त्रिपुरा के गोमती जिले के गमारिया इलाके में टिपरा मोथा के एक उम्मीदवार पर हुई गोलीबारी की घटना के बाद मंगलवार को पुलिस ने पूछताछ के लिए दो संदिग्ध व्यक्तियों को हिरासत में ले लिया है। इस हिंसक वारदात के विरोध में पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं ने उदयपुर से अमरपुर को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग पर नाकेबंदी कर दी थी, जिससे पूरे इलाके में यातायात ठप हो गया था। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा तय समयसीमा के भीतर ठोस कानूनी कदम उठाने का भरोसा दिए जाने के बाद पार्टी ने अपना सड़क जाम वापस ले लिया।
वरिष्ठ अधिकारियों की मध्यस्थता और विरोध स्थल पर गरमाई बहस
उदयपुर-अमरपुर मार्ग पर यह नाकेबंदी मंगलवार सुबह लगभग 9.45 बजे शुरू की गई थी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए गोमती की जिला मजिस्ट्रेट रिंकू लाठेर, पुलिस महानिरीक्षक (कानून और व्यवस्था) इप्पर मनचक तथा अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने मौके पर मौजूद प्रदर्शनकारी टिपरा मोथा नेताओं से सीधे बातचीत की। इस प्रदर्शन में पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधायक रंजीत देबबर्मा भी शामिल थे, जिन्होंने गोलीबारी में शामिल वास्तविक दोषियों को पकड़ने में हो रही देरी पर पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर कड़े सवाल उठाए।
बातचीत के दौरान माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया। पार्टी नेताओं और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी बहस देखने को मिली और इसके बाद दोनों पक्षों के बीच कुछ पलों के लिए मामूली धक्का-मुक्की की नौबत भी आ गई। टिपरा मोथा ने प्रशासन से स्पष्ट और लिखित प्रतिबद्धता की मांग की थी कि हमले के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ तुरंत दंडात्मक कदम उठाए जाएं। जब शीर्ष अधिकारियों ने समयबद्ध कार्रवाई का औपचारिक भरोसा दिया, तब जाकर प्रदर्शनकारी सड़क से हटने और चक्का जाम समाप्त करने पर सहमत हुए।
मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के लिए 72 घंटे की नई मोहलत
विधायक रंजीत देबबर्मा ने बताया कि पार्टी ने शुरुआत में पुलिस को आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए 48 घंटे का समय दिया था। जब यह दी गई समयसीमा समाप्त होने के बेहद करीब पहुंच गई और कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया, तो पार्टी कार्यकर्ताओं ने दोबारा सड़क पर उतरकर नाकेबंदी शुरू कर दी। देबबर्मा के अनुसार, पुलिस ने उन्हें अवगत कराया है कि मामले के सिलसिले में दो व्यक्तियों को पूछताछ हेतु हिरासत में लिया गया है, लेकिन घटना का जो मुख्य आरोपी है और जिसकी पहचान पहले ही स्थापित हो चुकी है, वह अब भी फरार चल रहा है।
विधायक ने स्पष्ट किया कि टिपरा मोथा ने अब बाकी बचे आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचाने के लिए प्रशासन को अतिरिक्त 72 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने दो टूक चेतावनी दी कि यदि इस नई समयसीमा के भीतर सभी आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया गया, तो पार्टी पूरे त्रिपुरा राज्य में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर देगी।
प्रशासन की सतर्कता और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163
पुलिस महानिरीक्षक इप्पर मनचक ने बताया कि गोलीबारी की घटना सामने आने के तुरंत बाद से ही पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद कर दिया गया है और कई एहतियाती कदम उठाए गए हैं। उन्होंने जानकारी दी कि इस घटना के संबंध में अब तक दो अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं और दोनों मामलों में जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। मनचक ने स्पष्ट किया कि पूरी प्रक्रिया कानून के अनुसार निष्पक्षता से पूरी की जाएगी।
उदयपुर की अनुविभागीय पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) देबांजलि रॉय ने भी इस बात की पुष्टि की है कि दो लोगों को गहन पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है और फिलहाल पूरे इलाके में कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में है। गोलीबारी की इस वारदात ने स्थानीय स्तर पर तनाव काफी बढ़ा दिया था, जहां टिपरा मोथा के नेताओं और युवा कार्यकर्ताओं में जांच की धीमी रफ्तार को लेकर भारी नाराजगी देखी जा रही थी। किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए प्रशासन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी है। इन प्रतिबंधों के लागू होने के बावजूद, विरोध प्रदर्शन स्थल पर टिपरा मोथा के विधायक और स्वायत्त जिला परिषद सदस्य (एमडीसी) उपस्थित रहे थे। टिपरा मोथा ने इससे पहले त्रिपुरा ग्राम समिति चुनावों के दौरान हुई इस गोलीबारी के लिए जिम्मेदार लोगों की गिरफ्तारी की मांग उठाई थी।





















