भारतीय मुक्केबाजी की दिग्गज एथलीट मैरी कॉम इन दिनों टेलीविजन के प्रसिद्ध रियलिटी शो बिग बॉस 20 का हिस्सा बनी हुई हैं। रिंग के भीतर अपने मुक्कों से दुनिया भर की दिग्गज प्रतिद्वंद्वियों को पस्त करने वाली इस चैंपियन खिलाड़ी ने शो के अंदर अपनी निजी जिंदगी के बेहद कठिन दौर को लेकर खुलकर बात की है। साथी प्रतिभागियों के साथ बातचीत के दौरान उन्होंने अपने पुराने दिनों की पीड़ा और भावनात्मक संघर्षों को साझा किया।
साथी प्रतिभागियों के सामने बयां की अपनी भावनात्मक पीड़ा
बिग बॉस 20 के घर में मौजूद कंटेस्टेंट ईशा रिखी, रीति तिवारी और कनिका मान से चर्चा करते हुए मैरी कॉम अत्यंत भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया उन्हें केवल मुक्केबाजी रिंग के भीतर दिखने वाली ताकत और आक्रामकता के लिए पहचानती है। हकीकत यह भी है कि जिंदगी में कई ऐसे दौर आए जब वह भीतर से पूरी तरह बिखर चुकी थीं।
अपनी जिंदगी के सबसे अंधकारमय मोड़ का जिक्र करते हुए मैरी कॉम ने बताया कि एक समय ऐसा भी आ गया था जब उन्होंने सब कुछ समाप्त करने का मन बना लिया था। वे पूरी तरह टूट गई थीं, लेकिन उस कठिन समय में अपने नन्हे बच्चों का चेहरा देखकर उन्होंने भीतर से हिम्मत जुटाई। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज वह सिर्फ और सिर्फ अपने बच्चों की खातिर जी रही हैं।
बचपन से लेकर करियर तक कुर्बानियों का लंबा सफर
अपने बीते दिनों को याद करते हुए मैरी कॉम ने बताया कि उनका बचपन बहुत सी कठिनाइयों और अभावों के बीच बीता। मुक्केबाजी में खुद को स्थापित करने और पहचान बनाने के लिए उन्होंने अपने परिवार, अपने राज्य और पूरे देश के लिए अनगिनत बड़ी कुर्बानियां दी हैं।
खेल के प्रति अपने समर्पण पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि जीतने की तीव्र ललक और भूख आज भी उनके भीतर जिंदा है। हालांकि, उम्र के इस पड़ाव पर होने के कारण अब उनके लिए प्रतिस्पर्धी मुकाबलों में उतरना संभव नहीं रह गया है। उन्होंने यह भी साझा किया कि पहले वे बहुत रोया करती थीं, लेकिन अब उन्होंने अपनी तकलीफों और आंसुओं को अपने भीतर ही दबाना सीख लिया है।
अभावों से निकलकर 6 बार विश्व चैंपियन बनने की अनूठी दास्तान
मैरी कॉम का खेल करियर भारतीय खेलों के इतिहास के सबसे प्रेरणादायक अध्यायों में गिना जाता है। उन्होंने छह बार वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप का स्वर्ण पदक अपने नाम कर इतिहास रच दिया। मणिपुर के मुक्केबाज डिंग्को सिंह की उपलब्धियों से प्रभावित होकर उन्होंने मुक्केबाजी की राह चुनी थी।
शुरुआती दौर में उनके पिता इस खेल के कड़े विरोधी थे और नहीं चाहते थे कि उनकी बेटी बॉक्सिंग में जाए। इस विरोध के बावजूद मैरी ने हार नहीं मानी और छुप-छुपकर ट्रेनिंग जारी रखी। भारी गरीबी, कड़े पारिवारिक विरोध और सीमित संसाधनों का डटकर मुकाबला करते हुए उन्होंने अपनी अथक मेहनत से वैश्विक मंच पर भारत का परचम लहराया।


















