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नैनीताल का हाई ऑल्टिट्यूड जू: रेड पांडा से लेकर सफेद मोर तक, 2,100 मीटर की ऊंचाई पर बसे इस चिड़ियाघर की पूरी सैरयात्रा
18 जून 2026, 2:49 am (133 दिन पहले)· 1

नैनीताल का हाई ऑल्टिट्यूड जू: रेड पांडा से लेकर सफेद मोर तक, 2,100 मीटर की ऊंचाई पर बसे इस चिड़ियाघर की पूरी सैर

समुद्र तल से करीब 2,100 मीटर ऊपर बसे नैनीताल के गोविंद बल्लभ पंत हाई ऑल्टिट्यूड जू में रेड पांडा, बंगाल टाइगर, मारखोर और सफेद मोर जैसे दुर्लभ हिमालयी जीवों को देखा जा सकता है। टिकट 150 रुपये प्रति व्यक्ति है और गुरुवार को यह बंद रहता है।

अगर आप नैनीताल की यात्रा की योजना बना रहे हैं और कुछ ऐसा देखना चाहते हैं जो आम पहाड़ी घूमने से अलग हो, तो यहां का गोविंद बल्लभ पंत हाई ऑल्टिट्यूड जू आपकी सूची में जरूर होना चाहिए। उत्तराखंड के इस चिड़ियाघर की सबसे खास बात इसकी ऊंचाई है। यह समुद्र तल से करीब 2,100 मीटर ऊपर बसा हुआ है, और देश के उन गिने चुने ऊंचाई वाले चिड़ियाघरों में गिना जाता है जहां हिमालय के वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक माहौल के बेहद करीब रखा जाता है। यही कारण है कि हर साल हजारों सैलानी यहां दुर्लभ जानवरों को करीब से देखने पहुंचते हैं।

रेड पांडा: यहां की सबसे बड़ी पहचान

इस जू का सबसे चर्चित चेहरा है इसका रेड पांडा। मासूम चेहरे और फुर्तीली हरकतों की वजह से यह जीव बच्चों और बड़ों, दोनों का दिल जीत लेता है, और यही पर्यटकों के आकर्षण का सबसे बड़ा केंद्र भी है। चूंकि रेड पांडा स्वभाव से ठंडी जलवायु में रहने वाला जानवर है, इसलिए इसकी देखभाल पर खास ध्यान दिया जाता है। गर्मी के मौसम में इसके बाड़े में नियमित रूप से पानी का छिड़काव किया जाता है ताकि तापमान काबू में रहे और इस संवेदनशील जीव को गरमी से राहत मिलती रहे।

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बंगाल टाइगर और तेंदुआ: ताकत और फुर्ती का संगम

भारत का राष्ट्रीय पशु बंगाल टाइगर भी यहां पर्यटकों की भीड़ खींचने वाला प्रमुख जीव है। अपनी ताकत, फुर्ती और शिकार करने की क्षमता के लिए मशहूर इस बाघ की शानदार चाल और गूंजती दहाड़ को करीब से देखना सैलानियों के लिए रोमांच से भरा पल बन जाता है। यह प्रजाति वन्यजीव संरक्षण को लेकर लोगों में जागरूकता फैलाने में भी अहम भूमिका निभाती है।

तेज रफ्तार और पेड़ों पर चढ़ने की गजब की क्षमता रखने वाला तेंदुआ भी यहां मौजूद है। इसे प्राकृतिक माहौल जैसे बनाए गए बाड़ों में रखा गया है। बेहद चौकन्ना और कुशल शिकारी माने जाने वाले इस जीव को देखकर पर्यटकों को वन्यजीवन की अनोखी दुनिया को समझने का मौका मिलता है।

हिमालयी काला भालू और मारखोर

उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में पाई जाने वाली अहम प्रजातियों में हिमालयी काला भालू भी शामिल है। इसके सीने पर बना सफेद निशान इसकी सबसे खास पहचान है। यहां कुल दो भालू रखे गए हैं, और गर्मियों में सैलानी इन्हें अपने बाड़े में नहाते हुए देख सकते हैं।

घुमावदार और लंबे सींगों वाला मारखोर अपनी खूबसूरत बनावट के लिए जाना जाता है। पहाड़ी इलाकों में मिलने वाला यह दुर्लभ जीव कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भी आसानी से जिंदगी गुजार लेता है। एक दिलचस्प बात यह भी है कि मारखोर पाकिस्तान का राष्ट्रीय जीव है। वन्यजीव प्रेमियों और खासकर बच्चों के बीच यह हमेशा आकर्षण का केंद्र बना रहता है।

सफेद मोर: कैमरों में कैद होने वाली शान

यहां का सफेद मोर सैलानियों के बीच एक अलग ही दीवानगी पैदा करता है। अपने शानदार पंखों और अनोखे सौंदर्य की वजह से यह हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लेता है, और इसकी तस्वीर कैमरे में कैद करने के लिए मानो होड़ सी लग जाती है। जू में आप ऐसे दो सफेद मोर देख सकते हैं।

घुरल, बार्किंग डियर और प्रकृति की विविधता

हिमालयी इलाकों में पाए जाने वाले घुरल और बार्किंग डियर भी इस जू की खास पहचान हैं। गोट फैमिली से जुड़े ये जानवर पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र का अहम हिस्सा माने जाते हैं और सैलानियों को खूब भाते हैं। इन्हें करीब से देखकर पर्यटक प्रकृति की विविधता को बेहतर समझ पाते हैं। वैसे पहाड़ों में घूमते वक्त इन जानवरों को जंगलों में दौड़ते देखना भी आम बात है।

घूमने से पहले जान लें ये जरूरी बातें

नैनीताल की हरी भरी वादियों के बीच बसा यह जू सिर्फ जानवरों को देखने की जगह नहीं है। यहां की शांत वादियां और साफ सुथरा वातावरण सैलानियों को शहर की भागदौड़ से दूर सुकून का एहसास कराते हैं। असल में यह चिड़ियाघर मनोरंजन के साथ साथ वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाने का एक अहम जरिया भी है। अगर आप नैनीताल जा रहे हैं तो यहां घूमना न भूलें, यह आपकी यात्रा को यादगार बना देगा। ध्यान रहे, इस जू का टिकट 150 रुपये प्रति व्यक्ति है और यह हर हफ्ते गुरुवार के दिन बंद रहता है।

सवाल-जवाब

नैनीताल का यह चिड़ियाघर कितनी ऊंचाई पर है?
गोविंद बल्लभ पंत हाई ऑल्टिट्यूड जू समुद्र तल से करीब 2,100 मीटर की ऊंचाई पर बसा है।
जू का टिकट कितने का है?
इस जू का टिकट 150 रुपये प्रति व्यक्ति है।
जू किस दिन बंद रहता है?
यह चिड़ियाघर हर हफ्ते गुरुवार के दिन बंद रहता है।
यहां कौन से खास जानवर देखे जा सकते हैं?
यहां रेड पांडा, बंगाल टाइगर, तेंदुआ, हिमालयी काला भालू, मारखोर, सफेद मोर, घुरल और बार्किंग डियर देखे जा सकते हैं।
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