त्रिपुरा सरकार ने डम्बूर स्थित अपने ऐतिहासिक गुमटी जलविद्युत संयंत्र को पुनर्जीवित करने के लिए 100 करोड़ रुपये की योजना तैयार की है। राज्य के बिजली मंत्री रतन लाल नाथ ने जानकारी दी कि इस परियोजना की मरम्मत और बहाली का काम इसी वर्ष दिसंबर के महीने से शुरू किया जाएगा। इस व्यापक नवीनीकरण का मुख्य लक्ष्य संयंत्र की बिजली उत्पादन क्षमता को दोबारा बढ़ाकर 10 से 11 मेगावाट (MW) के स्तर तक ले जाना है।
56 वर्ष पुराना संयंत्र और क्षमता में आई गिरावट
राइमा और साइमा नदियों के संगम स्थल पर स्थापित गुमटी परियोजना त्रिपुरा का पहला बिजली प्रोजेक्ट है, जिसने लगभग 56 वर्ष पहले काम करना शुरू किया था। शुरुआत में 3 उत्पादन इकाइयों के साथ तैयार किए गए इस संयंत्र की कुल डिजाइन क्षमता 15 मेगावाट थी। हालांकि, दशकों के संचालन के बाद संयंत्र के उत्पादन में लगातार गिरावट दर्ज की गई। बिजली मंत्री के अनुसार, भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद भी यह संयंत्र केवल 2 से 3 मेगावाट बिजली का उत्पादन ही कर पा रहा था। इसके बाद वर्ष 2024 में आई भीषण बाढ़ ने बुनियादी ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचाया, जिससे बिजली उत्पादन और भी कम हो गया।
तकनीकी विशेषज्ञों और रोबोटिक तकनीक की मदद
परियोजना के पुनरुद्धार की योजना बनाने के लिए राज्य सरकार ने एक विस्तृत तकनीकी आकलन करवाया। इस वैज्ञानिक अध्ययन में एनआईटी, आईआईटी गुवाहाटी, भेल (BHEL) और एनएचपीसी (NHPC) के विशेषज्ञ शामिल हुए। इसके अलावा डम्बूर बांध और उसके पानी के नीचे के ढांचों की स्थिति की सटीक जांच के लिए केरल से एक विशेष अंडरवाटर रोबोट भी मंगवाया गया था। इन सभी आकलनों के आधार पर सरकार को पूरा भरोसा है कि बहाली कार्य पूरा होने के बाद संयंत्र से बिजली उत्पादन में उल्लेखनीय सुधार होगा।
ऐतिहासिक महत्व और स्थानीय आजीविका
गोमती जिले के तीर्थमुख में राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण के तत्वावधान में आयोजित बांध सुरक्षा पर एक दिवसीय सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम में रतन लाल नाथ ने संयंत्र के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गोमती नदी के उद्गम से जुड़े होने के कारण यह क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही डम्बूर की 48 झीलें बड़े पैमाने पर मछली पालन का आधार हैं, जिससे हजारों परिवारों को दैनिक आजीविका मिलती है।
बांध सुरक्षा नियम और निगरानी व्यवस्था
बिजली मंत्री ने रेखांकित किया कि भारत में 7,000 से अधिक बांध होने के बावजूद वर्ष 2021 तक बांध सुरक्षा पर कोई समर्पित कानून नहीं था। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार को बांधों की निगरानी मजबूत करने का श्रेय दिया। हालांकि वर्तमान में खतरे का कोई तात्कालिक कारण नहीं है, फिर भी एहतियाती उपाय के रूप में यह कानून लाया गया। अब हर मानसून से पहले और बाद में संबंधित अधिकारियों द्वारा बांधों का अनिवार्य निरीक्षण किया जाता है ताकि किसी भी संभावित जोखिम की समय रहते पहचान की जा सके। निचले इलाकों में रहने वाले नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है।
दूरदराज के क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क विस्तार
बैठक में बिजली मंत्री ने राज्य मंत्रिमंडल के एक अन्य अहम फैसले की जानकारी भी साझा की। उन्होंने बताया कि पिछली कैबिनेट बैठक में उन दूरदराज के क्षेत्रों में बीएसएनएल (BSNL) सेवाओं का विस्तार करने और नए मोबाइल टावर स्थापित करने का निर्णय लिया गया है, जहां अभी तक दूरसंचार नेटवर्क उपलब्ध नहीं है। इस नेटवर्क विस्तार का काम भी जल्द ही शुरू किया जाएगा।





















