अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दान की रकम में हेराफेरी के मामले की जांच अब और तेज हो गई है। पहले गिरफ्तार किए गए आरोपी अविनाश शुक्ला से रिमांड के दौरान हुई पूछताछ में पुलिस के हाथ कई अहम सुराग लगे हैं, और अब जांच का दायरा बढ़ाते हुए पुलिस ने तीन और लोगों को हिरासत में लेने की तैयारी कर ली है। इनमें लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा और रामाशंकर यादव उर्फ टिन्नू शामिल हैं।
अविनाश की रिमांड से मिले सुराग, अब नई रिमांड की अर्जी
पुलिस ने न्यायालय में कुछ और आरोपियों से पूछताछ के लिए रिमांड एप्लीकेशन दाखिल कर दी है। इससे पहले पुलिस ने 48 घंटे की रिमांड मांगी थी, लेकिन न्यायालय ने अविनाश शुक्ला को 13 घंटे की रिमांड पर भेजा। इस छोटी अवधि में ही जांच टीम को मामले से जुड़े कई अहम सुराग मिल गए। सूत्रों की मानें तो इन्हीं नई जानकारियों के आधार पर पुलिस जल्द ही लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा और रामाशंकर यादव उर्फ टिन्नू को भी रिमांड पर लेकर पूरे गबन की परतें खोलने की कोशिश करेगी।
रिमांड के दौरान अविनाश से कई चरणों में पूछताछ हुई। इसी बीच उसे मंदिर परिसर की 45 दिनों की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग दिखाई गई। कैमरे में खुद को चढ़ावे से पैसे निकालते देखने के बाद अविनाश ने कथित तौर पर कबूल किया कि वह लंबे समय से यह काम कर रहा था। उसके मुताबिक चोरी की रकम सभी आरोपियों में बराबर बांटी जाती थी, हालांकि कई बार कुछ लोग ज्यादा हिस्सा भी ले जाते थे, लेकिन पूरे खेल में टिन्नू का दबदबा बना रहता था। विवेचना अभिलेखों में छह आरोपियों से जुड़ी नकदी और आभूषणों की बरामदगी का विस्तार से ब्योरा दर्ज है, और पुलिस अब मामले की एक-एक कड़ी को जोड़ने में लगी है।
रोज़ाना जमा में तेज उछाल, बैंककर्मी भी घेरे में
जांच के बीच सबसे चौंकाने वाली बात सामने आई है मंदिर के खातों में जमा होने वाली रकम को लेकर। राम मंदिर के खातों में दैनिक जमा राशि पहले जहां 16 से 18 लाख रुपये थी, वह अब बढ़कर 24 से 26 लाख रुपये तक पहुंच गई है। एसआईटी को पहले हर रोज़ करीब 6 से 8 लाख रुपये की कथित हेराफेरी की आशंका थी। कैश की गिनती और बैंक में जमा करने की प्रक्रिया कड़ी होते ही जमा रकम में लगभग 6 से 8 लाख रुपये का सीधा उछाल आ गया, जो पहले की गड़बड़ी की ओर इशारा करता है।
इस मामले में एसबीआई मैनेजर समेत 10 बैंककर्मियों से पूछताछ की जा चुकी है और लेनदेन के रिकॉर्ड जब्त कर लिए गए हैं। दो से तीन लोगों की भूमिका जांच के दायरे में है। कैश की गणना संभालने वाले बैंक कर्मचारी गगनदीप और रत्नेश की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है।
एसआईटी के सामने कैशियर का बयान
राम मंदिर चढ़ावा चोरी की जांच कर रही एसआईटी के सामने एक ऐसे कैशियर ने भी बयान दर्ज कराया है, जो रोज़ाना आरोपियों के साथ ड्यूटी करता था। करीब 30 मिनट चली पूछताछ में एसआईटी ने उससे मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था, गिनती की प्रक्रिया, आरोपियों के व्यवहार और पूरे सिस्टम से जुड़े कई अहम सवाल पूछे। यह बयान मंदिर परिसर के भीतर बने ग्रीन हाउस में दर्ज किया गया।
अयोध्या पुलिस में फेरबदल
मामले के बीच अयोध्या के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. गौरव ग्रोवर ने तीन डीएसपी यानी सीओ के कार्यक्षेत्र में अहम बदलाव किया है। गैर-जनपद तबादला होने के चलते अब तक सीओ रुदौली की जिम्मेदारी संभाल रहे आशीष निगम को कार्यमुक्त कर दिया गया है। उनकी जगह सीओ सदर रहे अरविंद सोनकर को नया सीओ रुदौली बनाया गया है। प्रतीक कुमार को सीओ सदर की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि राजू निषाद को राम जन्मभूमि परिसर की अहम सुरक्षा व्यवस्था में तैनात किया गया है।
