उत्तर प्रदेश के बहराइच शहर में स्थित सालारगंज मोहल्ले की मोहताज खाना कॉलोनी का मुख्य प्रवेश द्वार इन दिनों बेहद खतरनाक मोड़ बन चुका है। मुख्य मार्ग पर बना नाला पिछले 6 महीनों से खुला पड़ा है, जिसका ऊपरी सुरक्षा पत्थर टूटकर पूरी तरह से नष्ट हो गया है। इस व्यस्त रास्ते से हर दिन हजारों स्थानीय नागरिक और राहगीर गुजरते हैं। सुरक्षा के कोई इंतजाम न होने की वजह से खुला हुआ नाला लगातार दुर्घटनाओं का कारण बन रहा है और स्थानीय लोग बेहद भयभीत वातावरण में आवाजाही करने को मजबूर हैं।
रोजाना आवाजाही में बढ़ा हादसों का जोखिम
मोहताज खाना कॉलोनी के इस रास्ते पर सुबह से लेकर देर रात तक लोगों का भारी दबाव रहता है। इस मार्ग का इस्तेमाल छोटे स्कूली बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग और कामकाजी लोग नियमित रूप से करते हैं। नाले का पत्थर कई महीनों से टूटा होने के कारण लोग अक्सर संतुलन खोकर इसमें गिर जाते हैं और चोटिल हो रहे हैं। पैदल चलने वालों के अलावा दोपहिया और तीनपहिया वाहन चालकों के लिए भी यह नाला बड़ी आफत बन गया है। मोटरसाइकिल सवार अचानक गड्ढा सामने आने से अनियंत्रित होकर गिर जाते हैं, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आ रही हैं। इसके साथ ही कॉलोनी में सवारियां ले जाने वाले ई-रिक्शा भी इस गहरे नाले में फंसकर पलट चुके हैं, जिससे उसमें बैठे यात्रियों को गंभीर शारीरिक चोटें पहुंची हैं।
अटल पार्क का सौंदर्यीकरण बनाम बदहाल जमीनी हकीकत
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगर पालिका और स्थानीय प्रशासन की दोहरी नीति इस इलाके में साफ दिखाई दे रही है। प्रशासन ने पास ही स्थित मैदान में हाल ही में अटल पार्क का निर्माण करवाया है, जिसके जरिए क्षेत्र के कायाकल्प और सौंदर्यीकरण के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। हालांकि, पार्क के ठीक बगल में मौजूद इस अत्यंत जर्जर और जानलेवा नाले पर किसी भी अधिकारी का ध्यान नहीं जा रहा है। एक तरफ खूबसूरत पार्क और दूसरी तरफ खुला हुआ नाला, स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। दिन के उजाले में तो राहगीर जैसे-तैसे बचते-बचाते या नाले को लांघकर निकल जाते हैं, लेकिन असली आफत रात के समय आती है। पर्याप्त स्ट्रीट लाइट और रोशनी की व्यवस्था न होने के कारण अंधेरे में यह गड्ढा दिखाई नहीं देता, जिससे हर पल किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है।
जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की बेरुखी से नाराजगी
सालारगंज और मोहताज खाना कॉलोनी के निवासियों का कहना है कि उन्होंने इस विकट समस्या को लेकर जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों को कई बार लिखित और मौखिक रूप से सूचित किया है। इसके बावजूद अब तक इस समस्या का कोई स्थाई समाधान नहीं निकाला गया है और न ही नाले पर नया पत्थर रखवाया गया है। लोगों का कहना है कि प्रशासन शायद किसी बड़े और जानलेवा हादसे का इंतजार कर रहा है। स्थानीय नागरिकों ने पुरजोर मांग की है कि प्रशासन बिना किसी देरी के नाले के टूटे पत्थर की मरम्मत करवाए और इसे मजबूत ढक्कन से ढकवाए, ताकि रोजाना हो रहे इन हादसों पर लगाम लग सके और क्षेत्रवासियों को राहत मिल सके।



















