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मानसून में भीड़ से दूर सुकून चाहिए तो घूम आएं भारत के ये 6 कम जाने-पहचाने झरनेयात्रा
3 घंटे पहले· 3

मानसून में भीड़ से दूर सुकून चाहिए तो घूम आएं भारत के ये 6 कम जाने-पहचाने झरने

मानसून के मौसम में भीड़भाड़ से दूर सुकून की तलाश करने वालों के लिए कर्नाटक, मेघालय, तेलंगाना, झारखंड और अरुणाचल प्रदेश के ये 6 कम मशहूर झरने बेहतरीन ठिकाने साबित हो सकते हैं.

काव्या नायरकाव्या नायरट्रैवल एडिटर 3 मिनट पढ़ें AI के लिए
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मानसून दस्तक देते ही देश के जंगल, पहाड़ और घाटियां हरियाली की चादर ओढ़ लेते हैं और महीनों से सूखे पड़े झरने अचानक पूरे उफान पर बहने लगते हैं. जो लोग भीड़भाड़ वाले पर्यटन स्थलों से बचना चाहते हैं और प्रकृति के बीच सुकून के कुछ पल बिताना चाहते हैं, उनके लिए देश के कुछ कम मशहूर झरने बेहतरीन ठिकाना बन सकते हैं. ये जगहें अपनी नैसर्गिक खूबसूरती के लिए जानी जाती हैं और बारिश के मौसम में इनका आकर्षण कई गुना बढ़ जाता है. आइए जानते हैं भारत के ऐसे 6 ऑफबीट झरनों के बारे में, जहां मानसून में घूमना वाकई एक यादगार अनुभव बन सकता है.

हेब्बे फॉल्स, कर्नाटक

कर्नाटक के चिकमगलूर जिले के घने जंगलों के बीचोंबीच बसा हेब्बे फॉल्स मानसून में देखने लायक नज़ारा पेश करता है. यह झरना करीब 550 फीट की ऊंचाई से नीचे गिरता है, जिसकी गिनती ट्रेकिंग पसंद करने वालों और प्रकृति प्रेमियों के बीच सबसे लोकप्रिय ठिकानों में होती है. घने पेड़ों और पहाड़ी रास्तों से होकर यहां तक पहुंचने का सफर भी अपने आप में एक रोमांचक अनुभव माना जाता है.

नोहकलिकई फॉल्स, मेघालय

मेघालय के चेरापूंजी क्षेत्र में स्थित नोहकलिकई फॉल्स को भारत के सबसे ऊंचे प्लंज वॉटरफॉल यानी सीधे नीचे गिरने वाले झरनों में गिना जाता है. बारिश के दिनों में यहां पानी पूरे वेग और ताकत के साथ नीचे गिरता है, जबकि आसपास मंडराते बादल इस पूरे नज़ारे की खूबसूरती को कई गुना बढ़ा देते हैं. यही वजह है कि यह जगह मानसून में प्रकृति प्रेमियों के बीच खास आकर्षण का केंद्र बन जाती है.

कुंचिकल फॉल्स, कर्नाटक

पश्चिमी घाट में मौजूद कुंचिकल फॉल्स को देश के सबसे ऊंचे झरनों में शुमार किया जाता है. मानसून के दौरान यहां का दृश्य इतना मंत्रमुग्ध कर देने वाला होता है कि यह जगह फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए किसी खजाने से कम नहीं मानी जाती. पानी की तेज धार और चारों तरफ फैली हरियाली मिलकर एक ऐसा नज़ारा बनाते हैं, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से यात्री पहुंचते हैं.

बोगथा वॉटरफॉल, तेलंगाना

तेलंगाना में स्थित बोगथा वॉटरफॉल उन जगहों में शामिल है जहां पर्यटकों की भीड़ अपेक्षाकृत कम देखने को मिलती है. घने जंगलों और पथरीले रास्तों के बीच से बहने वाला यह झरना मानसून के मौसम में अपने पूरे शबाब पर नजर आता है. शांत माहौल और प्राकृतिक सुंदरता की तलाश करने वालों के लिए यह जगह किसी छिपे हुए खजाने जैसी है.

जोन्हा फॉल्स, झारखंड

झारखंड की राजधानी रांची के करीब स्थित जोन्हा फॉल्स अपनी प्राकृतिक खूबसूरती और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है. बारिश के मौसम में पानी की धार तेज हो जाती है, जिससे इस जगह का आकर्षण और भी बढ़ जाता है. यहां का ठंडा और शांत माहौल शहर की भागदौड़ से थके लोगों को सुकून देने का काम करता है.

थुसिगम वॉटरफॉल, अरुणाचल प्रदेश

अरुणाचल प्रदेश का यह झरना ज्यादा प्रचलित नहीं है, फिर भी घनी हरियाली और पहाड़ों से घिरा इसका इलाका बेहद खूबसूरत नजर आता है. मानसून में यहां का शांत माहौल और ताजी हवा प्रकृति प्रेमियों को बिल्कुल अलग तरह का अनुभव देती है, जो आम टूरिस्ट जगहों पर मिलना मुश्किल होता है.

