अक्सर लोग किसी एक पर्यटन स्थल पर छुट्टी बिताने के लिए दसियों हजार रुपये की योजना बनाते हैं, लेकिन एक महिला मुसाफिर ने इतनी ही तय राशि में समूचे देश की सैर करने का बीड़ा उठाया है। उन्होंने खुद को एक बेहद सख्त आर्थिक चुनौती दी है, जिसके तहत वह महज 10,000 रुपये की कुल जमापूंजी के सहारे पूरे भारत की एकल यात्रा पर निकल पड़ी हैं। इस साहसिक मुहिम की सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि वह अब तक 6 राज्यों की सीमाएं नाप चुकी हैं और इस पूरे फासले को तय करने में उनकी जेब से सिर्फ 2,000 रुपये निकले हैं। बाकी बचे 8,000 रुपये के साथ देश के अन्य हिस्सों की राह पकड़ना उनके लिए किसी कठिन इम्तिहान से कम नहीं रहने वाला है।
सीमित संसाधनों में सोलो यात्रा का रोमांचक संकल्प
इस रोमांचक मुहिम को अंजाम दे रही यात्री अपनी इस पूरी यात्रा का दस्तावेजीकरण खुद कर रही हैं। वह रास्ते में मिलने वाले अनुभवों, पड़ावों और मुश्किलों के दृश्य सोशल मीडिया पर साझा करती जा रही हैं। उन्होंने इंस्टाग्राम हैंडल @flyyingxfishh के जरिए अपनी यात्रा की क्लिप साझा कर लोगों को बताया कि किस तरह उन्होंने आम धारणा के विपरीत जाकर यह साहसिक कदम उठाया है। उनका मानना है कि जहां एक औसत पर्यटक किसी एक शहर या रिसॉर्ट में 10,000 रुपये पलक झपकते खर्च कर देता है, वहीं उनका लक्ष्य इसी राशि में पूरब से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक का चक्कर लगाने का है।
अपनी इस अनोखी योजना के बारे में बात करते हुए उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि बहुत से लोग इसे महज एक मजाक समझ सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई हंसी-मजाक नहीं, बल्कि एक वास्तविक चुनौती है जिसे उन्होंने खुद स्वीकार किया है। महज दो हजार रुपये में छह राज्यों का फासला तय कर लेने के बावजूद वह अपनी प्राथमिकताओं को लेकर बेहद सतर्क हैं, क्योंकि आगे की राह में भौगोलिक विविधताएं, परिवहन के साधन और ठहराव की व्यवस्थाएं उनकी वित्तीय सीमाओं की कड़ी परीक्षा लेने वाली हैं।
बजट की सीमा तय करेगी सफर का दायरा
सफर के शुरुआती चरण में बेहद कम खर्च होना भले ही उत्साहजनक लगे, लेकिन देश का बड़ा भूभाग अभी उनके सामने पड़ा है। यात्रा के आगामी पड़ावों को लेकर मुसाफिर खुद भी पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं कि यह रकम उन्हें अंतिम छोर तक पहुंचा पाएगी या नहीं। उन्होंने अपने वीडियो संदेश में साफ तौर पर कहा कि जैसे ही यह बजट समाप्त होगा, उनकी यह यात्रा चुनौती भी वहीं रुक जाएगी। उनका कहना है कि आने वाले दिनों में हर एक रुपये का हिसाब रखना और रास्ते में टिके रहना ही इस यात्रा की सबसे बड़ी परीक्षा है।
देश के सुदूर कोनों, पहाड़ी इलाकों और अलग-अलग खान-पान व संस्कृति के बीच इतने कम पैसों में गुजारा करना शारीरिक और मानसिक दोनों स्तरों पर काफी मशक्कत मांगता है। अपने वीडियो के साथ लिखे संदेश में भी उन्होंने माना कि दस हजार रुपये से कम में भारत की सैर करने का यह प्रयास बेहद श्रमसाध्य है। उन्होंने लोगों से इस सफर का गवाह बनने का आग्रह किया ताकि वे देख सकें कि यह सीमित पूंजी उन्हें कहां तक ले जाती है और क्या वह अंतिम मंजिल तक डटी रह पाती हैं या रास्ते में ही बजट खत्म होने पर रुकना पड़ता है।



















