मौसम बदलने के साथ ही घर की बालकनी या छत के छोटे से हिस्से को एक उपयोगी और हरे-भरे किचन गार्डन का रूप देना बेहद आसान हो जाता है। अक्सर लोगों को लगता है कि ताजी और सेहतमंद सब्जियां उगाने के लिए किसी बड़े खेत, विस्तृत जमीन या खुले बगीचे की दरकार होती है, लेकिन असलियत यह है कि सही योजना और सही गमलों के चुनाव से छोटी जगह में भी बेहतरीन उपज ली जा सकती है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद यानी आईसीएआर के बागवानी और कृषि परामर्श में भी इस बात की पुष्टि की गई है कि मूली, गाजर, पालक तथा शलजम जैसी फसलें कम तापमान और ठंड के अनुकूल होती हैं। इसके साथ ही सर्दियों में हरी मटर की खेती भी बेहद मुफीद मानी जाती है। यदि सर्दियां शुरू होने से पहले ही गमलों और मिट्टी की तैयारी कर ली जाए, तो पूरी ठंड परिवार को कीटनाशकों और रसायनों से मुक्त ताजी हरी सब्जियां घर पर ही खाने को मिल सकती हैं।
ढीली मिट्टी और धूप में खूब पनपती है मूली
बालकनी में बागवानी का शौक पूरा करने वालों के लिए मूली सबसे उपयुक्त और भरोसेमंद विकल्प साबित होती है। इसे उगाने के लिए अलग से पौध तैयार करने की जरूरत नहीं पड़ती, बल्कि बीजों को सीधे गमले अथवा ग्रो बैग में बोया जा सकता है। मूली की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह कम समय में तैयार हो जाती है और जब मिट्टी के नीचे इसकी जड़ मोटी होने लगती है, तो आप बाहर से ही इसे देखकर अपनी मेहनत का नतीजा समझ सकते हैं। ठंडे वातावरण में मूली की बढ़वार बहुत तेज और शानदार होती है। हालांकि, इसे लगाते समय इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि गमला या ग्रो बैग इतना गहरा हो कि नीचे की तरफ जड़ को फैलने के लिए पूरी जगह मिल सके।
मूली की बेहतर उपज के लिए मिट्टी की बनावट पर विशेष ध्यान देना चाहिए। गमले की मिट्टी कभी भी ज्यादा सख्त, चिकनी या दबी हुई नहीं होनी चाहिए। भुरभुरी और ढीली मिट्टी में मूली की जड़ बिना किसी रुकावट के सीधी और लंबी विकसित होती है। इसके अलावा, गमले को ऐसी खुली जगह पर रखना चाहिए जहां दिन में पर्याप्त धूप आती हो, क्योंकि अच्छी धूप मिलने पर ही पौधा स्वस्थ रहता है। सिंचाई के मामले में संतुलन बरतना जरूरी है; मिट्टी में हल्की नमी बनी रहनी चाहिए, लेकिन पानी का जमाव बिल्कुल नहीं होना चाहिए, अन्यथा जड़ें सड़ने का खतरा पैदा हो जाता है।
शुरुआती बागवानों के लिए सबसे आसान है पालक की बुवाई
अगर आपने इससे पहले कभी कोई सब्जी नहीं उगाई है और बालकनी में बागवानी की पहली शुरुआत कर रहे हैं, तो पालक आपके लिए सबसे सरल और उत्साहवर्धक विकल्प है। पालक उगाने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे किसी बहुत गहरे बर्तन की दरकार नहीं होती। उथले लेकिन चौड़े गमले या ट्रे में भी इसकी बुवाई बहुत अच्छे से की जा सकती है, जहां कई सारे बीजों को थोड़ी-थोड़ी दूरी पर आसानी से छिड़का जा सके।
पालक की फसल ठंडे मौसम में बहुत तेजी से हरी-भरी पत्तियां देती है। गमले की मिट्टी में हल्का गीलापन बनाए रखें और उसे ऐसी जगह रखें जहां भरपूर प्राकृतिक रोशनी और धूप मिल सके। जब पत्तियां हरी और चौड़ी हो जाएं, तो पूरे पौधे को जड़ से उखाड़ने के बजाय केवल बाहरी पत्तियों को कैंची या हाथ से तोड़कर रसोई में इस्तेमाल करें। इस तरीके से पौधे से लगातार नई पत्तियां निकलती रहती हैं और एक ही गमले से कई हफ्तों तक ताजी हरी पालक का स्वाद मिलता रहता है।
गहरे ग्रो बैग में तैयार करें रसीली गाजर
गमलों में गाजर उगाना किसी भी बागवान के लिए एक बेहद सुखद और रोमांचक अनुभव होता है। गमले के ऊपर हरी, बारीक और सुंदर पत्तियां फैलती हैं जो देखने में काफी आकर्षक लगती हैं, जबकि असली गाजर खामोशी से मिट्टी के भीतर नीचे की तरफ बढ़ती रहती है। गाजर की सफल पैदावार के लिए सबसे महत्वपूर्ण कारक गमले की गहराई होती है। इसके लिए कम से कम 12 से 15 इंच गहरा गमला या बड़ा ग्रो बैग चुनना चाहिए, ताकि जड़ को नीचे की दिशा में बिना रुकावट के बढ़ने का पर्याप्त स्थान मिल सके।