राम जन्मभूमि को मिला नया एसपी सुरक्षा
राम जन्मभूमि मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था में भी बड़ा बदलाव हुआ है। पीएसी में तैनात विजय शंकर मिश्रा शनिवार को राम जन्मभूमि के नए एसपी सुरक्षा के रूप में पदभार संभालेंगे। वह शुक्रवार दोपहर ही अयोध्या पहुंच चुके हैं। इससे पहले 25 मई को तत्कालीन एसपी सुरक्षा बलरामाचारी दुबे का तबादला कर दिया गया था। एसपी सुरक्षा का पद मंदिर की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा व्यवस्था का नोडल प्रभारी माना जाता है, यानी अब मंदिर परिसर की सुरक्षा की निगरानी और समन्वय की जिम्मेदारी विजय शंकर मिश्रा के कंधों पर होगी।
6 जुलाई की ट्रस्ट बैठक और वायरल पत्र
अयोध्या में 6 जुलाई को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक मणिराम दास छावनी में दोपहर 3 बजे ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास की अध्यक्षता में होगी। यह चढ़ावा चोरी प्रकरण सामने आने के बाद ट्रस्ट की पहली औपचारिक बैठक होगी। बैठक में महासचिव चंपत राय और न्यासी डॉ. अनिल मिश्र के इस्तीफों पर चर्चा के साथ फैसला लिया जा सकता है। इसके अलावा एसआईटी की अंतरिम रिपोर्ट भी ट्रस्ट के सामने रखी जाएगी, और वित्त वर्ष 2025-26 के आय-व्यय, मंदिर प्रबंधन तथा अन्य प्रशासनिक मुद्दों पर भी विस्तार से बातचीत होगी। बैठक का एजेंडा भी जारी हो चुका है, जिसे अध्यक्ष की अनुमति से कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने पांच सूत्री रूप में बुलाया है।
इसी बैठक को लेकर एक पत्र सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ है, जिसमें दोपहर 3 बजे मणिराम दास छावनी में बैठक का दावा किया गया है। पत्र में चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा के कथित इस्तीफों, एसआईटी की अंतरिम रिपोर्ट और वित्तीय विवरण पर चर्चा का जिक्र है। हालांकि इस पत्र की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए इसके दावों को तब तक सही नहीं माना जाना चाहिए जब तक उनकी औपचारिक पुष्टि न हो जाए।
संत समाज चंपत राय के समर्थन में उतरा
दान गबन मामले को लेकर संत समाज ने संयुक्त प्रेसवार्ता कर महासचिव चंपत राय के समर्थन में आवाज उठाई। संतों ने कहा कि एसआईटी की जांच पूरी होने तक किसी को दोषी ठहराना उचित नहीं है और चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पूरे ट्रस्ट को छोड़कर सिर्फ चंपत राय को निशाना बनाना गलत है। संतों ने आय-व्यय की जिम्मेदारी कोषाध्यक्ष की बताते हुए उनकी भूमिका पर भी सवाल खड़े किए। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और एसआईटी जांच पर भरोसा जताया और कहा कि दोषियों पर कार्रवाई जरूर हो, लेकिन निष्पक्ष जांच पूरी होने के बाद।
कांग्रेस ने मांगी बहु-एजेंसी फोरेंसिक जांच
यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और बहु-एजेंसी फोरेंसिक जांच की मांग की है। उन्होंने चढ़ावे, भूमि खरीद, निर्माण खर्च और पूरे मनी ट्रेल की निष्पक्ष, वैज्ञानिक और समयबद्ध जांच की अपील की है। श्रद्धालुओं की आस्था और सार्वजनिक धन की पारदर्शिता को सबसे ऊपर बताते हुए कांग्रेस ने सीसीटीवी रिकॉर्ड, डिजिटल डेटा, बैंक खातों, जीएसटी, टीडीएस, आयकर रिकॉर्ड और ऑडिट रिपोर्ट की भी गहन जांच की मांग रखी। पार्टी ने कहा कि जरूरत पड़ने पर मामले की जांच ED समेत अन्य सक्षम एजेंसियों से भी कराई जाए।
दिग्विजय सिंह की पदयात्रा और बयान पर बवाल
