अस्पतालों, पैथोलॉजी लैब और क्लीनिकों में संक्रमण की रोकथाम और स्वच्छता बनाए रखने के लिए स्वास्थ्यकर्मियों का ग्लव्स पहनना अनिवार्य प्रक्रिया का हिस्सा है. ज्यादातर लोग इन दस्तानों को महज हाथों को सुरक्षित रखने का जरिया समझते हैं, मगर स्वास्थ्य सेवाओं की दुनिया में ग्लव्स के अलग-अलग रंगों का बेहद खास वैज्ञानिक और व्यावहारिक महत्व होता है. रंगों के इस सटीक वर्गीकरण की बदौलत डॉक्टर और लैब तकनीशियन बिना किसी असमंजस के यह पहचान लेते हैं कि कौन सा दस्ताना किस खास काम, जोखिम स्तर और प्रक्रिया के लिए तैयार किया गया है.
नीले ग्लव्स और सामान्य स्वास्थ्य जांच
स्वास्थ्य केंद्रों में सबसे अधिक इस्तेमाल नीले रंग के दस्तानों का देखने को मिलता है. ये दस्ताने मुख्य रूप से नाइट्राइल सामग्री की मदद से तैयार किए जाते हैं. चूंकि नाइट्राइल पूरी तरह से लेटेक्स मुक्त होता है, इसलिए जिन स्वास्थ्यकर्मियों या मरीजों को प्राकृतिक रबर या लेटेक्स से त्वचा पर एलर्जी की समस्या होती है, उनके लिए यह सबसे सुरक्षित विकल्प साबित होता है. सामान्य रूप से ओपीडी में मरीजों की शारीरिक जांच करने, लैब में खून के नमूनों को संभालने और रोजमर्रा के सामान्य चिकित्सीय कार्यों को पूरा करने में नीले ग्लव्स पहली पसंद माने जाते हैं.
सर्जरी में सफेद रंग की अहमियत
सफेद रंग के दस्ताने आमतौर पर ऑपरेशन थिएटर और बेहद संवेदनशील चिकित्सीय प्रक्रियाओं के दौरान हाथों में नजर आते हैं. सफेद रंग को स्वच्छता और पूर्ण शुद्धता का प्रतीक माना जाता है. इस रंग का सबसे बड़ा व्यावहारिक लाभ यह है कि इस पर खून, तरल पदार्थ या किसी भी प्रकार की हल्की सी गंदगी और दाग तुरंत साफ नजर आ जाते हैं. इससे संक्रमण फैलने के खतरे को समय रहते न्यूनतम करने में सीधी मदद मिलती है.
बैंगनी और काले ग्लव्स का विशिष्ट कार्य
बैंगनी रंग के ग्लव्स भी आमतौर पर नाइट्राइल से ही बनाए जाते हैं. कई चिकित्सा संस्थानों में इनका उपयोग विशेष रूप से कीमोथेरेपी की दवाओं, घातक रसायनों और तीव्र दवाओं के रख-रखाव के वक्त किया जाता है. इनका गहरा बैंगनी रंग दूर से ही यह संकेत दे देता है कि वहां कोई विशेष और संवेदनशील रासायनिक काम चल रहा है, जिससे वे सामान्य दस्तानों से अलग पहचाने जा सकें.
दूसरी ओर, काले रंग के ग्लव्स का प्रयोग नियमित मेडिकल वार्डों में कम होता है, लेकिन कुछ विशिष्ट वैज्ञानिक लैब और फॉरेंसिक जांच कार्यों में इन्हें प्राथमिकता दी जाती है. काले रंग पर रासायनिक दाग-धब्बे आसानी से छिप जाते हैं और काम के दौरान यह कर्मचारियों को एक अनुशासित और पेशेवर लुक भी प्रदान करता है.
हरे और पारदर्शी ग्लव्स का उपयोग
कुछ अस्पतालों के ऑपरेशन थिएटरों में हरे रंग के सर्जिकल ग्लव्स का चुनाव किया जाता है. हरा रंग मानवीय आंखों को काफी सुकून और राहत देता है. घंटों तक चलने वाली जटिल और लंबी सर्जरी के दौरान तेज सर्जिकल लाइटों के बीच काम करने वाले सर्जनों और सर्जिकल स्टाफ की आंखों पर तनाव कम पड़े, इसलिए यह रंग काफी सुविधाजनक माना जाता है.
वहीं पॉलीथीन अथवा विनाइल सामग्री से निर्मित पारदर्शी या बहुत हल्के रंग के ग्लव्स अपेक्षाकृत कम जोखिम वाली गतिविधियों के लिए सुरक्षित माने जाते हैं. इनका प्रयोग सामान्य जांच, साफ-सफाई के कार्यों या ऐसे स्थानों पर होता है जहां गंभीर रासायनिक या जैविक संक्रमण का कोई बड़ा खतरा मौजूद नहीं होता.
दस्ताने चुनते और इस्तेमाल करते समय सावधानियां
स्वास्थ्य क्षेत्र में दस्तानों का गलत उपयोग संक्रमण के खतरे को बढ़ा सकता है. इसके लिए कुछ बुनियादी प्रोटोकॉल का पालन बेहद जरूरी है
- सही ग्लव्स का चयन: हमेशा अपने कार्य की गंभीरता और जोखिम के हिसाब से ही उचित सामग्री और रंग का ग्लव्स पहनें.
- दोबारा इस्तेमाल से बचाव: एक बार इस्तेमाल किए जा चुके डिस्पोजेबल दस्तानों को दोबारा कभी भी उपयोग में न लाएं.
- क्षतिग्रस्त होने पर तुरंत बदलाव: अगर काम के दौरान ग्लव्स में कहीं से भी दरार आ जाए या वह फट जाए, तो उसे तुरंत हटाकर नया दस्ताना पहनें.
- हाथों की नियमित सफाई: दस्ताने पहनने से पहले और उन्हें उतारने के तुरंत बाद हाथों को साबुन या सैनिटाइजर से अच्छी तरह साफ करना जरूरी है.



















