मुरादाबाद जिला कारागार की चारदीवारी के भीतर बंद महिला कैदियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। जेल में सजा भुगत रहीं महिलाएं अब केवल समय ही नहीं बिता रहीं, बल्कि अपने समय का उपयोग विभिन्न प्रकार के हस्तनिर्मित उत्पाद तैयार करने में कर रही हैं। कारागार परिसर में महिलाएं आकर्षक डिजाइन और नई वैरायटी के फैशनेबल लेडीज बैग तैयार कर रही हैं। जेल प्रशासन और गैर-सरकारी संगठन के आपसी तालमेल से इन उत्पादों को बाहरी बाजारों में बिक्री के लिए भेजा जाता है, जिससे मिलने वाले लाभ से इन महिलाओं को सीधा आर्थिक संबल प्राप्त हो रहा है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम और महिला बंदियों की सहभागिता
कारागार की डिप्टी जेलर कृष्णा कुमारी के अनुसार वर्तमान समय में जेल परिसर में करीब 20 से 22 महिला बंदी इस स्वरोजगार से जुड़ी हुई हैं। यह समूह मुख्य रूप से सिलाई कार्य में लगा हुआ है और महिलाओं की पसंद के अनुसार विविध प्रकार के थैले सिल रहा है। पिछले दो से तीन महीनों से इस कार्यशाला के दायरे को और अधिक बढ़ाया गया है। अब बैग सिलाई के अतिरिक्त महिलाएं मिट्टी और मोम के सुंदर दीपक तथा गृह सज्जा से जुड़ी कई सामग्रियां बनाना भी सीख रही हैं।
गैर-सरकारी संगठन की भूमिका और बाजार व्यवस्था
जेल अधीक्षक के पदभार संभालने के बाद कारागार प्रशासन ने एक गैर-सरकारी संगठन के साथ संपर्क स्थापित कर इस प्रशिक्षण अभियान की औपचारिक शुरुआत की थी। इस संस्था की प्रशिक्षिका नियमित रूप से कारागार पहुंचकर महिला बंदियों को बारीकी से सिलाई, कटाई और हस्तशिल्प की कला सिखाती हैं। तैयार किए गए माल की मार्केटिंग और बिक्री का जिम्मा भी संस्था और जेल प्रशासन मिलकर संभालते हैं। बिक्री से प्राप्त होने वाली शुद्ध राशि से प्रत्येक कामकाजी महिला हर महीने 10,000 से 12,000 रुपये तक का मुनाफा अर्जित कर रही है।
रिहाई के बाद सम्मानजनक जीवन की राह
इस कौशल विकास कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिला कैदियों में आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास का संचार करना है। जेल में रहते हुए अर्जित की गई कमाई से ये महिलाएं अपने परिवारों की आर्थिक मदद भी कर पा रही हैं। पूर्व में इस केंद्र से प्रशिक्षण लेकर रिहा हो चुकी कई महिलाएं बाहर समाज में जाने के बाद भी स्वतंत्र रूप से इस काम को जारी रखकर अपनी आजीविका कमा रही हैं। जेल से छूटने के बाद समाज की मुख्यधारा से जुड़ने और सम्मानजनक जीवन जीने के लिए यह हुनर उनके लिए मजबूत आधार साबित हो रहा है।
























