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त्रिपुरा के 6.4 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों तक पहुंची नल से जल की सुविधा, विधानसभा में मुख्यमंत्री ने पेश किए आंकड़ेत्रिपुरा
27 अग॰ 2026, 7:58 pm (1 घंटे पहले)· 2

त्रिपुरा के 6.4 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों तक पहुंची नल से जल की सुविधा, विधानसभा में मुख्यमंत्री ने पेश किए आंकड़े

मुख्यमंत्री माणिक साहा ने विधानसभा में घोषणा की कि त्रिपुरा में 86.52 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों को नल से पेयजल कनेक्शन मिल चुका है, जिससे 1,193 ग्राम पंचायतों और विलेज कमेटियों के 6,47,437 परिवार लाभान्वित हुए हैं।

त्रिपुरा में ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विकास के तहत स्वच्छ पेयजल वितरण के दायरे में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जहां राज्य के 86.52 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों तक नल का पानी पहुंच चुका है। मुख्यमंत्री माणिक साहा ने विधानसभा सत्र के दौरान यह आंकड़े साझा करते हुए पुष्टि की कि 20 अगस्त 2026 तक राज्य के कुल 7,50,449 ग्रामीण परिवारों में से 6,47,437 परिवारों को सुरक्षित पेयजल नेटवर्क से सफलतापूर्वक जोड़ दिया गया है।

ग्राम पंचायतों में विस्तार और हालिया उपलब्धियां

यह जानकारी 13वीं त्रिपुरा विधानसभा के 10वें सत्र के दौरान BJP विधायक जहर चक्रवर्ती द्वारा पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए दी गई। राज्य सरकार की उपलब्धियों पर विस्तार से बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते तीन वर्षों के दौरान ही 1,91,106 ग्रामीण परिवारों को सुरक्षित पेयजल तक पहुंच प्रदान की गई है। पेयजल वितरण का यह नेटवर्क वर्तमान में राज्य भर की 1,193 ग्राम पंचायतों और विलेज कमेटियों तक फैल चुका है, जिससे दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में नल से जल पहुंचाया जा रहा है।

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जल जीवन मिशन के तहत विकास का सफर

राज्य में पेयजल आपूर्ति बुनियादी ढांचे के विकास क्रम को रेखांकित करते हुए माणिक साहा ने जल जीवन मिशन के तहत हासिल की गई तेज प्रगति का जिक्र किया। जब 15 अगस्त 2019 को यह राष्ट्रीय योजना शुरू की गई थी, तब त्रिपुरा में केवल 3.24 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों के पास ही नल से जल आपूर्ति का कनेक्शन उपलब्ध था। इसके बाद नियोजित कार्यों के जरिए इस कवरेज में लगातार विस्तार हुआ, जिसके तहत 20 अगस्त 2023 तक 1,51,135 ग्रामीण परिवारों को नल का पानी मिलने लगा था और अब यह आंकड़ा वर्तमान ऊंचाई पर पहुंच गया है।

पहाड़ी इलाकों और एडीसी क्षेत्रों में विशेष उपाय

त्रिपुरा स्वायत्त जिला परिषद (ADC) क्षेत्रों, विशेष रूप से मुंगियाकामी ब्लॉक में पेयजल संकट के संबंध में TMP विधायक रंजीत देबबर्मा के पूरक प्रश्न का उत्तर देते हुए मुख्यमंत्री ने कुछ दुर्गम इलाकों में मौजूद समस्याओं को स्वीकार किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले पहाड़ी क्षेत्रों में पारंपरिक जलापूर्ति प्रणाली स्थापित करना काफी जटिल होता है, खास तौर पर उन स्थानों पर जहां प्राकृतिक जल स्रोत उपलब्ध नहीं हैं और ट्यूबवेल ड्रिलिंग संभव नहीं हो पाती है।