क्यों बनाएं इन झरनों को अपनी मानसून ट्रिप का हिस्सा

अगर इस बारिश के मौसम में भीड़भाड़ से दूर किसी शांत और खूबसूरत ठिकाने की तलाश है, तो ये 6 कम मशहूर झरने बेहतरीन विकल्प साबित हो सकते हैं. हरे-भरे जंगल, गिरता हुआ पानी और बादलों में लिपटी घाटियां किसी भी यात्रा को यादगार बना देती हैं. प्रकृति की गोद में सुकून के पल बिताने और यादगार तस्वीरें खींचने के इच्छुक लोगों को इन जगहों को अपनी मानसून ट्रिप की लिस्ट में जरूर शामिल करना चाहिए.

इसका आप पर असर

यह जानकारी खासतौर पर उन लोगों के लिए काम की है जो इस मानसून में भीड़भाड़ वाले पर्यटन स्थलों की बजाय शांत और कम भीड़ वाली जगहों पर घूमने की योजना बना रहे हैं.

  • घूमने वालों के लिए: कर्नाटक, मेघालय, तेलंगाना, झारखंड और अरुणाचल प्रदेश के ये झरने मानसून ट्रिप प्लान करते समय नए विकल्प के तौर पर चुने जा सकते हैं.
  • फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए: कुंचिकल फॉल्स और नोहकलिकई फॉल्स जैसी जगहें मानसून में शानदार तस्वीरें लेने का मौका देती हैं.

सवाल-जवाब

हेब्बे फॉल्स की ऊंचाई कितनी है और यह कहां स्थित है?
हेब्बे फॉल्स करीब 550 फीट की ऊंचाई से गिरता है और कर्नाटक के चिकमगलूर जिले के घने जंगलों के बीच स्थित है.
नोहकलिकई फॉल्स किस राज्य में है?
यह मेघालय के चेरापूंजी क्षेत्र में स्थित है और भारत के सबसे ऊंचे प्लंज वॉटरफॉल में गिना जाता है.
कुंचिकल फॉल्स की क्या खासियत है?
कर्नाटक के पश्चिमी घाट में स्थित यह झरना देश के सबसे ऊंचे झरनों में शुमार है और फोटोग्राफी के शौकीनों के बीच लोकप्रिय है.
बोगथा वॉटरफॉल किस राज्य में स्थित है?
बोगथा वॉटरफॉल तेलंगाना में स्थित है और यहां पर्यटकों की भीड़ अपेक्षाकृत कम रहती है.
जोन्हा फॉल्स किस शहर के पास है?
जोन्हा फॉल्स झारखंड की राजधानी रांची के करीब स्थित है.
थुसिगम वॉटरफॉल कहां स्थित है?
यह अरुणाचल प्रदेश में स्थित एक कम प्रचलित झरना है, जो घनी हरियाली और पहाड़ों से घिरा हुआ है.
काव्या नायर
लेखक के बारे मेंकाव्या नायरट्रैवल एडिटर देहरादून
विशेषज्ञताट्रैवल लेखन, पर्यटन, डेस्टिनेशन गाइड, संस्कृति, लाइफस्टाइल ट्रैवल, होटल, एडवेंचर ट्रैवल, फूड एवं ट्रैवल, वैश्विक पर्यटन रुझान

काव्या नायर एक ट्रैवल लेखिका हैं जो पर्यटन स्थलों, ट्रैवल गाइड, पर्यटन रुझानों, संस्कृति और लाइफस्टाइल अनुभवों को कवर करती हैं। वे दुनियाभर के यात्रियों के लिए दिलचस्प कहानियाँ और व्यावहारिक जानकारी साझा करती हैं।

काव्या नायर एक ट्रैवल लेखिका हैं जो पर्यटन स्थलों की कवरेज, ट्रैवल फ़ीचर, सांस्कृतिक खोज और ट्रैवल लाइफस्टाइल पत्रकारिता में विशेषज्ञता रखती हैं। वे लोकप्रिय व उभरते पर्यटन स्थलों, ट्रैवल गाइड, होटल व आतिथ्य अनुभवों, स्थानीय संस्कृतियों, खानपान परंपराओं और एडवेंचर टूरिज़्म के बारे में लिखती हैं। प्रेरक और जानकारीपूर्ण कहानी कहने पर ज़ोर देते हुए काव्या पाठकों को नई जगहें खोजने और सार्थक यात्रा अनुभव योजना बनाने में मदद करती हैं। उनका काम वैश्विक पर्यटन रुझानों, बजट व लक्ज़री ट्रैवल की अंतर्दृष्टि और पाठकों को दुनियाभर की जगहों से जोड़ने वाली सांस्कृतिक कहानियों को उजागर करता है।

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