पलामू टाइगर रिजर्व के बेतला इलाके में जंगल सफारी के सफर को पर्यटकों के लिए और अधिक आकर्षक तथा रोमांचक बनाने के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। पारंपरिक तौर पर जहां पहले सिर्फ बाइसन गेट से ही चार पहिया वाहनों के जरिए जंगल का दीदार कराया जाता था, वहीं अब पर्यटकों को ओपन सफारी गाड़ियों में घुमाने की खास व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही प्रबंधन ने एक नया सफारी सर्किट भी पूरी तरह तैयार कर लिया है, जिसके माध्यम से सैलानी पलामू किला और कमलदह झील जैसी ऐतिहासिक और प्राकृतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण जगहों पर आसानी से पहुंच सकते हैं और वन्यजीवों को बिल्कुल नजदीक से देखने का अनूठा अनुभव प्राप्त कर सकते हैं।
नया 9 से 10 किलोमीटर लंबा सफारी सर्किट
पलामू टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर प्रजेश कांत जैना ने इस संबंध में जानकारी साझा करते हुए बताया कि बेतला के इस बिल्कुल नए सर्किट पर पर्यटकों को करीब 9 से 10 किलोमीटर की दूरी तय कराई जाती है। इस पूरी यात्रा को पूरा होने में लगभग एक से दो घंटे का समय लगता है। इस रूट पर सफर के दौरान पर्यटकों को नया किला, पुराना किला और कमलदह झील के आसपास के मनोरम दृश्यों को देखने का बेहतरीन अवसर मिलता है। इस तय मार्ग से ही पूरी सफारी संचालित होती है और यात्रा संपन्न होने के बाद वाहन बिल्कुल उसी रास्ते से वापस लौट आते हैं, जिससे पर्यटकों को जंगल की हरी-भरी वादियों और प्राकृतिक परिवेश को गहराई से समझने का पूरा मौका मिलता है।
हाथी, तेंदुए और बाइसन देखने की संभावना
पलामू टाइगर रिजर्व के बेतला क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के वन्यजीवों की मौजूदगी हमेशा से ही सैलानियों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र रही है। इस नए रूट और इसके आसपास के जंगलों में पर्यटकों को हाथी, बाइसन, तेंदुआ, हिरण, खरगोश और जंगली सुअर जैसे तमाम वन्यजीव नजर आ सकते हैं। हालांकि, वन विभाग और प्रबंधन पहले ही यह स्पष्ट कर चुका है कि जंगल में जानवरों की दृश्यता पूरी तरह से मौसम, समय और वन्यजीवों की अपनी प्राकृतिक गतिविधियों पर निर्भर करती है, इसलिए सफारी के दौरान किसी भी जानवर को देखने की कोई पक्की गारंटी नहीं दी जा सकती है।
पक्षी प्रेमियों के लिए बर्ड वाचिंग का शानदार ठिकाना
प्रजेश कांत जैना ने आगे बताया कि यह नया सर्किट केवल स्तनधारी वन्यजीवों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह पक्षी प्रेमियों के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं है। घने जंगल और जल स्रोतों के इर्द-गिर्द सैलानियों को जंगली ओरियोल, किंगफिशर और आइबिस जैसी खूबसूरत पक्षियों की कई प्रजातियों को अपनी आँखों से देखने का मौका मिल सकता है। खासकर कमलदह झील के आसपास का शांत और प्राकृतिक वातावरण उन पर्यटकों को अपनी ओर खींच रहा है जिनकी रुचि बर्ड वाचिंग और फोटोग्राफी में है।
इतने शुल्क में लें सफारी, गाइड और ड्राइवर की भूमिका अहम
इस नए और रोमांचक सर्किट पर जंगल सफारी का कुल शुल्क 1950 रुपये तय किया गया है। इस पूरी राशि में से 300 रुपये सीधे तौर पर गाइड को मेहनताना के रूप में दिए जाते हैं, जबकि बाकी बची हुई बड़ी रकम वाहन संचालन और ड्राइवरों के खर्चों में जाती है। इसके अलावा, इस व्यवस्था से मिलने वाला मेंटेनेंस शुल्क इको विकास समिति के खाते में जाता है। सफारी के पूरे सिस्टम को और अधिक पेशेवर बनाने के लिए ड्राइवरों और गाइडों को विशेष प्रशिक्षण देने की योजना पर भी काम चल रहा है। पर्यटकों के लिए सफारी का समय सुबह 6 बजे से लेकर शाम 6 बजे तक निर्धारित किया गया है, लेकिन किसी भी प्रकार की असुविधा से बचने के लिए यात्रा से पहले संबंधित सफारी प्रबंधन से बुकिंग और समय की पुष्टि अवश्य कर लेनी चाहिए।
इतिहास और प्राकृतिक सुंदरता का अनूठा संगम
बेतला के इस नए सफारी सर्किट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पर्यटकों को एक ही यात्रा में दो अलग-अलग अनुभव प्रदान करता है। एक तरफ जहां सैलानी जंगल के बीच रोमांच महसूस करते हैं, वहीं दूसरी तरफ वे पलामू किले की समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से भी रूबरू होते हैं। इसके साथ ही कमलदह झील की प्राकृतिक छटा प्रकृति प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर देती है। कुल मिलाकर यह नया सर्किट वन्यजीव प्रेमियों, इतिहास के जानकारों और प्रकृति की गोद में समय बिताने वालों के लिए एक बेहतरीन गंतव्य बनकर उभरा है।


















