शहरी घरों में बालकनी का सीमित दायरा अक्सर गार्डनिंग के शौकीनों के लिए सबसे बड़ी रुकावट बन जाता है। एक या दो गमले रखते ही बालकनी भर जाती है और जगह की तंगी के कारण लोग मन मारकर रह जाते हैं। इसके बावजूद अगर स्मार्ट गार्डनिंग के नियमों को समझ लिया जाए, तो किसी बड़े टेरेस या दर्जनों गमलों की बिल्कुल जरूरत नहीं पड़ती। एक ही कंटेनर के भीतर जगह और संसाधनों का सही तालमेल बिठाकर एक साथ तीन अलग-अलग सब्जियों की सफल खेती की जा सकती है।
इस तकनीक की सबसे अहम शर्त यह समझना है कि पौधों को एक दूसरे के ऊपर बेतरतीब तरीके से ठूंसना नहीं है। हर पौधे की जड़ प्रणाली, उसके बढ़ने का अंदाज और धूप की आवश्यकताएं अलग होती हैं। अगर इन तीनों बातों को ध्यान में रखकर गमले की रूपरेखा तय की जाए, तो सीमित मिट्टी में भी हर पौधे को पर्याप्त पोषण मिलता है और पैदावार बेहतरीन होती है।
कंटेनर का सही चुनाव और मिट्टी तैयार करने की विधि
एक ही गमले में तीन फसलों को एक साथ पालने के लिए सबसे पहली जरूरत एक बड़े, गहरे और चौड़े कंटेनर की होती है। छोटे गमलों में मिट्टी की मात्रा सीमित होती है, जिससे जड़ों के बीच पानी और पोषक तत्वों को हासिल करने के लिए कड़ा मुकाबला शुरू हो जाता है। इसका सीधा असर पौधों के विकास पर पड़ता है। इसलिए हमेशा ऐसा गमला चुनें जो लंबाई और गहराई दोनों में पर्याप्त जगह दे सके।
कंटेनर के चयन के बाद जल निकासी और मिट्टी की संरचना पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। गमले के पेंदे में पानी निकलने के लिए पर्याप्त ड्रेनेज होल होने चाहिए ताकि अतिरिक्त पानी आसानी से बाहर निकल सके। मिट्टी तैयार करते समय सामान्य बगीचे की मिट्टी के साथ अच्छी तरह सड़ी हुई जैविक खाद और अन्य हल्की सामग्रियों का मिश्रण तैयार करें। ऐसा पोरस और उपजाऊ माध्यम जड़ों को सांस लेने की आजादी देता है और जलभराव का खतरा टल जाता है।
सब्जियों का संयोजन: ऊंचाई, जड़ और फैलाव का संतुलन
इस बागवानी फॉर्मूले को लागू करने के लिए ऐसे पौधों का चयन करना पड़ता है जिनकी बढ़ने की आदतें एक जैसी न हों। गमले के बिल्कुल बीच में या पीछे वाले हिस्से में हमेशा ऐसा पौधा लगाना चाहिए जो सीधा ऊपर की ओर बढ़ता हो। उदाहरण के तौर पर टमाटर का पौधा इस स्थान के लिए सबसे मुफीद साबित होता है, क्योंकि इसे किसी डंडी या खूंटे का सहारा देकर सीधा ऊपर चढ़ाया जा सकता है।
जब लंबा पौधा ऊपर की ओर बढ़ता है, तब गमले के किनारों और सतह पर बची खाली जगह का उपयोग कम ऊंचाई वाली या तेजी से तैयार होने वाली सब्जियों के लिए किया जाता है। टमाटर के साथ मूली और धनिया का मेल इसका सबसे सटीक उदाहरण है। मूली एक कंद वाली फसल है जिसकी जड़ें मिट्टी की गहराई में नीचे की तरफ बढ़ती हैं, जबकि धनिया सतह पर उथली जड़ों के साथ तेजी से पनपता है और बहुत कम जगह घेरता है। इस तरह तीनों सब्जियां बिना एक-दूसरे के रास्ते में आए अपने हिस्से का पोषण लेती रहती हैं। हालांकि मौसम, धूप की तीव्रता और पौधों की किस्म के हिसाब से इसके परिणामों में थोड़ा अंतर जरूर आ सकता है।
बुवाई का सही तरीका और सपोर्ट की व्यवस्था
एक ही गमले में कई पौधे लगाने का यह कतई मतलब नहीं है कि सारे बीजों को एक ही जगह पास-पास बिखेर दिया जाए। पौधों या बीजों को बहुत घने रूप में बोना सबसे आम गलती है, जिससे किसी भी पौधे को पूरी बढ़त नहीं मिल पाती। केंद्र में लगाए जाने वाले मुख्य पौधे, जैसे टमाटर, के साथ शुरुआत से ही एक मजबूत सहारा लगा देना चाहिए। ऐसा करने से उसकी शाखाएं चारों तरफ फैलकर नीचे उगने वाली सब्जियों को दबाती नहीं हैं।
गमले के एक हिस्से में मूली के बीजों को उचित दूरी और गहराई का ध्यान रखते हुए लगाएं ताकि उसकी जड़ों को नीचे फैलने का खुला स्थान मिले। वहीं गमले के बाहरी किनारों की खाली बची मिट्टी में धनिया छिड़कें। यह व्यवस्था गमले की हर परत का बेहतरीन इस्तेमाल सुनिश्चित करती है, जिसमें एक फसल हवा में ऊपर बढ़ती है, दूसरी मिट्टी के भीतर गहराई में जाती है और तीसरी किनारों पर हरी चादर की तरह फैलती है।
धूप का प्रबंधन और पानी देने के जरूरी नियम
एक कंटेनर में जब कई पौधे एक साथ पल रहे हों, तो सिंचाई को लेकर अत्यधिक सतर्कता बरतनी पड़ती है। पानी तभी दें जब मिट्टी की ऊपरी सतह छूने पर सूखी महसूस हो। गमले में कभी भी पानी को ठहरने या कीचड़ बनने न दें, क्योंकि ठहरा हुआ पानी जड़ों को सड़ा देता है और पौधों को भारी नुकसान पहुंचाता है।
इसके अलावा बालकनी में गमले को ऐसे स्थान पर रखना चाहिए जहां हर पौधे को पर्याप्त धूप मिल सके। यदि बीच में लगा लंबा टमाटर का पौधा बड़ा होकर किनारों पर लगी मूली या धनिए पर लगातार छाया डाल रहा हो, तो गमले की दिशा को समय-समय पर घुमाते रहना चाहिए। टमाटर के तनों को सहारे से बांधकर व्यवस्थित रखने से नीचे के छोटे पौधों को भी जरूरत के अनुसार धूप मिलती रहती है और पूरी फसल स्वस्थ बनी रहती है।

















