रसोई में दूध गर्म करते समय ध्यान भटकते ही उसके उबलकर बर्तन से बाहर गिर जाने की समस्या लगभग हर घर में देखने को मिलती है। इससे न केवल गैस स्टोव गंदा होता है, बल्कि दूध की बर्बादी भी होती है। दूध के उबलने और बर्तन से बाहर निकलने के पीछे एक खास वैज्ञानिक प्रक्रिया काम करती है। यदि बर्तन के चुनाव, तापमान के नियंत्रण और भंडारण की सही तकनीक अपनाई जाए, तो दूध को गिरने से बचाने के साथ-साथ उसके पोषक तत्वों को भी सुरक्षित रखा जा सकता है।
सही बर्तन का चुनाव और उसकी सफाई
दूध को उफनने से रोकने के लिए सबसे पहली शर्त सही बर्तन का चयन करना है। हमेशा अपनी आवश्यकता से अधिक क्षमता वाले और गहरे बर्तन का उपयोग करें ताकि अंदर पर्याप्त खाली जगह बनी रहे। जब दूध गर्म होकर उबलने की स्थिति में पहुंचता है, तो उसमें झाग की ऊंची परत बनती है, जो छोटे बर्तन से तुरंत बाहर निकल जाती है। इसके साथ ही बर्तन की पूरी तरह सफाई होना अत्यंत आवश्यक है। यदि बर्तन में पुरानी गंदगी या चिकनाई लगी रह जाए, तो वह दूध को जमा सकती है या फाड़ सकती है। रसोई में दूध उबालने के लिए एक अलग बर्तन निर्धारित कर लेना सबसे बुद्धिमानी भरा कदम माना जाता है।
धातु की तासीर और आंच पर निगरानी
आप किस धातु के बर्तन का उपयोग कर रहे हैं, इसका सीधा असर दूध के गर्म होने की गति पर पड़ता है। तांबा, एल्युमिनियम और स्टेनलेस स्टील जैसे बर्तन कास्ट आयरन या भारी धातुओं की तुलना में बहुत तेजी से गर्म होते हैं। इससे समय की बचत तो होती है, लेकिन दूध के जलने और उफनने का जोखिम भी बढ़ जाता है। इसलिए दूध को हमेशा मध्यम आंच पर रखकर लगातार ध्यान देना चाहिए। जैसे-जैसे दूध गर्म होता है, उसकी ऊपरी सतह पर मलाई की चमकदार परत जमने लगती है। इसके बाद मलाई के नीचे बाहरी किनारों से छोटे-छोटे बुलबुले उठने शुरू होते हैं। जैसे ही किनारे पर बुलबुले दिखाई दें, तुरंत आंच धीमी कर देनी चाहिए।
तली में जलने से बचाव और भाप का विज्ञान
यदि बर्तन का तल समान रूप से गर्म नहीं होता, तो दूध नीचे चिपककर जलने लगता है। इस समस्या से बचने के लिए लकड़ी के चम्मच या गर्मी सहने वाले स्पैचुला की मदद से बर्तन की तली को खुरचते हुए हर दो मिनट में दूध को अच्छी तरह चलाते रहें। यदि आप समय बचाने के लिए तेज आंच पर दूध गर्म कर रहे हैं, तो बर्तन से नजर न हटाएं और जरूरत महसूस होते ही आंच कम करने के लिए तैयार रहें। दरअसल, उबलते समय मलाई की परत नीचे से उठने वाली भाप को रोक लेती है। यह भाप मलाई को झाग में बदल देती है, जो तेजी से ऊपर उठकर बर्तन से बाहर गिरता है। इसे रोकने के लिए आंच को तुरंत इतना कम करें कि दूध एक निश्चित गति से उबलता रहे और चम्मच से चलाकर झाग को तोड़ते रहें।
उबालने का सही समय और पोषक तत्वों की सुरक्षा
दूध में उबाल आने के बाद उसे लगातार हिलाते हुए केवल दो से तीन मिनट तक ही पकाना चाहिए। इतने समय का उबाल दूध में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म करके उसे पीने के लिए पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए पर्याप्त होता है। दूध को तीन मिनट से अधिक समय तक उबालते रहने से उसकी गुणवत्ता प्रभावित होती है और उसमें मौजूद महत्वपूर्ण पोषक तत्व नष्ट होने लगते हैं।
दूध का सही भंडारण और दोबारा उबालने के नियम
उबालने की प्रक्रिया पूरी होते ही दूध को तुरंत एक एयरटाइट यानी पूरी तरह बंद होने वाले डिब्बे में स्थानांतरित कर दें। इस डिब्बे को अपने घर के सबसे ठंडे स्थान पर या सीधे रेफ्रिजरेटर में रखें। यदि दूध को फ्रिज में स्टोर किया जाता है, तो उसे इस्तेमाल करने से पहले दोबारा उबालने की कोई आवश्यकता नहीं होती। हालांकि, यदि आप दूध को सामान्य कमरे के तापमान पर रखते हैं, तो हर बार सेवन या इस्तेमाल से पहले उसे दोबारा उबालना बेहद जरूरी होता है।



















