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गाजियाबाद में पुराने फ्लेक्स से बन रहे मजबूत बैग, महिलाओं को मिला काम और पर्यावरण को नई सुरक्षाउत्तर प्रदेश
31 अग॰ 2026, 2:40 pm (59 दिन पहले)· 6

गाजियाबाद में पुराने फ्लेक्स से बन रहे मजबूत बैग, महिलाओं को मिला काम और पर्यावरण को नई सुरक्षा

गाजियाबाद में बेकार फ्लेक्स बोर्ड से उपयोगी बैग बनाने का अनूठा अभियान चल रहा है। इस पहल से पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ महिलाओं को रोजगार भी मिल रहा है।

गाजियाबाद के शहरी इलाकों, बाजारों और सार्वजनिक स्थलों पर लगे बैनर और फ्लेक्स बोर्ड अक्सर कार्यक्रम समाप्त होने के बाद कचरे में फेंक दिए जाते हैं। ये सामग्री शहर के विभिन्न कोनों, खाली पड़े भूखंडों या सीधे कचरा घरों तक पहुंचती है, जहां यह लंबे समय तक प्रदूषण का कारण बनती है। इस समस्या से निपटने के लिए अब एक अनूठी शुरुआत की गई है। नगर निगम के सहयोग से साथी फाउंडेशन इन बेकार समझे जाने वाले फ्लेक्स को नया जीवन दे रहा है। संस्था की प्रमुख काजल छिब्बर के मार्गदर्शन में इन अनुपयोगी विज्ञापनों को संग्रहित कर इनसे मजबूत और टिकाऊ थैले बनाए जा रहे हैं। इस योजना की सबसे बड़ी खूबी यह है कि तैयार होने वाले इन थैलों को आम नागरिकों को पूरी तरह मुफ्त में बांटा जा रहा है, जिससे प्लास्टिक थैलियों के विकल्प की तलाश पूरी हो रही है। साथ ही, इन वस्तुओं के निर्माण की जिम्मेदारी स्थानीय महिलाओं को सौंपी गई है, जिससे उन्हें आय का एक स्थिर साधन मिल रहा है। इस प्रकार जो फ्लेक्स कभी शहर के सौंदर्यीकरण में बाधा बनकर कचरा बनते थे, वे अब प्रकृति की रक्षा करने के साथ-साथ महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का जरिया बन चुके हैं।

साल 2022 से शुरू हुई थी इस अनूठी पहल की यात्रा

इस रचनात्मक योजना की शुरुआत वर्ष 2022 में हुई थी। इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए संस्थापक काजल छिब्बर ने एक आयोजन के तुरंत बाद बड़ी मात्रा में बेकार पड़े विज्ञापनों को देखा। उस दृश्य ने उनके मन में एक गहरा सवाल खड़ा कर दिया कि यदि केवल एक आयोजन के बाद इतना कचरा इकट्ठा हो सकता है, तो पूरे महानगर में प्रतिदिन कितनी मात्रा में यह सामग्री बर्बाद होती होगी। इसी विचार ने उन्हें इस कचरे के पुनर्चक्रण और दोबारा इस्तेमाल के रास्ते तलाशने के लिए प्रेरित किया। शुरुआत में संस्था ने पुराने विज्ञापनों से थैले तैयार करने का एक छोटा परीक्षण किया। इस पूरी प्रक्रिया में सबसे पहले फ्लेक्स सामग्री को पूरी तरह साफ किया जाता है और उसके बाद आवश्यकतानुसार उसके माप के अनुसार कटाई की जाती है। इसके पश्चात सिलाई मशीनों की मदद से इन्हें मजबूत थैलों का रूप दिया जाता है और इनमें मजबूत पट्टियां जोड़ी जाती हैं। इस विधि से तैयार होने वाले उत्पाद बेहद मजबूत होते हैं और उनमें काफी अधिक वजन आसानी से उठाया जा सकता है। सामान्य आकार के एक फ्लेक्स बोर्ड से लगभग छह हैंडबैग आसानी से तैयार किए जा सकते हैं।

