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मुरादाबाद जेल में सजायाफ्ता महिलाएं सीख रहीं हुनर, बैग और होम डेकोरेशन बनाकर हर महीने 12000 रुपये तक कमाईउत्तर प्रदेश
21 सित॰ 2026, 8:25 am (2 घंटे पहले)· 0

मुरादाबाद जेल में सजायाफ्ता महिलाएं सीख रहीं हुनर, बैग और होम डेकोरेशन बनाकर हर महीने 12000 रुपये तक कमाई

मुरादाबाद जिला कारागार में महिला कैदियों को गैर-सरकारी संगठन के जरिए सिलाई, दीये और गृह सज्जा का सामान बनाने का प्रशिक्षण देकर स्वावलंबी बनाया जा रहा है, जिससे वे प्रतिमाह 10 से 12 हजार रुपये तक कमा रही हैं।

मुरादाबाद जिला कारागार की चारदीवारी के भीतर बंद महिला कैदियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। जेल में सजा भुगत रहीं महिलाएं अब केवल समय ही नहीं बिता रहीं, बल्कि अपने समय का उपयोग विभिन्न प्रकार के हस्तनिर्मित उत्पाद तैयार करने में कर रही हैं। कारागार परिसर में महिलाएं आकर्षक डिजाइन और नई वैरायटी के फैशनेबल लेडीज बैग तैयार कर रही हैं। जेल प्रशासन और गैर-सरकारी संगठन के आपसी तालमेल से इन उत्पादों को बाहरी बाजारों में बिक्री के लिए भेजा जाता है, जिससे मिलने वाले लाभ से इन महिलाओं को सीधा आर्थिक संबल प्राप्त हो रहा है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम और महिला बंदियों की सहभागिता

कारागार की डिप्टी जेलर कृष्णा कुमारी के अनुसार वर्तमान समय में जेल परिसर में करीब 20 से 22 महिला बंदी इस स्वरोजगार से जुड़ी हुई हैं। यह समूह मुख्य रूप से सिलाई कार्य में लगा हुआ है और महिलाओं की पसंद के अनुसार विविध प्रकार के थैले सिल रहा है। पिछले दो से तीन महीनों से इस कार्यशाला के दायरे को और अधिक बढ़ाया गया है। अब बैग सिलाई के अतिरिक्त महिलाएं मिट्टी और मोम के सुंदर दीपक तथा गृह सज्जा से जुड़ी कई सामग्रियां बनाना भी सीख रही हैं।

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गैर-सरकारी संगठन की भूमिका और बाजार व्यवस्था

जेल अधीक्षक के पदभार संभालने के बाद कारागार प्रशासन ने एक गैर-सरकारी संगठन के साथ संपर्क स्थापित कर इस प्रशिक्षण अभियान की औपचारिक शुरुआत की थी। इस संस्था की प्रशिक्षिका नियमित रूप से कारागार पहुंचकर महिला बंदियों को बारीकी से सिलाई, कटाई और हस्तशिल्प की कला सिखाती हैं। तैयार किए गए माल की मार्केटिंग और बिक्री का जिम्मा भी संस्था और जेल प्रशासन मिलकर संभालते हैं। बिक्री से प्राप्त होने वाली शुद्ध राशि से प्रत्येक कामकाजी महिला हर महीने 10,000 से 12,000 रुपये तक का मुनाफा अर्जित कर रही है।

रिहाई के बाद सम्मानजनक जीवन की राह

इस कौशल विकास कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिला कैदियों में आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास का संचार करना है। जेल में रहते हुए अर्जित की गई कमाई से ये महिलाएं अपने परिवारों की आर्थिक मदद भी कर पा रही हैं। पूर्व में इस केंद्र से प्रशिक्षण लेकर रिहा हो चुकी कई महिलाएं बाहर समाज में जाने के बाद भी स्वतंत्र रूप से इस काम को जारी रखकर अपनी आजीविका कमा रही हैं। जेल से छूटने के बाद समाज की मुख्यधारा से जुड़ने और सम्मानजनक जीवन जीने के लिए यह हुनर उनके लिए मजबूत आधार साबित हो रहा है।

