उत्तर प्रदेश के हरदोई जनपद अंतर्गत अरवल थाना क्षेत्र में जहरीले सांप के डसने के बाद एक युवक की जान बचाने के लिए परिजनों को बेहद अनोखा तरीका अपनाना पड़ा। टिकार गांव में एक दुकान संचालक जब काम समेट रहा था, तभी काउंटर के नीचे छिपे सांप ने उसके पैर में डस लिया। अस्पताल पहुंचने पर जब जहर के प्रभाव से मरीज पर गहरी बेहोशी छाने लगी, तब डॉक्टरों की सलाह पर छोटे भाइयों ने उसे होश में बनाए रखने के लिए एक घंटे के भीतर 150 से अधिक थप्पड़ मारे। कुल 20 एंटी वेनम इंजेक्शन देने और गहन निगरानी के बाद युवक की हालत खतरे से बाहर बताई गई है।
दुकान बंद करते समय काउंटर के नीचे हुआ हमला
टिकार गांव के निवासी 35 वर्षीय अभय सिंह उर्फ रामू गांव में ही रामू मोबाइल एंड जनरल स्टोर के नाम से प्रतिष्ठान चलाते हैं। मंगलवार 29 सितंबर की रात करीब 8 बजे अभय अपनी दुकान बंद करने की तैयारी में जुटे हुए थे। उसी समय काउंटर के निचले हिस्से में छिपकर बैठे एक विषैले सांप ने अचानक उनके पैर पर डस लिया। डंक का अहसास होते ही जब अभय ने नीचे झुककर देखा तो उन्हें वहां सांप नजर आया। अभय ने तत्परता दिखाते हुए फौरन अपने पिता रविंद्र प्रताप को इस अप्रिय घटना से अवगत कराया, जिसके बाद परिजन उन्हें लेकर अस्पताल की तरफ दौड़े।
दो अस्पतालों में दिए गए कुल 20 एंटी वेनम इंजेक्शन
परिजन आनन-फानन में अभय को नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) हरपालपुर ले गए। वहां मौजूद मेडिकल स्टाफ ने स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए फौरन उपचार शुरू किया और मरीज को 10 एंटी वेनम इंजेक्शन लगाए। इसके बावजूद अभय की शारीरिक स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं दिखा, जिसके चलते रात करीब 10:30 बजे डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज हरदोई रेफर कर दिया।
मेडिकल कॉलेज पहुंचने पर इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर शाबान अहमद और उनकी टीम ने तुरंत मोर्चा संभाला। मरीज की स्थिति को देखते हुए मेडिकल कॉलेज में 10 और एंटी वेनम इंजेक्शन चढ़ाए गए। इस प्रकार सीएचसी और मेडिकल कॉलेज मिलाकर अभय को कुल 20 एंटी वेनम इंजेक्शन दिए गए। उपचार के इस नाजुक दौर में सर्पदंश के जहर के असर से अभय को बहुत तेज नींद आने लगी और वह लगातार अचेत होने लगे। डॉक्टर शाबान अहमद और उनकी टीम ने परिजनों को स्पष्ट निर्देश दिया कि मरीज का किसी भी सूरत में सोना जानलेवा साबित हो सकता है, इसलिए उसे लगातार जगाए रखना बेहद जरूरी है।
होश में रखने के लिए भाइयों ने मारे 150 से अधिक थप्पड़
चिकित्सकों की सख्त हिदायत मिलते ही अभय के दो छोटे भाई, रमन और अनिरुद्ध, अपने बड़े भाई को नींद के आगोश में जाने से रोकने के प्रयास में जुट गए। दोनों भाइयों ने करीब एक घंटे तक लगातार अभय को थपथपाया, झकझोरा और लगभग 150 से ज्यादा थप्पड़ रसीद किए ताकि वह अपनी आंखें खुली रखें। अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में डॉक्टरों की टीम लगातार तीन घंटे तक अभय के स्वास्थ्य मानकों पर नजर बनाए रही। निरंतर प्रयासों और दवाओं के असर से आखिरकार अभय की स्थिति स्थिर हुई और उन्हें पूरी तरह से होश आ गया।
डॉक्टरों ने परिजनों को आश्वस्त किया कि अभय अब खतरे से बाहर हैं और उनकी सेहत में निरंतर सुधार हो रहा है। यदि स्थिति और बिगड़ती तो मरीज को लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) ले जाने की तैयारी थी, परंतु हरदोई मेडिकल कॉलेज में ही स्वास्थ्य में सकारात्मक बदलाव दिखने के बाद उन्हें वहीं भर्ती रखकर उपचार आगे बढ़ाया गया।



















