दीपावली के आगमन के साथ ही घरों में साफ-सफाई और साज-सज्जा की हलचल तेज हो जाती है। हर कोई चाहता है कि त्योहार के पावन अवसर पर उसका आशियाना जगमगाता हुआ और बेहद आकर्षक नजर आए। इस चाहत में लोग अक्सर बाजारों की ओर रुख करते हैं और नए पर्दे, महंगे कुशन कवर, डिजाइनर शोपीस तथा अनगिनत फैंसी लाइट्स की खरीदारी पर भारी रकम खर्च कर देते हैं। इस तरह की अनियोजित खरीदारी से महीने का घरेलू बजट पूरी तरह गड़बड़ा जाता है। हालांकि, त्योहार की भव्यता का संबंध इस बात से कतई नहीं है कि सजावट पर कितना पैसा खर्च किया गया है। अगर थोड़ी रचनात्मकता और समझदारी दिखाई जाए, तो घर के स्टोर रूम, किचन और अलमारी में पहले से उपेक्षित पड़ी पुरानी चीजों से ही बेहद खूबसूरत और शाही फेस्टिव माहौल तैयार किया जा सकता है।
घरों में अक्सर ऐसी कई वस्तुएं बेकार समझकर छोड़ दी जाती हैं, जिनका सही उपयोग इंटीरियर डेकोरेशन में किया जा सकता है। खाली पड़ी कांच की बोतलें, जैम या अचार के कांच के जार, पिछले साल संभालकर रखे गए मिट्टी के दीये, अलमारी के किसी कोने में दबे पुराने बनारसी या बांधनी दुपट्टे और पुरानी सर्विसिंग ट्रे ऐसी चीजें हैं जो घर का कायाकल्प कर सकती हैं। बस जरूरत इस बात की है कि इन चीजों की समुचित साफ-सफाई की जाए, रंगों का सुरुचिपूर्ण तालमेल बिठाया जाए और उन्हें कमरे के सही कोनों में जगह दी जाए।
खाली कांच के जार और बोतलों से तैयार करें जादुई लाइटिंग
रसोई में अक्सर खाद्य सामग्री खत्म होने के बाद कांच के पारदर्शी जार और कांच की बोतलें जमा हो जाती हैं। बहुत से लोग इन्हें कबाड़ समझकर फेंक देते हैं, लेकिन दीपावली की शाम इन्हें बेहतरीन सजावटी लैंप में बदला जा सकता है। इसके लिए सबसे पहले जार को गर्म पानी और साबुन से अच्छी तरह धोकर सुखा लें ताकि उनके स्टीकर और चिकनाई पूरी तरह हट जाएं। इसके बाद इन साफ जार के भीतर बैटरी से चलने वाली पतली कॉपर वायर वाली LED फेयरी लाइट्स को व्यवस्थित तरीके से भर दें।
इन जार की बाहरी सुंदरता बढ़ाने के लिए इनके गले पर सुनहरे या लाल रंग के रिबन बांधे जा सकते हैं, या फिर किनारों पर खूबसूरत गोटा-पट्टी या लेस चिपकाई जा सकती है। जब अंधेरा घिरने पर आप इन लाइट्स को ऑन करेंगे, तो कांच से छनकर आने वाली रोशनी कमरे में एक बेहद गर्मजोशी भरा और उत्सवमय वातावरण बना देती है। इन जार को लिविंग रूम की सेंटर टेबल, साइड टेबल, खिड़कियों की चौखट या फिर मुख्य दरवाजे के दोनों तरफ रखा जा सकता है। एक जरूरी सुरक्षा पहलू यह है कि कांच के बंद जार के अंदर कभी भी असली जलती हुई मोमबत्ती न रखें, क्योंकि कांच अत्यधिक गर्मी से चटक सकता है। मोमबत्ती के मुकाबले LED लाइट्स का इस्तेमाल हर लिहाज से सुरक्षित और टिकाऊ साबित होता है।
पुराने दुपट्टों और साड़ियों से सजाएं दीवारें और टेबल
त्योहारों के मौसम में कपड़ों का चयन घर के माहौल को पूरी तरह बदल देता है। यदि आपकी अलमारी में कोई पुरानी ब्रोकेड, सिल्क, बांधनी या चंदेरी साड़ी अथवा दुपट्टा रखा है जिसे अब आप पहनते नहीं हैं, तो उसे सजावट का मुख्य आकर्षण बनाएं। ऐसे पारंपरिक वस्त्रों को डाइनिंग टेबल या सेंटर टेबल पर एक डिजाइनर रनर की तरह बिछाया जा सकता है। कपड़े के गहरे और चमकदार रंग टेबल की साधारण लकड़ी को भी एक राजसी लुक दे देते हैं।
इसके अलावा, लिविंग रूम की किसी सूनी दीवार पर इस खूबसूरत कपड़े को पर्दे या टेपेस्ट्री की तरह टांगा जा सकता है। इस कपड़े के चारों तरफ हल्के वजन वाली फेयरी लाइट्स को झालर की तरह लगा दें। दीपावली के पर्व पर लाल, पीला, नारंगी, रानी गुलाबी और सुनहरा रंग बेहद शुभ और आकर्षक माना जाता है। ऐसे पारंपरिक रंगों के दुपट्टे कमरे में रोशनी के साथ मिलकर एक बेहतरीन बैकड्रॉप तैयार करते हैं, जो परिवार की तस्वीरों के लिए एक शानदार कोना भी साबित हो सकता है। इससे बिना एक भी नया कपड़ा खरीदे घर को बिल्कुल नया कलेवर मिल जाता है।
पिछले साल के मिट्टी के दीयों को दें नया रंग-रूप
