अक्सर जब लोग किसी बड़े या लक्जरी होटल के कमरे में प्रवेश करते हैं, तो वहां का इंटीरियर देखकर चौंक जाते हैं। आम रिहायशी मकानों या सामान्य बजट होटलों में बाथरूम हमेशा ईंट-पत्थर की चारदीवारी और बंद दरवाजों के साथ बनाए जाते हैं। वहीं दूसरी तरफ, प्रीमियम और पांच सितारा होटलों में नहाने वाले हिस्से यानी बाथरूम की दीवारें पूरी तरह पारदर्शी कांच की बनी होती हैं। कई कमरों में बाथरूम तीन तरफ से बिल्कुल शीशे का होता है, जिससे कमरे के भीतर से बाथरूम का हर कोना आसानी से दिखाई देता है। पहली नजर में यह व्यवस्था काफी अजीब लगती है और लोगों के मन में प्राइवेसी को लेकर सवाल उठने लगते हैं, खासकर जब कमरे में एक से अधिक मेहमान ठहरे हों। हालांकि, आधुनिक हॉस्पिटैलिटी और आर्किटेक्चर में इस तरह के डिजाइन को अपनाने के पीछे कई सोचे-समझे तकनीकी, आर्थिक और मनोवैज्ञानिक कारण छिपे हैं।
कमरे को बड़ा और खुला दिखाने की स्मार्ट तकनीक
कांच की दीवारों का उपयोग करने की सबसे मुख्य वजह कमरे में जगह का अहसास बढ़ाना है। आधुनिक समय में शहरों के भीतर होटल के कमरों का आकार काफी कॉम्पैक्ट होता जा रहा है। जब किसी कमरे के अंदर कंक्रीट या ईंट की ठोस दीवार खड़ी कर दी जाती है, तो नजरें उस दीवार से टकराकर रुक जाती हैं, जिससे पूरा कमरा दो छोटे और तंग हिस्सों में बंटा हुआ महसूस होता है। इसके उलट, पारदर्शी शीशा नजरों के रास्ते में कोई रुकावट नहीं डालता। इससे कमरे और बाथरूम की सीमाएं आपस में घुलमिल जाती हैं और आंखों को एक बड़ा, खुला और हवादार स्पेस नजर आता है। इसके अलावा, अकेले यात्रा करने वाले मेहमानों के लिए यह व्यवस्था सुरक्षा और सुविधा के लिहाज से भी मददगार साबित होती है। नहाते समय भी वे कमरे के मुख्य प्रवेश द्वार, अपने रखे हुए कीमती सामान या चालू टेलीविजन पर नजर रख सकते हैं।
नेचुरल रोशनी का बेहतर प्रसार और बिजली की बचत
होटल के कमरों में केवल एक तरफ खिड़कियां होती हैं, जहां से प्राकृतिक धूप या बाहरी रोशनी अंदर आती है। ठोस दीवारों वाले बाथरूम में यह रोशनी कभी नहीं पहुंच पाती, जिसके कारण दिन के समय भी बाथरूम में भारी लाइटिंग जलानी पड़ती है। जब बाथरूम की दीवारें पारदर्शी शीशे की होती हैं, तो कमरे की मुख्य खिड़की से आने वाला प्राकृतिक प्रकाश सीधे नहाने वाले स्थान तक पहुंच जाता है। दिन के वक्त अतिरिक्त बल्ब या लैंप जलाने की आवश्यकता लगभग खत्म हो जाती है, जिससे होटल को बिजली के भारी बिल में सीधी राहत मिलती है। इसके साथ ही, पारदर्शी शीशे पर पड़ने वाली आधुनिक वार्म और एंबियंट लाइटिंग पूरे कमरे को एक लक्जरी स्पा जैसा प्रीमियम लुक देती है, जो मेहमानों के ठहरने के अनुभव को खास बनाती है।
मेंटेनेंस में आसानी और सफाई का ऊंचा स्तर
हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री में कमरों की स्वच्छता सबसे महत्वपूर्ण पैमाना होती है। पारंपरिक टाइल्स और सीमेंट वाले बाथरूम में नमी, सीलन और फंगस दीवारों के कोनों में छिप जाते हैं, जिन्हें पहचानना और साफ करना काफी मेहनत भरा काम होता है। कांच की सतह पूरी तरह स्मूद और वाटरप्रूफ होती है। यदि शीशे पर पानी की कोई बूंद, दाग, फंगस या गंदगी जमती है, तो वह हाउसकीपिंग स्टाफ को तुरंत नजर आ जाती है। इससे होटल का स्टाफ बेहद कम समय में स्प्रे और वाइपर की मदद से पूरे शीशे को चमका सकता है। इससे समय की बचत होती है और कमरा अगले मेहमान के लिए तेजी से तैयार हो जाता है।
अनावश्यक लाइट खुली छोड़ने की आदत पर लगाम
होटलों में ठहरने वाले मेहमानों की एक आम आदत होती है कि वे बाथरूम इस्तेमाल करने के बाद अंदर की लाइट बंद करना भूल जाते हैं। अगर बाथरूम के चारों तरफ बंद दीवारें और लकड़ी का ठोस दरवाजा हो, तो बाहर बैठे व्यक्ति को यह पता ही नहीं चलता कि अंदर लाइट जल रही है। इसके चलते कई घंटों या पूरी रात बिना वजह बल्ब जलते रहते हैं। पारदर्शी कांच होने की वजह से बाथरूम की तेज रोशनी पूरे कमरे में फैल जाती है। कमरे में आराम कर रहे या सोने जा रहे मेहमान की आंखों में जब यह रोशनी पड़ती है, तो वह तुरंत उठकर स्विच ऑफ कर देता है। इस छोटी सी डिजाइन ट्रिक से होटलों की ऊर्जा खपत काफी हद तक नियंत्रित रहती है।
निर्माण लागत में कमी और कीमती जगह की बचत
आर्किटेक्चरल और कंस्ट्रक्शन के नजरिए से देखें तो पारंपरिक ईंट, सीमेंट या ड्राईवॉल की दीवारें काफी मोटी होती हैं। एक सामान्य ठोस दीवार कम से कम 4 से 6 इंच चौड़ी जगह घेरती है। इसके मुकाबले कांच के मजबूत पैनल काफी पतले होते हैं। शीशे की दीवार लगाने से कमरे का लगभग 3 से 4 इंच का बेहद कीमती फ्लोर स्पेस बच जाता है, जो छोटे कमरों में अतिरिक्त खुलापन जोड़ने के लिए बहुत बड़ा अंतर पैदा करता है। इसके अतिरिक्त, ईंट-गारे की चिनाई, प्लास्टर, पुट्टी, पेंट और टाइलिंग कराने में हफ्तों का समय और भारी मजदूरी लगती है, जबकि ग्लास पैनल को बेहद तेजी से, कम खर्च में और बिना किसी झंझट के इंस्टॉल किया जा सकता है।
प्राइवेसी बनाए रखने के आधुनिक और तकनीकी इंतजाम
पारदर्शी बाथरूम को देखकर सबसे बड़ी फिक्र यही होती है कि अगर दो सहकर्मी, दोस्त या परिचित एक साथ कमरा साझा कर रहे हों, तो प्राइवेसी कैसे सुरक्षित रहेगी। आधुनिक होटलों ने इस समस्या के बेहद व्यावहारिक समाधान निकाले हैं, जिससे मेहमानों की निजता बिल्कुल प्रभावित नहीं होती। कई प्रीमियम होटलों में स्मार्ट इलेक्ट्रिक ग्लास तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें एक छोटा सा स्विच दबाते ही पारदर्शी शीशा एक सेकंड के भीतर पूरी तरह ओपेक यानी धुंधला हो जाता है, जिससे आर-पार कुछ भी दिखाई नहीं देता। इसके अलावा, कई जगह कांच की दीवारों के ठीक साथ वाटरप्रूफ रोलर ब्लाइंड्स या पर्दे लगाए जाते हैं, जिन्हें जरूरत पड़ने पर आसानी से नीचे गिराया जा सकता है। कुछ होटलों में रणनीतिक रूप से फ्रॉस्टेड यानी घिसा हुआ डिजाइनदार कांच लगाया जाता है, जिससे रोशनी तो पूरी तरह छनकर आती है, लेकिन बाहर से शरीर की दृश्यता बिल्कुल शून्य रहती है।



















