उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को राज्य के नागरिकों को संबोधित करते हुए एक विशेष पत्र साझा किया, जिसमें उन्होंने आगामी अयोध्या दीपोत्सव के गहरे सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपने परिवारों और सगे-संबंधियों के साथ इस अलौकिक उत्सव का साक्षी बनने का आह्वान किया। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ने समाज के समर्थ लोगों से आग्रह किया कि वे अपने आस-पड़ोस के वंचित और जरूरतमंद परिवारों के साथ खुशियां बांटें और स्थानीय कारीगरों द्वारा बनाए गए दीयों व हस्तशिल्प उत्पादों को खरीदकर उनके स्वावलंबन को सशक्त सहारा दें।
सांस्कृतिक पुनर्जागरण और आस्था से विकास का प्रतीक
अयोध्या धाम में आयोजित होने वाले दसवें भव्य दीपोत्सव की महत्ता स्पष्ट करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सप्तपुरियों में श्रेष्ठ यह पावन नगरी इस ऐतिहासिक आयोजन के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार है। उनके अनुसार, यह आयोजन केवल पारंपरिक दीप प्रज्वलन तक सीमित नहीं है, बल्कि अंधकार पर प्रकाश, निराशा पर आशा और आस्था के माध्यम से विकास की नई राह प्रशस्त करने का एक विराट माध्यम है। मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि दीप की एक छोटी सी लौ हमें यह सीख देती है कि घने अंधकार के बीच भी प्रकाश की एक किरण जीवन में नई उम्मीद और ऊर्जा भर सकती है। भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन के पावन अवसर पर उन्होंने सभी नागरिकों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं और इसे भारत के सांस्कृतिक गौरव तथा सनातन चेतना के पुनर्जागरण का पर्व बताया।
भरत के त्याग की मिसाल और सत्ता के दायित्व का बोध
सार्वजनिक जीवन में मर्यादा और समर्पण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने रामायण के एक अत्यंत प्रेरक प्रसंग का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 14 वर्षों की लंबी अवधि तक भरत ने समस्त राजसुख का त्याग कर दिया था और प्रभु श्रीराम की चरण पादुकाओं को सिंहासन पर प्रतिष्ठित कर अयोध्या के शासन का संचालन किया था। इस ऐतिहासिक उदाहरण का जिक्र करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि सत्ता का वास्तविक अर्थ निजी अधिकार अथवा शक्ति का प्रदर्शन नहीं, बल्कि जनता के प्रति एक पावन दायित्व का निर्वहन है। उन्होंने कहा कि अयोध्या का यह दीपोत्सव त्याग, मर्यादा और समर्पण के इन्हीं शाश्वत जीवन-मूल्यों को वैश्विक मंच पर गौरव के साथ पुनर्स्थापित कर रहा है।
सरयू तट की जगमगाहट और अलौकिक आकाशीय प्रस्तुतियां
दीपोत्सव के विहंगम दृश्य का वर्णन करते हुए पत्र में बताया गया कि मां सरयू के तट पर सजी अनंत दीपमाला और राम की पैड़ी पर प्रज्वलित होने वाले लाखों दीपों का सौंदर्य ऐसा प्रतीत होता है मानो आकाशगंगा स्वयं धरती पर उतर आई हो। इस भव्य वातावरण में आधुनिक तकनीक का समागम करते हुए ड्रोन के जरिए शानदार आकाशीय प्रस्तुतियां आयोजित की जा रही हैं। इसके अलावा विभिन्न क्षेत्रों से आए कलाकारों की सांस्कृतिक सहभागिता इस पूरे महोत्सव को एक अलौकिक और अविस्मरणीय भव्यता प्रदान करती है, जिसे देखने के लिए देश-विदेश से लोग खिंचे चले आते हैं।
उत्सव प्रदेश के रूप में नई पहचान और स्थानीय अर्थव्यवस्था को संबल
राज्य के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि जनसहभागिता और आस्था को प्रगति की शक्ति में बदलकर उत्तर प्रदेश ने अब उत्सव प्रदेश के रूप में अपनी मजबूत पहचान स्थापित कर ली है। उन्होंने विकास की एक स्पष्ट श्रृंखला प्रस्तुत करते हुए कहा कि जहां प्रकाश होता है, वहां स्वतः सुरक्षा का वातावरण बनता है; सुरक्षा की उपस्थिति से निवेश के द्वार खुलते हैं; निवेश आने से समग्र विकास होता है; और विकास के परिणामस्वरूप रोजगार तथा समृद्धि का विस्तार होता है। यही विचार इस उत्सवधर्मिता का मूल आधार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दीपोत्सव वास्तव में आस्था और अर्थव्यवस्था का एक अनोखा संगम है, जिससे कुम्हारों, मिट्टी के दीये बनाने वाले कारीगरों, फूल बेचने वालों, होटल व्यवसायियों और छोटे दुकानदारों के व्यापार में भारी वृद्धि होती है तथा आय के नए अवसर सृजित होते हैं।
वंचितों के साथ दीवाली मनाने और स्वच्छता की अपील
मुख्यमंत्री ने समाज के प्रत्येक नागरिक से संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि पड़ोस में कोई ऐसा परिवार है जिसके पास संसाधनों की कमी है, तो लोग अपने सामर्थ्य के अनुसार उसकी दीवाली को भी जगमग करें। उन्होंने जरूरतमंदों को दीये, मिठाइयां और नए वस्त्र भेंट करने का सुझाव देते हुए कहा कि दूसरों के जीवन में खुशियों का संचार करना ही दीपोत्सव की असली और सच्ची भावना है। युवाओं को विशेष रूप से प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा कि वे दीपक की भांति सकारात्मक ऊर्जा आत्मसात करें, हर प्रकार की नकारात्मकता से दूर रहें और अपने परिवेश में स्वच्छता बनाए रखें, क्योंकि स्वच्छता के वातावरण में ही वास्तविक समृद्धि का वास होता है। इसके साथ ही, स्थानीय हुनरमंदों के परिश्रम का सम्मान करते हुए उनके उत्पाद खरीदने पर विशेष बल दिया गया।
परिवार सहित अयोध्या आने का खुला आमंत्रण
अपने संदेश के समापन में मुख्यमंत्री ने सभी लोगों से सपरिवार अयोध्या आकर इस अद्वितीय उत्सव का प्रत्यक्षदर्शी बनने की हार्दिक अभिलाषा व्यक्त की। उन्होंने प्रार्थना की कि हर घर में खुशहाली आए, प्रत्येक मन में आपसी सद्भाव और प्रेम बना रहे तथा संपूर्ण राज्य और देश का प्रगति पथ निरंतर प्रशस्त होता रहे। उन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जयघोष के साथ अपने संदेश को पूर्ण विराम दिया।



