दीपावली के बाद अधिकांश घरों में पूजा के दीयों को धोकर रख दिया जाता है या फिर उन्हें बेकार मान लिया जाता है। नए दीये खरीदने से पहले घर में रखे पुराने मिट्टी के दीयों की जांच कर लें। जो दीये कहीं से टूटे या चटके न हों, उन्हें कुछ देर पानी में भिगोकर रखें और फिर ब्रश की मदद से अच्छी तरह साफ करके धूप में सुखा लें। पूरी तरह सूख जाने के बाद इन दीयों पर ऐक्रेलिक पेंट की मदद से नई जान फूंकी जा सकती है।
आप इन दीयों पर पारंपरिक मांडना कला या महीन बिंदियों वाले डिजाइन बना सकते हैं। कुछ दीयों को केवल सुनहरे या चटख लाल रंग से रंगकर उनके कोनों पर बारीक चमकीला काम किया जा सकता है। जब इन दीयों को पूजा स्थल, बालकनी की रेलिंग, सीढ़ियों या घर की दहलीज पर कतारबद्ध तरीके से सजाया जाता है, तो इनकी आभा देखते ही बनती है। पेंटिंग करते समय एक खास बात का ध्यान रखें कि दीये के अंदरूनी हिस्से यानी जहां तेल भरा जाता है और बाती रखी जाती है, वहां गहरा पेंट न लगाएं ताकि दीया जलते समय धुआं या अप्रिय गंध न पैदा करे। इसके साथ ही मिट्टी के जलते हुए दीयों को हमेशा खिडकियों के परदों, सोफे के कवर और अन्य ज्वलनशील सामग्रियों से सुरक्षित दूरी पर रखें।
पुरानी मेटल, लकड़ी या कांच की ट्रे का सुरुचिपूर्ण उपयोग
रसोई की अलमारियों में ऐसी कई सर्विंग ट्रे रखी होती हैं जो या तो पुरानी हो चुकी होती हैं या जिनका इस्तेमाल रोजमर्रा में नहीं होता। चाहे वह पीतल, तांबे या लोहे जैसी मेटल की ट्रे हो, नक्काशीदार लकड़ी की ट्रे हो या फिर मोटे कांच की, इसे एक शानदार टेबल सेंटरपीस बनाया जा सकता है। सबसे पहले ट्रे को उसकी सामग्री के अनुसार अच्छे से साफ करें। अगर मेटल की ट्रे की चमक फीकी पड़ गई है, तो उसे पॉलिश करके चमकाया जा सकता है।
इस ट्रे के भीतर ताजे गेंदे के फूल, गुलाब की पंखुड़ियां, सजावटी मोती और छोटी LED टी-लाइट्स को कलात्मक ढंग से सजाएं। इस सजी हुई ट्रे को आप लिविंग रूम के कॉफी टेबल पर या पूजा घर के सामने रख सकते हैं। फूलों की भीनी-भीनी महक और टी-लाइट्स की मद्धम रोशनी पूरे कमरे में एक आध्यात्मिक और शांतिपूर्ण माहौल घोल देती है। ट्रे की सतह को किसी भी तरह के नुकसान से बचाने के लिए उस पर पहले एक पारदर्शी शीट या खूबसूरत कपड़ा बिछाया जा सकता है।
कुशन कवर्स और चादरों की मिक्सिंग से लाएं नयापन
घर के मुख्य बैठक कक्ष को नया रूप देने के लिए पूरे सोफे के गद्दे बदलना या महंगे नए सोफा कवर खरीदना बिल्कुल जरूरी नहीं है। आपके पास पहले से मौजूद अलग-अलग सेट के कुशन कवर्स को आपस में मिलाकर एक नया संयोजन तैयार किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, एक सादे सोफे पर चमकीले सुनहरे, मैरून और गहरे हरे रंग के अलग-अलग डिजाइन वाले कुशन रखें।
इसके साथ ही किसी पारंपरिक प्रिंट वाली चादर या हल्के वजन वाले शॉल को सोफे के एक कोने पर थ्रो की तरह करीने से डाल दें। रंगों का यह कंट्रास्ट कमरे को तुरंत एक रिच और डिजाइनर फील देता है। जब अलग-अलग पैटर्न और बनावट वाले कपड़े एक साथ आते हैं, तो पूरा लिविंग रूम त्योहार के स्वागत के लिए जीवंत नजर आने लगता है, और इसके लिए आपको अपनी जेब से कुछ भी अतिरिक्त खर्च करने की आवश्यकता नहीं होती।
सजावट के दौरान सुरक्षा और संतुलन का रखें ध्यान
किसी भी पुरानी वस्तु को सजावट में शामिल करने से पहले उसकी मजबूती और सुरक्षा की पूरी जांच कर लें। चटके हुए कांच के जार या बोतलें हाथ में चोट का कारण बन सकती हैं, इसलिए केवल सही सलामत जार का ही उपयोग करें। अगर आप पुरानी इलेक्ट्रिक लड़ियों या फेयरी लाइट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो उनकी तारों की जांच कर लें कि कहीं से कोई तार कटी या खुली तो नहीं है, ताकि शॉर्ट सर्किट का खतरा न रहे।
सजावट करते समय इस बात का ध्यान रखना भी जरूरी है कि कमरा जरूरत से ज्यादा भरा हुआ न लगे। एक साथ बहुत सारे रंगों और ढेर सारी चीजों का अंबार लगाने के बजाय केवल दो या तीन प्रमुख रंगों की थीम चुनें, जैसे लाल और सुनहरा या नारंगी और पीला। इससे सजावट संतुलित, शालीन और देखने में अत्यंत सुरुचिपूर्ण लगती है।



















