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बिना मैदा और बिना डीप फ्राई किए बनाएं कुरकुरी कचौड़ी, पोहा और बेसन का यह नया तरीका देगा लाजवाब स्वादट्रेंड्स
31 अक्तू॰ 2026, 6:26 pm (2 दिन पहले)· 0

बिना मैदा और बिना डीप फ्राई किए बनाएं कुरकुरी कचौड़ी, पोहा और बेसन का यह नया तरीका देगा लाजवाब स्वाद

पारंपरिक तली हुई कचौड़ियों से अलग, पोहा और बेसन के मिश्रण से बनी यह कचौड़ी अप्पे पैन में बेहद कम तेल में तैयार हो जाती है। चटपटे आलू के भरावन और तीखी टमाटर-धनिया चटनी के साथ यह नाश्ता स्वाद और सेहत दोनों का ख्याल रखता है।

पारंपरिक तौर पर कचौड़ी का विचार आते ही मैदे की परत और तेल से भरी भारी कड़ाही का ख्याल दिमाग में तैरने लगता है। लेकिन जो लोग अधिक चिकनाई से बचते हुए कुछ नया चखना चाहते हैं, उनके लिए पोहा और बेसन का यह मेल एक शानदार विकल्प पेश करता है। इसमें न तो मैदे की जरूरत पड़ती है और न ही गेहूं के आटे की। बेहद कम तेल की मदद से इसे अप्पे पैन में तैयार किया जाता है, जिससे यह बाहर से पूरी तरह क्रिस्पी बनती है और भीतर से नर्म व जायकेदार रहती है।

मसालेदार और चटपटा आलू का भरावन बनाने का तरीका

स्वाद की असली जान इसके अंदर भरी जाने वाली स्टफिंग में होती है। भरावन तैयार करने के लिए सबसे पहले एक कड़ाही में एक चम्मच सरसों का तेल डालकर गरम करें। जब तेल से धुआं निकलने लगे, तब उसमें जीरा, कलौंजी, हींग तथा अदरक-लहसुन का पेस्ट डालकर धीमी आंच पर महक आने तक भूनें। इसके बाद बारीक कटी प्याज और कटी हुई हरी मिर्च डालकर हल्का पारदर्शी होने तक पकाएं।

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अब इस तड़के में हल्दी, धनिया पाउडर, लाल मिर्च पाउडर, गरम मसाला और चाट मसाला मिलाएं। स्वाद को और निखारने के लिए नियमित सादे नमक के साथ थोड़ा सा काला नमक भी शामिल करें। मसालों का कच्चापन खत्म होते ही उबले तथा मैश किए हुए आलू डालकर कलछी से अच्छी तरह मिला लें। आलुओं को मसालों के साथ कुछ मिनट तक भूनने के बाद गैस बंद कर दें। जब मिश्रण ठंडा होकर छूने लायक हो जाए, तो हथेलियों की मदद से इसकी छोटी-छोटी गोलियां बनाकर एक प्लेट में अलग रख लें।

पोहा और बेसन से ऐसे तैयार करें बाहरी परत

कचौड़ी का बाहरी आवरण बनाने के लिए दो कप पोहे को किसी साफ छलनी में रखें और नल के बहते पानी से अच्छी तरह धो लें। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि पोहे को पानी के बर्तन में देर तक डूबा न रहने दें, क्योंकि ज्यादा भीगने पर वह जरूरत से ज्यादा चिपचिपा हो जाएगा। धुले हुए पोहे को एक परात में निकालें और उसमें आधा कप बेसन व अपने स्वादानुसार नमक मिलाएं।

इस मिश्रण को गूंधते समय ऊपर से अतिरिक्त पानी डालने की कोई जरूरत नहीं पड़ती, क्योंकि धुले पोहे में मौजूद स्वाभाविक नमी ही इसे बांधने के लिए पर्याप्त होती है। अपने हाथों से दबाते हुए इसे एक सुगठित आटे की तरह गूंथ लें। यदि मिश्रण सख्त महसूस हो, तो पोहे की नमी के अनुसार उसे थोड़ा संभालें। अंत में हाथों पर थोड़ा तेल लगाकर इस लोई को ऊपर से चिकना कर लें ताकि बेलते या भरते समय यह फटे नहीं।

