स्मार्टफोन बाजार में पेश किए गए ऐपल के पहले फोल्डेबल हैंडसेट iPhone Duo को लेकर शुरुआती खरीदारों की मुश्किलें अचानक बढ़ गई हैं। इस अल्ट्रा-प्रीमियम डिवाइस को अनबॉक्स करने और इस्तेमाल शुरू करने के कुछ घंटों अथवा चंद दिनों के भीतर ही कई उपयोगकर्ताओं को मुख्य स्क्रीन पर गंभीर दरारें दिखाई देने लगी हैं। तकनीकी दिग्गज ऐपल ने भी अब आधिकारिक तौर पर इस खराबी की मौजूदगी को स्वीकार कर लिया है और दिक्कतों से जूझ रहे ग्राहकों को अपनी सर्विस टीम से संपर्क कर नया हैंडसेट लेने का परामर्श दिया है।
फोल्ड होने वाले हिस्से और डिस्प्ले के पैटर्न में दिख रहा नुकसान
उपयोगकर्ताओं द्वारा साझा की गई जानकारियों के मुताबिक, नुकसान मुख्य रूप से डिवाइस की भीतरी मुड़ने वाली स्क्रीन पर केंद्रित है। फोल्डिंग हिंज वाले हिस्से के ठीक ऊपर एक स्पष्ट वर्टिकल रेखा उभरती दिखाई दे रही है। इसके साथ ही, स्क्रीन के दाईं तरफ से कुछ हॉरिजॉन्टल रेखाएं भी खिंचती नजर आ रही हैं, जो डिस्प्ले के मध्य भाग से नीचे की ओर एक निश्चित बिंदु पर आकर आपस में जुड़ जाती हैं। डिवाइस की शुरुआती समीक्षाओं में विश्लेषकों ने बड़े बुक-स्टाइल डिस्प्ले के अनुकूल पर्याप्त ऐप्स न होने पर सवाल उठाए थे, मगर स्क्रीन पर आ रही ये भौतिक दरारें अब सॉफ्टवेयर की कमियों से कहीं आगे बढ़कर एक बड़े हार्डवेयर संकट के रूप में तब्दील हो गई हैं।
जांच के बाद आधिकारिक तौर पर आई कंपनी की प्रतिक्रिया
ब्लूमबर्ग के पत्रकार मार्क गुरमन ने पूर्व में इस बात की जानकारी दी थी कि ऐपल के इंजीनियर इस रहस्यमयी टूट-फूट की जांच में जुटे हैं। उस शुरुआती दौर में ऐपल ने अपने आधिकारिक रिटेल स्टोर्स या ग्राहक सेवा प्रतिनिधियों को इससे निपटने के लिए कोई ठोस निर्देश जारी नहीं किए थे। अब कंपनी ने चुप्पी तोड़ते हुए माना है कि आईफोन डुओ के कुछ हैंडसेट्स की आंतरिक डिस्प्ले इस खराबी से प्रभावित हुई है। कंपनी ने ग्राहकों से अपील की है कि जिन लोगों के डिस्प्ले में इस प्रकार की लकीरें या दरारें बन रही हैं, वे तुरंत AppleCare के पास जाएं और रिप्लेसमेंट की प्रक्रिया शुरू कराएं। हालांकि ऐपल ने अभी तक इस खराबी के मूल कारण को सार्वजनिक नहीं किया है और न ही यह स्पष्ट किया है कि कुल कितने प्रतिशत या कितनी संख्या में हैंडसेट इस फॉल्ट की चपेट में आए हैं।
बिना वारंटी सुरक्षा के रिपेयरिंग पर भारी भरकम खर्च
डिस्प्ले रिप्लेसमेंट का यह निर्देश खरीदारों के लिए इसलिए भी बड़ी राहत माना जा रहा है क्योंकि इस मॉडल की स्क्रीन को ठीक कराने की लागत बेहद भारी है। अगर किसी ग्राहक के पास एक्टिव AppleCare+ कवरेज मौजूद नहीं है, तो भारत में केवल आंतरिक डिस्प्ले बदलवाने का खर्च लगभग ₹1.5 लाख तक बैठता है। अमेरिकी बाजार में इसी मरम्मत के लिए $999 वसूले जा रहे हैं। इसका सीधा अर्थ यह है कि बिना सुरक्षा प्लान के केवल स्क्रीन ठीक कराने पर ही फोन की पूरी रिटेल कीमत का करीब आधा हिस्सा खर्च करना पड़ सकता है। इसलिए कंपनी द्वारा सीधे रिप्लेसमेंट का रास्ता खोलना प्रभावित ग्राहकों के लिए बड़ी वित्तीय राहत साबित हो सकता है।
हिंज और स्क्रीन के संपर्क दबाव पर विशेषज्ञों का संदेह
तकनीकी गैजेट्स के पुर्जों को अलग कर उनकी मरम्मत का विश्लेषण करने वाली स्वतंत्र फर्म iFixit ने इस बात का तकनीकी परीक्षण किया है कि आखिर स्क्रीन इतनी जल्दी क्यों टूट रही है। संस्था के अनुसार, यह पूरी समस्या फोन के हिंज मैकेनिज्म और फोल्डिंग प्रक्रिया के तालमेल से जुड़ी हो सकती है। विशेषज्ञ आकलन के मुताबिक, जब स्क्रीन को मोड़ा जाता है, तो डिस्प्ले का लचीला हिस्सा अंदरूनी सपोर्ट बार के संपर्क में आता है। इस प्रक्रिया में एक अत्यंत संकीर्ण हिस्से पर अत्यधिक दबाव केंद्रित हो सकता है। निरंतर मुड़ने और दबाव के इसी असंतुलन की वजह से स्क्रीन के उस खास बिंदु पर दरारें विकसित होने का जोखिम बढ़ जाता है। हालांकि यह केवल तकनीकी जानकारों की आशंका है और ऐपल की तरफ से आधिकारिक पुष्टि आना अभी बाकी है। कंपनी ने उपयोगकर्ताओं को आगाह किया है कि स्क्रीन पर कोई भी लकीर दिखने पर वे बिना देर किए सीधे AppleCare के पास पहुंचे।



