इन प्राकृतिक बाधाओं को दूर करने के लिए राज्य सरकार वैकल्पिक तरीकों को अपना रही है। इसके तहत पहाड़ी झरनों और धाराओं से जल एकत्र करके उसे पंपिंग प्रणाली के जरिए ऊंचाई वाले स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है ताकि वहां से स्थानीय वितरण किया जा सके। मुख्यमंत्री साहा ने बताया कि ADC क्षेत्रों में औसत जल कवरेज लगभग 80 प्रतिशत तक पहुंच गया है, हालांकि अलग-अलग स्थानों पर यह कवरेज 85 से 100 प्रतिशत के बीच है। राज्य सरकार गहरे और उथले ट्यूबवेल, जल शोधन संयंत्रों और नवोन्मेषी परियोजनाओं का उपयोग करके शेष सभी परिवारों तक 100 प्रतिशत नल जल कवरेज हासिल करने के लक्ष्य पर काम कर रही है।

सवाल-जवाब

त्रिपुरा में कितने प्रतिशत ग्रामीण परिवारों के पास नल से जल का कनेक्शन है?
20 अगस्त 2026 तक त्रिपुरा ने 86.52 प्रतिशत ग्रामीण नल जल कवरेज हासिल कर लिया है, जिससे कुल 7,50,449 में से 6,47,437 ग्रामीण परिवार जुड़ चुके हैं।
पिछले तीन वर्षों में त्रिपुरा के कितने ग्रामीण परिवारों को नल जल कनेक्शन दिया गया?
पिछले तीन वर्षों के दौरान कुल 1,91,106 ग्रामीण परिवारों को सुरक्षित पेयजल कनेक्शन प्रदान किया गया।
जल जीवन मिशन की शुरुआत के समय त्रिपुरा में नल जल कवरेज कितना था?
15 अगस्त 2019 को जब जल जीवन मिशन शुरू किया गया था, तब त्रिपुरा में केवल 3.24 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों के पास ही नल जल कनेक्शन था।
पहाड़ी इलाकों में जहां ट्यूबवेल नहीं खोदे जा सकते, वहां पानी की आपूर्ति कैसे की जा रही है?
पहाड़ी इलाकों में जहां ट्यूबवेल लगाना संभव नहीं है, वहां झरनों और धाराओं से जल एकत्र कर उसे पंपिंग द्वारा ऊंचाई वाले स्थानों तक पहुंचाकर वितरित किया जा रहा है।
त्रिपुरा के एडीसी क्षेत्रों में औसत नल जल कवरेज कितना है?
त्रिपुरा के एडीसी क्षेत्रों में औसत जल कवरेज लगभग 80 प्रतिशत है, जो अलग-अलग इलाकों में 85 से 100 प्रतिशत के बीच है।
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·43 मिनट पहले

त्रिपुरा में जल जीवन मिशन के तहत 3 प्रतिशत से अधिक से बढ़कर 86 प्रतिशत से अधिक तक पहुंचना यह साबित करता है कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और पहाड़ी इलाकों में भी मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति से बुनियादी ढांचा सुधारा जा सकता है। खास तौर पर स्वायत्त जिला परिषद क्षेत्रों में प्राकृतिक बाधाओं के बावजूद वैकल्पिक तकनीकों जैसे झरनों से पानी खींचने का उपयोग एक बेहतरीन मॉडल पेश करता है, जो देश के अन्य राज्यों के लिए भी सीखने योग्य है।

Ravikash Gupta@ravikash·42 मिनट पहले

रहन-सहन की सुगमता का यह सुधार सीधे तौर पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने वाला साबित होगा। जब दूर-दराज के परिवारों को शुद्ध पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा मिलती है, तो जलजनित बीमारियों पर होने वाले स्वास्थ्य खर्च में कमी आती है और उत्पादक श्रम के घंटे बढ़ते हैं। वित्तीय दृष्टिकोण से, यह मानव पूंजी के विकास और ग्रामीण क्षेत्रों में पूंजी निर्माण का एक अप्रत्यक्ष लेकिन मजबूत आधार तैयार करता है, जिससे भविष्य में उपभोग और निवेश के नए अवसर पैदा होंगे।

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