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त्रिपुरा राज्यपाल से मिले प्रद्योत देब्बर्मा, 18 लंबित जनजातीय परिषद विधेयकों को तुरंत मंजूरी देने की मांग कीराजनीति
27 अग॰ 2026, 2:39 pm (3 घंटे पहले)· 2

त्रिपुरा राज्यपाल से मिले प्रद्योत देब्बर्मा, 18 लंबित जनजातीय परिषद विधेयकों को तुरंत मंजूरी देने की मांग की

टिपरा मोथा पार्टी के संस्थापक प्रद्योत देब्बर्मा ने त्रिपुरा के राज्यपाल इंद्रसेना रेड्डी नल्लू से मुलाकात कर जनजाति परिषद द्वारा वर्ष 2007 से पारित 18 लंबित विधेयकों को जल्द मंजूरी दिलाने का अनुरोध किया।

अगरतला में टिपरा मोथा पार्टी (TMP) के संस्थापक प्रद्योत देब्बर्मा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को त्रिपुरा के राज्यपाल इंद्रसेना रेड्डी नल्लू से मुलाकात की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य त्रिपुरा ट्राइबल एरियाज ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल (TTAADC) द्वारा पारित किए गए कई महत्वपूर्ण कानूनों को प्रशासनिक स्वीकृति दिलाना था। प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को एक औपचारिक पत्र सौंपकर राज्य सरकार के स्तर पर लंबे समय से रुके हुए विधेयकों को शीघ्र मंजूरी देने के लिए संवैधानिक हस्तक्षेप की मांग की।

साल 2007 से अटके हैं 18 महत्वपूर्ण कानून

प्रद्योत देब्बर्मा ने राजभवन के बाहर पत्रकारों से बातचीत करते हुए बताया कि परिषद द्वारा पारित करीब 18 विधेयक वर्ष 2007 से राज्य सरकार के जनजाति कल्याण विभाग के पास लंबित पड़े हैं। इन विधेयकों में स्वायत्त परिषद क्षेत्रों में भूमि सुधार, पारंपरिक रीती-रिवाजों से जुड़े कानून, भर्ती नीतियां और प्रशासनिक सुधार जैसे संवेदनशील व आवश्यक विषय शामिल हैं। इन कानूनों के लागू न होने से स्थानीय टिपरासा समुदाय के विकास से जुड़े कई फैसले जमीनी स्तर पर निष्प्रभावी बने हुए हैं।

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छठी अनुसूची की शक्तियां और प्रशासनिक बाधाएं

भारतीय संविधान की छठी अनुसूची के तहत गठित TTAADC को त्रिपुरा के निर्दिष्ट जनजातीय क्षेत्रों में विधायी, कार्यकारी और प्रशासनिक अधिकार प्राप्त हैं। हालांकि परिषद द्वारा पारित विधेयकों को पूरी तरह लागू करने से पहले निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया के तहत राज्य सरकार और राज्यपाल की मंजूरी आवश्यक होती है। देब्बर्मा ने तर्क दिया कि परिषद जनता द्वारा चुनी गई एक वैधानिक संस्था है। जनप्रतिनिधियों द्वारा स्वीकृत कानूनों को लागू करने में अत्यधिक देरी होने से इस संवैधानिक संस्था के प्रति जनता के भरोसे पर विपरीत असर पड़ता है।

सर्वोच्च अदालत में याचिका और आगामी ग्रामीण चुनाव

लंबित विधेयकों को मंजूरी दिलाने की प्रक्रिया को गति देने के लिए प्रद्योत देब्बर्मा ने इससे पहले सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था, ताकि राज्य सरकार को इस विषय पर त्वरित कदम उठाने का निर्देश दिया जा सके। यह संपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब त्रिपुरा में आगामी विलेज कमेटी चुनावों की तैयारियां चल रही हैं। परिषद में वर्तमान में टिपरा मोथा का नियंत्रण है, और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) इन चुनावों से पहले टिपरा मोथा के साथ चुनावी तालमेल बनाने के प्रयासों में जुटी हुई है।

सवाल-जवाब

प्रद्योत देब्बर्मा ने राज्यपाल से क्यों मुलाकात की?
उन्होंने त्रिपुरा ट्राइबल एरियाज ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल (TTAADC) द्वारा पारित 18 लंबित विधेयकों को जल्द मंजूरी दिलाने के लिए राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग की।
कितने विधेयक और कब से लंबित हैं?
कुल 18 विधेयक वर्ष 2007 से राज्य सरकार के जनजाति कल्याण विभाग के पास लंबित पड़े हैं।
लंबित विधेयकों में मुख्य रूप से कौन से विषय शामिल हैं?
इनमें स्वायत्त परिषद क्षेत्रों में भूमि सुधार, पारंपरिक रीती-रिवाज कानून, भर्ती नीतियां और प्रशासनिक सुधार शामिल हैं।
TTAADC किस संवैधानिक प्रावधान के तहत काम करता है?
TTAADC भारतीय संविधान की छठी अनुसूची के तहत गठित एक स्वायत्त संस्था है जिसके पास विधायी, कार्यकारी और प्रशासनिक शक्तियां हैं।
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