सृष्टि की उत्पत्ति से पहले क्या था और इस ब्रह्मांड का निर्माण किस प्रकार हुआ, यह विषय सदियों से मनुष्य के लिए एक बड़ा रहस्य बना हुआ है। आज के समय में भी ब्रह्मांड विज्ञान इस विषय पर लगातार शोध कर रहा है और नए सिद्धांत सामने आ रहे हैं, हालांकि कई सिद्धांतों में समय के साथ कमियां भी पाई जाती हैं। इसके बावजूद, करीब 2500 से 3000 साल पहले प्राचीन ऋषियों ने इन सभी जटिल प्रश्नों के उत्तर दे दिए थे। आज की कॉस्मोलॉजी साइंस की कई बातें उन प्राचीन ग्रंथों से हैरान करने वाले तरीके से मिलती हैं। महर्षि मनु ने मनुस्मृति के पहले अध्याय में ही ब्रह्मांड के निर्माण का विस्तृत विवरण दिया है।
महर्षि मनु के पास पहुंचे थे भृगु आदि ऋषि
मनुस्मृति के आरंभ से पूर्व उल्लेख मिलता है कि भृगु सहित कई महान ऋषि एकाग्र मुद्रा में बैठकर भगवान मनु के समीप गए थे। उन्होंने हाथ जोड़कर उन्हें प्रणाम किया और निवेदन किया कि वे सभी वर्णों तथा संकर जातियों के धर्मों को क्रमानुसार समझाने में सक्षम हैं। ऋषियों ने उनसे आग्रह किया कि वे उन्हें सनातन धर्म और नियमों का ज्ञान दें तथा सबसे पहले यह बताएं कि इस सृष्टि के निर्माण से पूर्व क्या स्थिति थी। ऋषियों के इस जिज्ञासा भरे प्रश्न को सुनने के बाद महर्षि मनु ने सृष्टि की रचना के गहरे रहस्यों को समझाना आरंभ कर दिया।
मनुस्मृति में श्लोक के जरिए बताया गया अंधकार युग
मनुस्मृति के प्रथम अध्याय के श्लोक 5 से 9 के बीच सृष्टि के सृजन से बिल्कुल पहले की अवस्था का वर्णन किया गया है। इसमें उल्लेख मिलता है कि सृष्टि के निर्माण से पूर्व यह संपूर्ण ब्रह्मांड पूरी तरह से अंधकार से ढका हुआ था। उस समय संसार में कहीं कोई लक्षण दिखाई नहीं देता था और सब कुछ अप्रत्यक्ष अवस्था में था। ब्रह्मांड की वह स्थिति पूरी तरह तर्क से परे, अज्ञात और ऐसी प्रतीत होती थी मानो वह किसी गहरी नींद में सोया हुआ हो। प्राचीन ऋषियों ने इस अंधकारमय युग का अपने वचनों में काफी विस्तार से जिक्र किया है।
आधुनिक विज्ञान और कॉस्मोलॉजी से मेल
प्राचीन काल की मनुस्मृति में बताए गए इस अंधकार युग का विवरण आज के विज्ञान के सिद्धांतों के साथ आश्चर्यजनक रूप से समानता रखता है। उस दौर में आधुनिक विज्ञान का कोई अस्तित्व नहीं था, लेकिन आज की आधुनिक एस्ट्रोनॉमी और क्वांटम फिजिक्स भी ब्रह्मांड की शुरुआत को लेकर लगभग वैसी ही परिकल्पनाएं सामने रखती हैं। विज्ञान जगत में सृष्टि से पहले के काल को डार्क एज के रूप में याद किया जाता है। ब्रह्मांड के निर्माण से जुड़ा सबसे पुख्ता सिद्धांत द बिग बैंग थ्योरी है, जिसके अनुसार करीब 13.8 अरब वर्ष पूर्व अंतरिक्ष और समय का अस्तित्व नहीं था और संपूर्ण ब्रह्मांड एक अत्यंत सघन व अनंत रूप से छोटे बिंदु में समाया हुआ था।
बिग बैंग और कॉस्मिक डार्क एज की अवधारणा
विज्ञान के अनुसार उस शुरुआती बिंदु को न तो देखा जा सकता था और न ही उसका माप संभव था, जो कि मनुस्मृति के अप्रज्ञातम यानी अज्ञात और तमौभूत यानी अंधकार से भरे स्वरूप से पूरी तरह मेल खाता है। मनुस्मृति में भी इसी बात का जिक्र किया गया है कि रचना से पहले कोई चिह्न मौजूद नहीं था और सब कुछ अंधकारमय था। इसके अलावा बिग बैंग के तुरंत बाद के कॉस्मिक डार्क एज के सिद्धांत को भी बेहद मान्यता प्राप्त है, क्योंकि उस शुरुआती दौर में ब्रह्मांड के भीतर कोई तारा या प्रकाश उत्पन्न करने वाला स्रोत नहीं था। वैज्ञानिक इस कालखंड को कॉस्मिक डार्क एज कहते हैं, जो प्राचीन ग्रंथों में वर्णित घोर अंधकार से पूरी तरह जुड़ता है।



