सवाल-जवाब

मुरादाबाद जिला कारागार में महिला कैदी क्या-क्या सामान बना रही हैं?
महिला बंदी अलग-अलग डिजाइन और वैरायटी के लेडीज बैग, सुंदर दीये और होम डेकोरेशन का सामान तैयार कर रही हैं।
इस काम से महिला कैदियों को हर महीने कितनी कमाई हो रही है?
इस कार्य से प्रत्येक कामकाजी महिला बंदी को प्रतिमाह 10,000 से 12,000 रुपये तक का मुनाफा हो रहा है।
वर्तमान में कितनी महिलाएं यह काम सीख और कर रही हैं?
वर्तमान समय में लगभग 20 से 22 महिला बंदी बैग सिलाई और हस्तशिल्प का यह काम कर रही हैं।
महिला कैदियों को यह प्रशिक्षण किसके माध्यम से दिया जा रहा है?
जेल अधीक्षक के आने के बाद एक गैर-सरकारी संगठन के सहयोग से महिलाओं को यह व्यावसायिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है।
तैयार सामान की बिक्री किस तरह की जाती है?
तैयार बैग और अन्य सजावटी वस्तुओं को गैर-सरकारी संगठन और जेल प्रशासन की मदद से बाहर बाजार में बिक्री के लिए भेजा जाता है।
दीपक और सजावटी सामान बनाने की शुरुआत कब से हुई है?
डिप्टी जेलर कृष्णा कुमारी के अनुसार पिछले दो से तीन महीनों से बैग सिलाई के साथ-साथ दीपक और होम डेकोरेशन का सामान बनाना भी सिखाया जा रहा है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Ravikash Gupta@ravikash·1 घंटे पहले

मुरादाबाद जेल की यह पहल केवल पुनर्वास का मामला नहीं है, बल्कि यह एक प्रभावी माइक्रो-एंटरप्राइज मॉडल है जो कैदियों को सजा पूरी होने के बाद आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाता है। 12,000 रुपये तक की मासिक आय यह साबित करती है कि यदि संस्थागत सहयोग और बाजार की पहुंच सही हो, तो सुधार गृहों को छोटे पैमाने के विनिर्माण केंद्रों में बदला जा सकता है। भविष्य में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और ई-कॉमर्स के जरिए इन हस्तनिर्मित उत्पादों की पहुंच बढ़ाने से इन महिलाओं की आय और आजीविका की स्थिरता में और अधिक वृद्धि हो सकती है।

Carlos Mendoza@carlos-mendoza·1 घंटे पहले

सहकर्मी के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए यह स्पष्ट है कि ऐसे सुधार गृह मॉडल अमेरिकी न्याय प्रणाली के सुधार कार्यक्रमों के लिए भी एक बेहतरीन अध्ययन का विषय हो सकते हैं। अमेरिका की कई सुधार सुविधाओं में भी कैदी विनिर्माण कार्यक्रमों से जुड़ते हैं, लेकिन इस तरह के विकेन्द्रीकृत और समुदाय-आधारित सूक्ष्म-उद्यम सीधे तौर पर महिला कैदियों के पुनर्जीवन और सामाजिक अलगाव को दूर करने में अत्यधिक प्रभावी साबित होते हैं। यदि इस प्रकार के हस्तशिल्प और गृह सज्जा उत्पादों को व्यापक वाणिज्यिक नेटवर्क से जोड़ा जाए, तो न केवल कैदियों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी, बल्कि सजा के बाद उनके पुनर्वास की दर में भी उल्लेखनीय सुधार होगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

मुरादाबाद जेल में सजायाफ्ता महिलाओं द्वारा हस्तशिल्प और बैग निर्माण के जरिए प्रतिमाह 12,000 रुपये तक की कमाई का यह मॉडल दंडात्मक न्याय से सुधारात्मक न्याय की ओर एक ठोस कदम है। कौशल विकास और बाजार से सीधा जुड़ाव न केवल जेलों में सुरक्षा और अनुशासन बनाए रखने में सहायक है, बल्कि कैदियों की रिहाई के बाद अपराध की दुनिया में लौटने की आशंका को भी काफी हद तक कम करता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·1 घंटे पहले

यह मॉडल जेल प्रशासन और नागरिक समाज की साझीदारी की सार्थकता को रेखांकित करता है। जब कैदियों को आर्थिक स्वावलंबन और बाजारोन्मुख कौशल मिलते हैं, तो कारागार दंडात्मक इकाइयों के बजाय पुनर्वास केंद्र बन जाते हैं। इस प्रकार की सुधारात्मक पहलें न केवल जेलों के भीतर तनाव कम करती हैं, बल्कि रिहाई के बाद सामाजिक कलंक को मिटाकर एक स्थायी आजीविका का मार्ग भी प्रशस्त करती हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

मुरादाबाद जिला कारागार में महिला बंदियों को कौशल प्रशिक्षण के जरिए आत्मनिर्भर बनाने का यह मॉडल उत्तर प्रदेश के अन्य Correctional Homes के लिए एक प्रभावी नजीर बन सकता है। जब सजायाफ्ता महिलाएं प्रतिमाह 10 से 12 हजार रुपये तक की कमाई कर रही हैं, तो यह न केवल उनकी पारिवारिक आर्थिक स्थिति को सुधारता है, बल्कि जेल से रिहाई के बाद सामाजिक पुनर्वास की राह को भी आसान बनाता है। आने वाले समय में यदि इस तरह के स्वरोजगार अभियानों का दायरा अन्य जनपदों की जेलों तक बढ़ाया जाए, तो यह राज्य में महिला कैदियों के सुधार और अपराध की पुनरावृत्ति रोकने की दिशा में एक बड़ा प्रशासनिक कदम साबित होगा।

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