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गोरखपुर में गार्ड यान में कुर्सी न होने पर वैशाली एक्सप्रेस 50 मिनट रुकी, रेलवे प्रशासन ने शुरू की कार्रवाईउत्तर प्रदेश
19 अग॰ 2026, 10:48 pm (70 दिन पहले)· 1

गोरखपुर में गार्ड यान में कुर्सी न होने पर वैशाली एक्सप्रेस 50 मिनट रुकी, रेलवे प्रशासन ने शुरू की कार्रवाई

गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर 17 अगस्त को गार्ड द्वारा बैठने के लिए कुर्सी न मिलने पर सिग्नल न देने के कारण वैशाली एक्सप्रेस 50 मिनट तक खड़ी रही, जिससे यात्रियों को असुविधा हुई।

गोरखपुर जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर दो पर 17 अगस्त को एक अनोखा परिचालन विवाद देखने को मिला, जब गाड़ी संख्या 15566 वैशाली एक्सप्रेस लगभग 50 मिनट तक रोके रखी गई। इस अप्रत्याशित देरी की वजह ट्रेन गार्ड रामाशीष का वह निर्णय बना, जिसमें उन्होंने ब्रेक वान के भीतर बैठने के लिए कुर्सी उपलब्ध न होने पर ट्रेन को रवाना करने का सिग्नल देने से मना कर दिया। गार्ड के इस कड़े रुख के कारण स्टेशन पर खड़े सैकड़ों रेल यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन ने प्राथमिक जांच में गार्ड को दोषी पाया है और कोचिंग ऑफिस इन्फार्मेशन सिस्टम (सीओआइएस) के माध्यम से संबंधित गार्ड के मूल संभाग मध्य पूर्व रेलवे को अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश भेजी है।

गार्ड का तर्क और स्टेशन अधीक्षक को सौंपा गया मेमो

इस पूरी घटनाक्रम का ब्योरा देते हुए गार्ड रामाशीष ने गोरखपुर के स्टेशन अधीक्षक को एक लिखित मेमो सौंपा। मेमो में उन्होंने आरोप लगाया कि जो गार्ड ट्रेन को चलाकर गोरखपुर तक लाए थे, वे भी बिना किसी कुर्सी के ही पहुंचे थे। जब उन्होंने चार्ज लिया, तो गार्ड यान में कोई कुर्सी मौजूद नहीं थी। रामाशीष का कहना था कि उन्होंने 50 मिनट तक स्टेशन पर इंतजार किया, लेकिन स्टेशन प्रबंधन उनके लिए कुर्सी और टेबल का इंतजाम नहीं करा सका। अपनी सेवानिवृत्ति में महज आठ माह शेष रहने का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि चलती ट्रेन में पूरी यात्रा के दौरान खड़े रहकर गार्ड डायरी में सभी गतिविधियों को दर्ज करना उनके लिए बेहद कठिन था। बाद में देवरिया स्टेशन पर उन्हें एक छोटी टेबल मिली, जिस पर किसी तरह बैठकर उन्होंने अपनी आगे की ड्यूटी निभाई।

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रैक प्रबंधन की गड़बड़ी और एलएचबी ब्रेक वान का गणित

रेलवे प्रशासन की तकनीकी व्यवस्था के अनुसार ट्रेनों में आधुनिक लिंक हाफमैन बुश (LHB) कोच और पावरकार से जुड़े ब्रेक वान लगाए जाते हैं। इन आधुनिक एलएचबी ब्रेक वान में गार्ड के बैठने के लिए इनबिल्ट कुर्सी का प्रावधान होता है और अटैच पावरकार में अधिकतम दो कुर्सियां होती हैं। हालांकि, 17 अगस्त को वैशाली एक्सप्रेस के साथ बिहार संपर्क क्रांति की पावरकार जोड़ दी गई थी। इस अव्यवस्थित पावरकार में कोई कुर्सी मौजूद नहीं थी। जब गोरखपुर जंक्शन पर गार्ड ने ड्यूटी संभाली और कुर्सी न होने की बात सामने आई, तो उन्होंने न केवल कुर्सी की मांग की बल्कि बिना व्यवस्था के ट्रेन आगे ले जाने से साफ इनकार कर दिया। इसके चलते ट्रेन प्लेटफॉर्म पर ही खड़ी रही।

रेलवे प्रशासन का रुख और अनुशासनात्मक कार्रवाई

रेलवे अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि गार्ड ब्रेक वान में इनबिल्ट कुर्सी की व्यवस्था रहती है और अलग से कोई अतिरिक्त कुर्सी देने का प्रावधान नहीं होता। यदि कभी कुर्सी उपलब्ध न हो, तो गार्ड बक्से पर बैठकर या खड़े होकर अपनी ड्यूटी पूरी करते हैं। मुख्य जनसंपर्क अधिकारी के अनुसार गार्ड द्वारा ट्रेन रोकने के इस कदम को घोर लापरवाही माना गया है। पूर्वोत्तर रेलवे ने मध्य पूर्व रेलवे को सीओआइएस प्रणाली पर मामला दर्ज कराते हुए गार्ड के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

सवाल-जवाब

वैशाली एक्सप्रेस गोरखपुर जंक्शन पर कितने समय तक रुकी रही?
गाड़ी संख्या 15566 वैशाली एक्सप्रेस 17 अगस्त को गोरखपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 2 पर 50 मिनट तक खड़ी रही।
गार्ड ने वैशाली एक्सप्रेस को सिग्नल देने से क्यों मना किया?
गार्ड रामाशीष ने गार्ड ब्रेक वान में बैठने के लिए कुर्सी उपलब्ध न होने के कारण ट्रेन को रवाना करने का सिग्नल देने से मना कर दिया था।
रेलवे प्रशासन ने इस मामले में क्या कार्रवाई की है?
पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन ने गार्ड को प्राथमिक तौर पर दोषी मानते हुए सीओआइएस (COIS) के माध्यम से मध्य पूर्व रेलवे को अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति भेजी है।
वैशाली एक्सप्रेस के गार्ड ब्रेक वान में कुर्सी क्यों नहीं थी?
वैशाली एक्सप्रेस में बिहार संपर्क क्रांति की पावरकार जोड़ दी गई थी, जो अव्यवस्थित थी और उसमें कुर्सी की व्यवस्था नहीं थी।
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