त्रिपुरा में ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विकास के तहत स्वच्छ पेयजल वितरण के दायरे में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जहां राज्य के 86.52 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों तक नल का पानी पहुंच चुका है। मुख्यमंत्री माणिक साहा ने विधानसभा सत्र के दौरान यह आंकड़े साझा करते हुए पुष्टि की कि 20 अगस्त 2026 तक राज्य के कुल 7,50,449 ग्रामीण परिवारों में से 6,47,437 परिवारों को सुरक्षित पेयजल नेटवर्क से सफलतापूर्वक जोड़ दिया गया है।
ग्राम पंचायतों में विस्तार और हालिया उपलब्धियां
यह जानकारी 13वीं त्रिपुरा विधानसभा के 10वें सत्र के दौरान BJP विधायक जहर चक्रवर्ती द्वारा पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए दी गई। राज्य सरकार की उपलब्धियों पर विस्तार से बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते तीन वर्षों के दौरान ही 1,91,106 ग्रामीण परिवारों को सुरक्षित पेयजल तक पहुंच प्रदान की गई है। पेयजल वितरण का यह नेटवर्क वर्तमान में राज्य भर की 1,193 ग्राम पंचायतों और विलेज कमेटियों तक फैल चुका है, जिससे दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में नल से जल पहुंचाया जा रहा है।
जल जीवन मिशन के तहत विकास का सफर
राज्य में पेयजल आपूर्ति बुनियादी ढांचे के विकास क्रम को रेखांकित करते हुए माणिक साहा ने जल जीवन मिशन के तहत हासिल की गई तेज प्रगति का जिक्र किया। जब 15 अगस्त 2019 को यह राष्ट्रीय योजना शुरू की गई थी, तब त्रिपुरा में केवल 3.24 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों के पास ही नल से जल आपूर्ति का कनेक्शन उपलब्ध था। इसके बाद नियोजित कार्यों के जरिए इस कवरेज में लगातार विस्तार हुआ, जिसके तहत 20 अगस्त 2023 तक 1,51,135 ग्रामीण परिवारों को नल का पानी मिलने लगा था और अब यह आंकड़ा वर्तमान ऊंचाई पर पहुंच गया है।
पहाड़ी इलाकों और एडीसी क्षेत्रों में विशेष उपाय
त्रिपुरा स्वायत्त जिला परिषद (ADC) क्षेत्रों, विशेष रूप से मुंगियाकामी ब्लॉक में पेयजल संकट के संबंध में TMP विधायक रंजीत देबबर्मा के पूरक प्रश्न का उत्तर देते हुए मुख्यमंत्री ने कुछ दुर्गम इलाकों में मौजूद समस्याओं को स्वीकार किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले पहाड़ी क्षेत्रों में पारंपरिक जलापूर्ति प्रणाली स्थापित करना काफी जटिल होता है, खास तौर पर उन स्थानों पर जहां प्राकृतिक जल स्रोत उपलब्ध नहीं हैं और ट्यूबवेल ड्रिलिंग संभव नहीं हो पाती है।
इन प्राकृतिक बाधाओं को दूर करने के लिए राज्य सरकार वैकल्पिक तरीकों को अपना रही है। इसके तहत पहाड़ी झरनों और धाराओं से जल एकत्र करके उसे पंपिंग प्रणाली के जरिए ऊंचाई वाले स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है ताकि वहां से स्थानीय वितरण किया जा सके। मुख्यमंत्री साहा ने बताया कि ADC क्षेत्रों में औसत जल कवरेज लगभग 80 प्रतिशत तक पहुंच गया है, हालांकि अलग-अलग स्थानों पर यह कवरेज 85 से 100 प्रतिशत के बीच है। राज्य सरकार गहरे और उथले ट्यूबवेल, जल शोधन संयंत्रों और नवोन्मेषी परियोजनाओं का उपयोग करके शेष सभी परिवारों तक 100 प्रतिशत नल जल कवरेज हासिल करने के लक्ष्य पर काम कर रही है।





















