डेयरी व्यवसाय और पशुपालन के क्षेत्र में उच्च दुग्ध उत्पादन वाली नस्लों को लेकर पशुपालकों का नजरिया तेजी से बदल रहा है। पारंपरिक पशुपालन की जगह अब ऐसी उन्नत किस्मों पर ध्यान दिया जा रहा है जो सामान्य मवेशियों की तुलना में कहीं अधिक दुग्ध उत्पादन क्षमता रखती हैं। इसी कड़ी में मुर्रा नस्ल की भैंस किसानों और पशुपालकों के बीच समृद्धि का प्रतीक बनकर उभर रही है। अधिक दूध देने और संतानों की भारी बाजार मांग के कारण इसे कई राज्यों में काला सोना भी कहा जाता है। वाराणसी समेत पूरे पूर्वांचल के विभिन्न जनपदों में इस प्रजाति को पालने का चलन काफी तेजी से बढ़ रहा है।
पंजाब की प्रमुख पहचान अब अन्य राज्यों में भी लोकप्रिय
भौगोलिक दृष्टि से मुर्रा भैंस मूल रूप से पंजाब में पाई जाने वाली एक अत्यंत प्रमुख और विख्यात प्रजाति है। हालांकि अब यह केवल अपने मूल क्षेत्र तक ही सीमित नहीं रह गई है, बल्कि उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों सहित देश के कई अन्य राज्यों में भी पशुपालक अपनी आय बढ़ाने के उद्देश्य से इसका पालन कर रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह अकेली भैंस दो सामान्य भैंसों के बराबर दुग्ध उत्पादन करने में सक्षम है। यही वजह है कि इसे पालकर किसान अपनी दैनिक और मासिक कमाई में भारी इजाफा कर पा रहे हैं।
प्रतिदिन 35 लीटर तक उत्पादन और संतानों की लाखों में कीमत
पशुपालक गुड्डू आजमगढ़ी के अनुसार उनके डेरे पर सैकड़ों गाय और भैंसें मौजूद हैं, लेकिन उनमें मुर्रा भैंस की क्षमता सबसे असाधारण है। यह भैंस सुबह और शाम दोनों वक्त मिलाकर लगभग 16 से 18 लीटर तक दूध उपलब्ध कराती है, जिससे 24 घंटे के भीतर इसका कुल दुग्ध उत्पादन 35 लीटर तक पहुंच जाता है। यह उत्पादन स्तर सामान्य मवेशियों की तुलना में लगभग दोगुना बैठता है। देखभाल के स्तर पर इसे अन्य भैंसों की भांति ही सामान्य रखरखाव की जरूरत होती है, बशर्ते समय पर संतुलित आहार और पर्याप्त पानी उपलब्ध कराया जाए। उचित देखरेख मिलने पर यह भीषण गर्मी के मौसम में भी भारी मात्रा में दूध देती है।
दूध के अतिरिक्त मुर्रा नस्ल की संतानों की बाजार में भारी मांग और कीमत देखने को मिलती है। गुड्डू आजमगढ़ी ने जानकारी दी कि उनकी इस भैंस ने अब तक दो बच्चों को जन्म दिया है। बाजार में मुर्रा भैंस की कटिया अथवा पाड़ी की शुरुआती कीमत लगभग ढाई लाख रुपये के आसपास होती है, जबकि कई मौकों पर पशुपालकों को इससे भी अधिक रकम हासिल हो जाती है। भारी मात्रा में गुणवत्तापूर्ण दूध देने की क्षमता के चलते ही इसे दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में सर्वोत्कृष्ट नस्ल का दर्जा हासिल है।
प्रतियोगिताओं में जीतीं कई ट्रॉफियां और ढाई लाख का नकद इनाम
यह विशेष मुर्रा भैंस अपनी शारीरिक बनावट और दुग्ध क्षमता के दम पर विभिन्न राज्यों में आयोजित पशु मेलों और प्रतियोगिताओं में कई प्रतिष्ठित ट्रॉफियां भी जीत चुकी है। हाल ही में वाराणसी के भीतर आयोजित ‘रंगीलो’ मेले में इसने दुग्ध प्रतियोगिता के दौरान पहला स्थान हासिल किया और ढाई लाख रुपये का नकद पुरस्कार अपने नाम किया। प्रतियोगिता स्थल तक पहुंचने के लंबे सफर और थकान के बावजूद इस भैंस ने वहां 30 लीटर दूध दिया, जबकि सामान्य और शांत दिनों में इसका दैनिक उत्पादन 35 से 36 लीटर तक दर्ज किया जाता है।
