गाजर के मामले में मिट्टी का हल्का और पूरी तरह भुरभुरा होना अनिवार्य है। अगर मिट्टी में ढेले, कंकड़ या बहुत ज्यादा कड़ापन होगा, तो गाजर टेढ़ी-मेढ़ी हो सकती है या उसकी मोटाई सही नहीं बनेगी। घरेलू बालकनी में उगाने के लिए गाजर की ऐसी प्रजातियां या किस्में चुननी चाहिए जो खास तौर पर कंटेनर गार्डनिंग के लिए बनाई गई हों और जिन्हें बहुत ज्यादा अतिरिक्त गहराई की जरूरत न पड़ती हो। पर्याप्त धूप और नियमित हल्की सिंचाई से घर पर ही मीठी और रसीली गाजर तैयार हो जाती है।
सहारे के साथ बालकनी की दीवारों पर चढ़ाएं हरी मटर
सर्दियों के मौसम में हरी मटर का पौधा बालकनी की खूबसूरती और हरियाली को कई गुना बढ़ा देता है। बीज अंकुरित होने के बाद मटर का पौधा तेजी से एक सुंदर बेल का रूप ले लेता है और कुछ ही हफ्तों में इस पर सफेद फूल और फिर हरी फलियां लटकती नजर आने लगती हैं। मटर के पौधे का तना बेहद नाजुक और कोमल होता है, इसलिए इसे ऊपर चढ़ने के लिए किसी मजबूत सहारे की सख्त आवश्यकता होती है।
मटर के गमले में लकड़ी की खपच्चियां, तार की जाली या छोटा ट्रेलिस लगा देना चाहिए। इस सहारे की मदद से बेल ऊपर की तरफ बढ़ती जाती है, जिससे बालकनी के फर्श की जगह खाली रहती है और दीवार पर सुंदर वर्टिकल गार्डन बन जाता है। शीतकालीन मौसम में मटर की वृद्धि बहुत अच्छी होती है। भरपूर धूप, उचित जल निकासी और मजबूत सहारे के तालमेल से मटर का पौधा खूब फलता-फूलता है और ताजी फलियों से भर जाता है।
पत्तियों और जड़ दोनों का स्वाद देता है शलजम
यदि आप अपने सीमित स्थान में ऐसी सब्जी लगाना चाहते हैं जिसका हर हिस्सा काम आए, तो शलजम एक बेहतरीन चुनाव है। शलजम की विशेषता यह है कि इसकी गोल जड़ के साथ-साथ इसकी पौष्टिक हरी पत्तियों का इस्तेमाल भी साग या भुर्जी के रूप में किया जा सकता है। यह ठंडी जलवायु की फसल है और बहुत कम फैलाव में भी बेहतरीन उत्पादन देने में सक्षम है।
शलजम की बुवाई के लिए भी अच्छी गहराई और चौड़ाई वाला गमला या ग्रो बैग चाहिए ताकि मिट्टी के अंदर कंद को फूलने के लिए खुली जगह मिल सके। बीजों के अंकुरण के बाद अक्सर एक ही जगह कई पौधे घने उग आते हैं। ऐसे में पौधों की छंटाई यानी थिनिंग करना बहुत जरूरी है; कमजोर पौधों को हटाकर मुख्य पौधों के बीच उचित फासला बना दें ताकि हर शलजम को पोषण मिल सके। गमले में जलभराव न होने दें, सिर्फ हल्की नमी बनाए रखने से शलजम की गांठ रसदार और मुलायम बनती है।
सीमित स्थान में भी सफल रहेगा आपका किचन गार्डन
सब्जियों की बागवानी के लिए हमेशा बड़े फार्महाउस या विस्तीर्ण आंगन की अनिवार्यता नहीं होती। सही समझ और बर्तनों के सटीक चयन से दो या तीन फीट चौड़ी बालकनी में भी एक कामयाब किचन गार्डन खड़ा किया जा सकता है। बुनियादी नियम यह समझना है कि पालक जैसी उथली जड़ों वाली पत्तेदार सब्जियों के लिए चौड़े और कम गहरे बर्तन पर्याप्त होते हैं, जबकि मूली, गाजर और शलजम जैसी कंदमूल सब्जियों के लिए नीचे की ओर गहरी जगह चाहिए होती है। वहीं मटर जैसी बेल वाली फसलों के लिए फर्श के बजाय ऊंचाई की ओर बढ़ने का प्रबंध करना पड़ता है।
शुरुआत में बहुत सारे गमलों का बोझ उठाने के बजाय कुछ चुने हुए कंटेनरों से आगाज करें। दो गमलों में हरी पालक, दो बड़े ग्रो बैग में मूली और गाजर, एक गमले में शलजम और एक कोने में ट्रेलिस के सहारे मटर लगाकर आप अपनी सामान्य बालकनी को एक शानदार घरेलू सब्जी घर में बदल सकते हैं। इससे न केवल परिवार को रोज ताजा और सुरक्षित आहार मिलेगा, बल्कि पौधों की देखरेख से मिलने वाला मानसिक सुकून भी सर्दियों के दिनों को खुशनुमा बना देगा।



