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नगर निगम और स्थानीय नागरिकों का मिल रहा है भरपूर साथ

इस पूरे अभियान को सुचारू रूप से चलाने में स्थानीय प्रशासन यानी गाजियाबाद नगर निगम का भरपूर सहयोग मिल रहा है। निगम की तरफ से विभिन्न आयोजनों में इस्तेमाल हो चुके विज्ञापनों को सीधे संस्था तक पहुंचाया जाता है। इसके अलावा शहर के जागरूक नागरिक भी अपने इस्तेमाल किए हुए पुराने विज्ञापनों को स्वेच्छा से संस्था को सौंप देते हैं। जब ये उत्पाद बनकर तैयार हो जाते हैं, तब शहर के विभिन्न हिस्सों में विशेष शिविर लगाकर इन्हें आम जनता को मुफ्त में वितरित किया जाता है। इन आयोजनों का मुख्य उद्देश्य लोगों को पॉलिथीन और प्लास्टिक के इस्तेमाल से दूर रहने के लिए प्रेरित करना है। इस पूरी व्यवस्था का सबसे सकारात्मक पहलू यह है कि इससे केवल पर्यावरण को लाभ नहीं पहुंच रहा, बल्कि महिलाओं के सशक्तिकरण का मार्ग भी प्रशस्त हो रहा है। साथी फाउंडेशन के साथ मिलकर काम कर रही लगभग 35 महिलाएं इन वस्तुओं के निर्माण से जुड़ी हैं और अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं। वर्तमान स्थिति यह है कि संस्था द्वारा प्रतिदिन औसतन लगभग 50 बैगों का निर्माण किया जा रहा है।

पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण का संदेश

इस पूरे प्रोजेक्ट को लेकर संस्थापक काजल छिब्बर का यह संदेश है कि लोग पुराने विज्ञापनों और प्लास्टिक कचरे को यूं ही खुले में न फेंकें। इसके बजाय वे इस तरह की सामग्री को संबंधित संस्थाओं को सौंप दें ताकि उनका सही तरीके से पुनर्चक्रण करके उपयोगी वस्तुएं बनाई जा सकें। जिस सामग्री को लोग एक बार उपयोग करके बेकार समझकर कूड़ेदान में डाल देते हैं, वह अब एक तरफ प्रकृति को बचाने में अहम भूमिका निभा रही है, तो दूसरी तरफ महिलाओं के हाथों में रोजगार देकर उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। यह पहल दिखाती है कि किस तरह छोटी सी सोच और सही प्रबंधन के जरिए कचरे को भी एक उपयोगी संसाधन में बदला जा सकता है, जिससे समाज और प्रकृति दोनों को एक साथ लाभ मिल सके।

सवाल-जवाब

गाजियाबाद में बेकार फ्लेक्स से बैग बनाने की पहल किसने शुरू की है?
यह पहल साथी फाउंडेशन की संस्थापक काजल छिब्बर द्वारा शुरू की गई है।
इस योजना की शुरुआत किस वर्ष हुई थी?
साथी फाउंडेशन की यह पहल वर्ष 2022 में शुरू हुई थी।
इस काम में कौन सा निकाय सहयोग कर रहा है?
गाजियाबाद नगर निगम इस काम में संस्था का सहयोग कर रहा है।
इस परियोजना से कितनी महिलाओं को रोजगार मिला है?
साथी फाउंडेशन से जुड़ी लगभग 35 महिलाएं इस काम में रोजगार पा रही हैं।
तैयार होने वाले बैगों को लोगों को किस प्रकार दिया जाता है?
इन बैगों को अलग-अलग स्थानों पर कैंप लगाकर लोगों को निशुल्क वितरित किया जाता है।
एक सामान्य आकार के फ्लेक्स से कितने हैंडबैग बन जाते हैं?
एक सामान्य आकार के फ्लेक्स से करीब छह हैंडबैग तैयार हो जाते हैं।
संस्था द्वारा रोजाना कितने बैग तैयार किए जा रहे हैं?
संस्था रोजाना करीब 50 बैग तैयार कर रही है।
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