कचौड़ी को आकार देना और भरावन सुरक्षित करना

तैयार आटे से कचौड़ी बनाने से पहले हथेलियों पर थोड़ा सा तेल मल लें। अब पोहा-बेसन के आटे से नींबू के आकार का हिस्सा तोड़ें और उसे हथेली पर रखकर चपटा फैलाएं। इस गोल चपटे हिस्से के बिल्कुल मध्य में पहले से बनी एक आलू की गोली रख दें। अब चारों तरफ से किनारों को धीरे-धीरे ऊपर उठाते हुए बीच में लाकर पूरी तरह बंद कर दें।

इसके बाद हल्के हाथों से घुमाते हुए इसे गोल कचौड़ी की शक्ल दें। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि कचौड़ी को हथेलियों से बहुत अधिक न दबाएं, क्योंकि बहुत पतली करने से बाहरी परत फट सकती है और आलू का मसाला बाहर आ सकता है। इसी प्रक्रिया को दोहराते हुए सारी लोइयों से गोल कचौड़ियां बनाकर तैयार कर लें।

अप्पे पैन में धीमी आंच पर पकाने की प्रक्रिया

गहरी कड़ाही में तेल भरकर तलने के बजाय इसे पकाने के लिए अप्पे पैन का प्रयोग किया जाता है। गैस चूल्हे पर अप्पे पैन रखें और मध्यम आंच पर उसे गरम होने दें। पैन के प्रत्येक सांचे में कुछ बूंदें तेल की डालें और फिर बनाई गई कचौड़ियों को एक-एक करके सांचों में रख दें।

सिकाई के दौरान बीच-बीच में चम्मच या कांटे से कचौड़ियों को उलटते-पलटते रहें, ताकि वे सभी तरफ से एकसमान सुनहरी हो सकें। जब तक उनकी बाहरी सतह पूरी तरह कुरकुरी और सुनहरी न हो जाए, तब तक मध्यम आंच पर सिकाई जारी रखें। इस आसान विधि से बिना किसी गहरे तेल के तला हुआ अहसास और क्रिस्पी स्वाद हासिल हो जाता है।

साथ में परोसें तीखी हरी चटनी

इस हल्के नाश्ते के स्वाद को दोगुना करने के लिए एक तीखी चटनी बेहद मुफीद साबित होती है। मिक्सर के जार में आधा कप ताजा हरा धनिया, दो हरी मिर्च, एक कटा हुआ टमाटर, थोड़ा सा जीरा, लाल मिर्च पाउडर और स्वादानुसार नमक डालें। इस चटनी को पीसते समय पानी की एक बूंद भी न डालें, क्योंकि टमाटर का प्राकृतिक रस ही इसे बारीक पीसने के लिए काफी होता है।

तैयार हुई गरमा-गरम कचौड़ियों को इस ताजी चटनी के साथ चाय के वक्त या सप्ताहांत के नाश्ते में परोसा जा सकता है। यह नुस्खा उन सभी के लिए बेहद मुफीद है जो कचौड़ी का लुत्फ बिना गहरे तेल में तले उठाना पसंद करते हैं। साथ ही यह ध्यान रखना भी जरूरी है कि कम तेल में पकने के बावजूद भोजन की संतुलित मात्रा का ध्यान रखना सेहत के लिए हमेशा बेहतर रहता है।

सवाल-जवाब

क्या इस कचौड़ी के लिए मैदे या गेहूं के आटे की आवश्यकता होती है?
नहीं, इसका बाहरी आवरण केवल दो कप धुले पोहे, आधा कप बेसन और नमक के मिश्रण से तैयार किया जाता है।
पोहे को कितनी देर तक पानी में भिगोना चाहिए?
पोहे को पानी में देर तक भिगोकर नहीं रखना चाहिए, बल्कि छलनी में रखकर केवल पानी से अच्छी तरह धोना होता है।
कचौड़ी को पकाने के लिए किस बर्तन का उपयोग किया जाता है?
इसे तलने के बजाय अप्पे पैन में बेहद कम तेल की बूंदों के साथ मध्यम आंच पर सेका जाता है।
आलू के भरावन में कौन-कौन से साबुत मसाले तड़के में डाले जाते हैं?
तड़के में एक चम्मच सरसों के तेल के साथ जीरा, कलौंजी और हींग डाली जाती है।
हरी चटनी बनाते समय पानी क्यों नहीं डाला जाता?
टमाटर के प्राकृतिक रस से ही धनिया, मिर्च और मसाले मिक्सी में बिना पानी डाले आसानी से पिस जाते हैं।
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