

ये भी पढ़ें

मनसा देवी और चंडी देवी के करें दर्शन

हर की पौड़ी पर समय बिताने के बाद आप शिवालिक पहाड़ियों के बिल्व पर्वत पर स्थित प्रसिद्ध सिद्धपीठ मां मनसा देवी मंदिर की ओर रुख कर सकते हैं। इसके तुरंत बाद गंगा नदी के दूसरे छोर पर नील पर्वत पर विराजमान मां चंडी देवी मंदिर के दर्शन किए जा सकते हैं। इन दोनों ही प्रमुख मंदिरों तक पहुंचने के लिए पैदल सीढ़ियों का रास्ता तो है ही, साथ ही आधुनिक रोपवे की सुविधा भी सुलभ है। यदि आपके पास समय की कमी है और आप जल्दी दर्शन करना चाहते हैं, तो रोपवे का विकल्प आपके लिए बेहद आरामदायक और सुविधाजनक साबित हो सकता है।

कनखल में स्थित दक्षेश्वर महादेव मंदिर

इन मंदिरों के दर्शन के बाद आप हरिद्वार की बेहद प्राचीन नगरी कनखल की तरफ जा सकते हैं। इस क्षेत्र में प्रसिद्ध दक्षेश्वर महादेव मंदिर स्थित है, जिसे पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव की ससुराल माना जाता है। इस पवित्र स्थान का इतिहास माता सती और राजा दक्ष प्रजापति द्वारा किए गए उस प्रसिद्ध यज्ञ की पौराणिक कथा से जुड़ा हुआ है। मंदिर में मत् टेकने के साथ ही श्रद्धालु इस ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल के गहरे महत्व को भी भली-भांति जान सकते हैं।

भारत माता मंदिर की अनूठी वास्तुकला

दोपहर तक इन महत्वपूर्ण स्थलों के दर्शन पूरे करने के बाद आप उत्तरी हरिद्वार की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। यहां आठ मंजिला भव्य भारत माता मंदिर स्थित है, जो देशप्रेम और भारतीय संस्कृति की अनूठी मिसाल पेश करता है। इस मंदिर की अलग-अलग मंजिलों पर देश के महान स्वतंत्रता सेनानियों, महापुरुषों और हमारी समृद्ध धार्मिक परंपराओं से जुड़ी सुंदर झलकियां देखने को मिलती हैं, जो हर आगंतुक के मन में देशभक्ति का भाव जगाती हैं।

सप्त ऋषि आश्रम में बिताएं शांति के पल

अपनी इस एक दिवसीय धार्मिक यात्रा के अंतिम चरण में आप सप्त ऋषि आश्रम जा सकते हैं। यह शांत स्थान मां गंगा की सात अलग-अलग धाराओं और प्राचीन काल में सप्त ऋषियों द्वारा की गई तपस्या से जुड़ा हुआ माना जाता है। यहां का वातावरण बेहद शांत और मनमोहक है, जिसके चलते यात्री यहां कुछ पल सुकून और शांति के साथ बिता सकते हैं। इस प्रकार आप एक दिन के छोटे से अंतराल में हर की पौड़ी, मां मनसा देवी, मां चंडी देवी, दक्षेश्वर महादेव, भारत माता मंदिर और सप्त ऋषि आश्रम जैसे छह प्रमुख स्थलों को अपनी सूची में शामिल कर सकते हैं। इससे आपकी हरिद्वार यात्रा केवल गंगा स्नान और खरीदारी तक सीमित न रहकर, शहर के पूरे धार्मिक, पौराणिक और सांस्कृतिक स्वरूप को करीब से समझने का एक बेहतरीन अवसर बन जाती है।

सवाल-जवाब

हरिद्वार में एक दिन की यात्रा की शुरुआत कहाँ से करनी चाहिए?
अपनी एक दिन की यात्रा की शुरुआत ब्रह्मकुंड हर की पौड़ी में गंगा स्नान और आसपास के बाजारों से की जा सकती है।
मनसा देवी और चंडी देवी मंदिर जाने के लिए कौन से साधन उपलब्ध हैं?
इन दोनों मंदिरों तक पहुँचने के लिए पैदल रास्ते के साथ-साथ रोपवे की सुविधा भी उपलब्ध है।
दक्षेश्वर महादेव मंदिर किस पौराणिक कथा से जुड़ा है?
यह मंदिर माता सती और राजा दक्ष प्रजापति के यज्ञ की पौराणिक कथा तथा भगवान शिव की ससुराल से जुड़ा माना जाता है।
भारत माता मंदिर की क्या विशेषता है?
यह आठ मंजिला मंदिर देशभक्ति और भारतीय संस्कृति को समर्पित है, जिसकी विभिन्न मंजिलों पर महापुरुषों और परंपराओं की झलकियाँ मिलती हैं।
सप्त ऋषि आश्रम का धार्मिक महत्व क्या है?
यह स्थान गंगा की सात धाराओं और सप्त ऋषियों की तपस्या से जुड़ा हुआ है जहाँ शांत वातावरण मिलता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp