14 अगस्त को पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान रिकॉर्ड किया गया एक वीडियो इन दिनों इंटरनेट पर जबरदस्त चर्चा का विषय बना हुआ है। इस वायरल वीडियो में पाकिस्तान की कई नामचीन और वरिष्ठ अभिनेत्रियां अपने देश का राष्ट्रीय ध्वज लहराते हुए जश्न मनाती दिखाई दे रही हैं। हालांकि, विवाद तब खड़ा हुआ जब लोगों का ध्यान पृष्ठभूमि में बज रहे संगीत पर गया। इस खास मौके पर पाकिस्तानी देशभक्ति गीतों के बजाय पृष्ठभूमि में बॉलीवुड फिल्म 'राज़ी' का मशहूर गाना 'ऐ वतन मेरे वतन' चल रहा था।
आलिया भट्ट के गाने और 'राज़ी' के बैकड्रॉप ने बढ़ाया विवाद
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वीडियो सामने आते ही लोगों ने गाने के चुनाव पर तीखी प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया। दरअसल, 2018 में आई फिल्म 'राज़ी' में मुख्य भूमिका आलिया भट्ट और विक्की कौशल ने निभाई थी। यह फिल्म भारतीय खुफिया तंत्र और देशभक्ति की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जिसके कारण पाकिस्तानी स्वतंत्रता दिवस पर इस गाने का इस्तेमाल कई लोगों को अटपटा और विरोधाभासी लगा। देखते ही देखते इस वीडियो को लेकर पाकिस्तानी अभिनेत्रियों की ट्रॉलिंग शुरू हो गई और यूजर इंटरनेट पर उनके फैसले पर सवाल उठाने लगे।
पाकिस्तानी इन्फ्लुएंसर ने जताई गंभीर आपत्ति
मामले के तूल पकड़ने के बाद पाकिस्तानी कंटेंट क्रिएटर और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर डॉ एजाज वारिस ने एक वीडियो जारी कर कलाकारों के रवैये पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक हस्तियां होने के नाते इन कलाकारों को अपने कंटेंट और पसंद को लेकर अधिक सतर्क रहना चाहिए था। एजाज वारिस का कहना था कि इस तरह की लापरवाही की वजह से भारतीय सोशल मीडिया यूजर और व्लॉगर्स को उनका मजाक उड़ाने का मौका मिल रहा है।
उन्होंने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा, "यह फिल्म का गाना भारत की देशभक्ति से जुड़ा था और ऐसा करना बिल्कुल सही नहीं है। आप लोग इतने वरिष्ठ कलाकार हैं, आपको जिम्मेदारी का अहसास होना चाहिए।" उन्होंने आगे जोड़ते हुए कहा कि कई भारतीय व्लॉगर्स पहले ही इस वीडियो पर रील्स बनाकर चुटकी ले रहे हैं।
राष्ट्रीय गरिमा और कला की सीमाओं पर बंटा इंटरनेट
डॉ एजाज वारिस ने अपनी पोस्ट में विस्तार से लिखते हुए स्पष्ट किया कि उनका मकसद बॉलीवुड या भारतीय संगीत का विरोध करना नहीं है। उन्होंने लिखा कि सामान्य दिनों में संगीत का आनंद लेना अलग बात है, लेकिन स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय महत्व के अवसरों की अपनी गरिमा, संवेदनाएं और समर्पित देशभक्ति गीत होते हैं। ऐसे ऐतिहासिक दिन पर अपने ही देश के गीतों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए थी।
इस पूरे मामले ने इंटरनेट पर दो अलग-अलग धाराओं को जन्म दिया है। जहां एक तरफ कई यूजर इन्फ्लुएंसर के विचारों से पूरी तरह सहमत नजर आए और कलाकारों को जिम्मेदारी से व्यवहार करने की सलाह दी, वहीं दूसरी तरफ कुछ लोगों ने इस कदम का बचाव भी किया। बचाव करने वाले यूजर्स का तर्क था कि कला और संगीत को सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता। एक यूजर ने टिप्पणी करते हुए लिखा कि वतन से जुड़ा कोई भी भावुक गाना किसी भी देश के लिए प्रासंगिक हो सकता है, जबकि एक अन्य यूजर ने कमेंट किया कि कला और भावनाओं का कोई धर्म या देश नहीं होता।



