अयोध्या के चढ़ावा चोरी को लेकर मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने बड़ा ऐलान किया है। वह 2 अक्टूबर से उज्जैन के महाकाल मंदिर से अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि तक करीब 1000 किलोमीटर की पदयात्रा शुरू करेंगे। उन्होंने साफ कहा कि इस यात्रा में कांग्रेस का प्रचार नहीं होगा और यात्रा के दौरान वह फेसबुक, एक्स समेत किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल नहीं करेंगे।
दूसरी ओर, दिग्विजय सिंह के राम मंदिर और प्राण प्रतिष्ठा को लेकर दिए गए बयान पर संत समाज ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। महंत कल्कि राम ने कहा कि कांग्रेस को राम मंदिर के मुद्दे पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। महंत सत्येंद्र दास वेदांती ने बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताया, वहीं संत सीताराम दास ने भी कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि आस्था से जुड़े विषयों पर इस तरह की बयानबाजी उचित नहीं है। संतों ने कहा कि राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और इस पर विवादित टिप्पणियां स्वीकार नहीं की जाएंगी।
इसके अलावा समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के काशी दौरे और हिंदुत्व की राजनीति पर भी अयोध्या के संतों ने प्रतिक्रिया दी। संत समाज ने इसे 2027 विधानसभा चुनाव से पहले की राजनीतिक रणनीति बताते हुए कहा कि सिर्फ मंदिरों के दर्शन करने से जनता भ्रमित नहीं होगी। संतों का कहना था कि सनातनी समाज सपा का पुराना रुख अच्छी तरह जानता है और हिंदुत्व पर उसकी राजनीति सफल नहीं होगी। उन्होंने सपा-कांग्रेस गठबंधन पर भी निशाना साधते हुए दावा किया कि इससे विपक्ष को ही नुकसान होगा।
आरोपियों के मकान पर बुलडोजर की तैयारी
अयोध्या विकास प्राधिकरण यानी ADA ने चढ़ावा चोरी के आरोपी लवकुश मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा के नए मकान पर बुलडोजर चलाने की तैयारी कर ली है। ADA ने लवकुश की पत्नी सुप्रिया मिश्रा को नोटिस भी जारी किया है। हालांकि लवकुश की पत्नी का कहना है कि उन्हें कोई नोटिस नहीं मिला है और उनके मकान का नक्शा पास है। उन्होंने कहा कि वह बस यही चाहती हैं कि उनके पति घर लौट आएं और भगवान से यही प्रार्थना है कि उन्हें कुछ न हो।
पहली बार आरएसएस का बयान
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने शुक्रवार को पहली बार बयान दिया। सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने वीडियो जारी कर कहा कि रामलला मंदिर में रखे दानपात्रों की रकम की चोरी दुर्भाग्यपूर्ण है और इससे रामभक्तों की भावनाओं तथा श्रद्धा को गहरा आघात पहुंचा है। उन्होंने कहा कि एसआईटी जांच में जो भी दोषी पाए जाएं, उन्हें कठोर दंड मिलना चाहिए।
बहराइच दरगाह भी सवालों के घेरे में
इसी बीच बहराइच स्थित सालार मसूद गाजी दरगाह एक बार फिर सुर्खियों में है। दरगाह कमेटी पर चढ़ावे और वित्तीय लेनदेन में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। जिला प्रशासन की जांच में सामने आया कि कमेटी पिछले 10 वर्षों के वित्तीय रिकॉर्ड ही पेश नहीं कर सकी। स्थानीय लोगों ने 20 वर्षों से ऑडिट न होने का दावा करते हुए 100 करोड़ रुपये से अधिक के चढ़ावे में गड़बड़ी की आशंका जताई है और मुख्यमंत्री से SIT जांच की मांग की है।
दान के आभूषण संग्रहालय में रखने का सुझाव
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी ने कहा कि इसे चंदा नहीं, बल्कि चढ़ावा या दक्षिणा कहा जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि श्रद्धालुओं के दान में मिले आभूषणों को गलाने के बजाय संग्रहालय में सुरक्षित रखा जाए और मंदिरों में वैदिक परंपरा के अनुरूप पूजा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।













