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मॉनसून लौटते ही गुलज़ार हुआ राजस्थान का गोरम घाट, बादलों और झरनों के बीच उमड़ी सैलानियों की भीड़यात्रा
16 जून 2026, 1:22 pm (43 दिन पहले)· 2

मॉनसून लौटते ही गुलज़ार हुआ राजस्थान का गोरम घाट, बादलों और झरनों के बीच उमड़ी सैलानियों की भीड़

राजस्थान के 'मिनी कश्मीर' गोरम घाट के गेट पर्यटकों के लिए फिर खुल गए हैं। बादल, झरने और हरियाली के बीच यहां सैलानियों की इतनी भीड़ है कि एंट्री गेट पर गाड़ियों का जाम तक लग रहा है।

बारिश का मौसम सिर पर आते ही राजस्थान के अरावली इलाके में बसा गोरम घाट एक बार फिर पर्यटकों से गुलज़ार हो उठा है। 'मिनी कश्मीर' के नाम से मशहूर इस जगह के गेट सैलानियों के लिए खोल दिए गए हैं। आसमान में बादलों का डेरा और सुहाने मौसम ने यहां की कुदरत को ऐसा रूप दे दिया है कि देखने वालों की आंखें ठहर जाती हैं। हालत यह है कि गोरम घाट के अंदर जाने वाले एंट्री गेट पर गाड़ियों का जाम तक लग रहा है, क्योंकि बरसात के दिनों में यह इलाका किसी जन्नत से कम नहीं लगता।

अंग्रेज़ों के दौर की इंजीनियरिंग आज भी हैरान करती है

इस जगह की पहचान सिर्फ कुदरती खूबसूरती तक सीमित नहीं है। करीब 1930 के आसपास अंग्रेज़ों के शासनकाल में मारवाड़ और मेवाड़ को आपस में जोड़ने के लिए इस मुश्किल पहाड़ी इलाके में रेलवे लाइन बिछाई गई थी। उस ज़माने की इंजीनियरिंग का यह नमूना आज भी लोगों को अचंभित करता है। यहां बने ऊंचे रेलवे पुल, सुरंगें और घुमावदार पटरियां इस रास्ते को बेहद रोमांचक बना देती हैं। जब ट्रेन इन पुलों से गुज़रती है तो चारों ओर फैली हरियाली और गहरी घाटियों का नज़ारा यात्रियों को मंत्रमुग्ध कर देता है।

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मॉनसून में दोगुना हो जाता है रोमांच

बरसात के मौसम में गोरम घाट का रूप और भी निखर जाता है। हर तरफ फैली हरियाली, पहाड़ियों से गिरते झरने और बादलों से घिरी घाटियां मिलकर एक ऐसा दृश्य रचती हैं जो किसी स्वर्ग जैसा महसूस होता है। यही वजह है कि हर साल बड़ी तादाद में लोग यहां कुदरत का लुत्फ़ उठाने और फोटोग्राफी करने पहुंचते हैं। चारों ओर फैले घने जंगल, ऊंची पहाड़ियां और प्राकृतिक झरने इस जगह को और भी खास बना देते हैं। यहां की शांति और ताज़गी भरा माहौल शहर की भागदौड़ से दूर मन को सुकून का अहसास कराता है।

एडवेंचर और फोटोग्राफी के शौकीनों की पसंदीदा जगह

अरावली की पहाड़ियों में बसा गोरम घाट प्रकृति प्रेमियों और एडवेंचर के दीवानों के लिए किसी जन्नत से कम नहीं है। यहां का सबसे बड़ा आकर्षण ऐतिहासिक रेलवे ट्रैक और शानदार पुल हैं, जो बीते दौर की इंजीनियरिंग की बेमिसाल झलक पेश करते हैं। घने जंगलों और पहाड़ों के बीच से गुज़रती कई प्राकृतिक सुरंगें इस सफर के रोमांच को दोगुना कर देती हैं। अगर आप रोमांच के शौकीन हैं तो यहां ट्रैकिंग और एडवेंचर के बेहतरीन मौके आपका इंतज़ार कर रहे हैं। चारों ओर फैली हरी-भरी वादियां और दिलकश नज़ारे इसे फोटोग्राफी के लिए एकदम मुफीद बनाते हैं। यहां बहती ठंडी हवा और शांत माहौल दिल और दिमाग को बेहद सुकून देता है, जिससे शहरी ज़िंदगी की सारी थकान पल भर में काफूर हो जाती है।

गोरम घाट कैसे पहुंचें

अगर आप यहां जाने का रूट जानना चाहते हैं तो सड़क के रास्ते यह जगह पाली से करीब 74 किलोमीटर और उदयपुर से करीब 90 किलोमीटर की दूरी पर है। रेल के रास्ते आने वालों के लिए सबसे नज़दीकी रेलवे स्टेशन गोरम घाट ही है, और मारवाड़ जंक्शन से सीधे गोरम घाट तक ट्रेन पहुंचती है। वहीं हवाई सफर पसंद करने वालों के लिए यहां का सबसे नज़दीकी हवाई अड्डा महाराणा प्रताप एयरपोर्ट है।

सवाल-जवाब

गोरम घाट को 'मिनी कश्मीर' क्यों कहा जाता है?
मॉनसून में यहां की हरियाली, पहाड़ियों से गिरते झरने और बादलों से घिरी घाटियों का नज़ारा कश्मीर जैसा लगता है, इसीलिए इसे राजस्थान का मिनी कश्मीर कहा जाता है।
गोरम घाट की रेलवे लाइन कब बनी थी?
करीब 1930 के आसपास अंग्रेज़ों के शासनकाल में मारवाड़ और मेवाड़ को जोड़ने के लिए इस पहाड़ी इलाके में रेलवे लाइन बनाई गई थी।
गोरम घाट सड़क मार्ग से कितनी दूर है?
यह पाली से करीब 74 किलोमीटर और उदयपुर से करीब 90 किलोमीटर की दूरी पर है।
गोरम घाट का सबसे नज़दीकी रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डा कौन सा है?
सबसे नज़दीकी रेलवे स्टेशन गोरम घाट है और मारवाड़ जंक्शन से सीधी ट्रेन आती है, जबकि सबसे नज़दीकी हवाई अड्डा महाराणा प्रताप एयरपोर्ट है।
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