उत्तर प्रदेश के संभल शहर में सार्वजनिक रास्तों और सड़कों पर मवेशियों को खुला छोड़ने वाले पशुपालकों के खिलाफ स्थानीय प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। संभल नगर पालिका ने शहर को बेसहारा गोवंश की समस्या से मुक्त कराने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है। इस कदम के तहत सड़कों पर लावारिस अवस्था में पाए जाने वाले प्रत्येक मवेशी के मालिक पर ₹2,500 का जुर्माना ठोका जाएगा। नियमों की अनदेखी जारी रखने पर न केवल जुर्माने की राशि बढ़ाई जाएगी, बल्कि आरोपियों के विरुद्ध एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी।
लापरवाह पशुपालकों पर अब तक ₹12,500 का जुर्माना
नगर निकाय की टीम ने सड़कों पर गश्त बढ़ा दी है और आवारा पशुओं के मालिकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। संभल नगर पालिका के कार्यकारी अधिकारी आदित्य प्रकाश ने जानकारी दी है कि अभियान की शुरुआत में ही नियम तोड़ने वाले 5 मवेशी मालिकों पर शिकंजा कसा गया है। इन 5 पशुपालकों से कुल ₹12,500 की जुर्माना राशि वसूल करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
जुर्माना लगाने के साथ-साथ नगर पालिका की टीमें सड़कों पर घूम रहे मवेशियों को पकड़कर सुरक्षित स्थानों पर भेजने का काम भी तेजी से कर रही हैं। पकड़े गए बेसहारा मवेशियों को कासिमपुर गौशाला में भेजा जा रहा है ताकि सड़कों पर यातायात व्यवस्था बाधित न हो और मवेशियों को भी सुरक्षित आश्रय मिल सके।
बार-बार नियम तोड़ने पर ₹10,000 पेनल्टी और दर्ज होगी एफआईआर
नगर पालिका प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि यह अभियान अस्थायी नहीं है बल्कि लगातार जारी रहेगा। कार्यकारी अधिकारी आदित्य प्रकाश के अनुसार, पशुपालकों को बार-बार सलाह दी जा रही है कि वे अपने जानवरों को खुले में छोड़ने की जगह अपने निजी परिसर के भीतर बांधकर रखें। यदि पशुपालक इन हिदायतों के बाद भी सुधार नहीं लाते हैं, तो उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई और सख्त की जाएगी।
शुरुआती चरण में प्रति मवेशी ₹2,500 का जुर्माना तय किया गया है। इसके बावजूद यदि कोई पशुपालक दोबारा अपने मवेशी को सड़क पर लावारिस छोड़ता पाया जाता है, तो जुर्माने की रकम बढ़ाकर ₹5,000 कर दी जाएगी। लगातार उल्लंघन जारी रहने की स्थिति में यह पेनल्टी बढ़कर ₹10,000 तक पहुंच जाएगी। आदित्य प्रकाश ने चेतावनी दी है कि यदि पशुपालक इसके बाद भी नियमों का पालन नहीं करते हैं, तो नगर पालिका उनके खिलाफ संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कराएगी।
सड़कों से लेकर खेतों तक आवारा मवेशियों की विकराल समस्या
उत्तर प्रदेश के तमाम जिलों में आवारा पशुओं की मौजूदगी एक गंभीर सामाजिक और आर्थिक चुनौती बन चुकी है। ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी बाजारों और मुख्य चौराहों तक बेसहारा गोवंश घूमते हुए देखे जा सकते हैं। इस स्थिति के कारण सबसे ज्यादा परेशानी किसानों को उठानी पड़ रही है, जिनकी रातभर की मेहनत से तैयार फसलें मवेशियों के झुंड द्वारा नष्ट कर दी जाती हैं।
दूसरी ओर, व्यस्त सड़कों और राजमार्गों पर अचानक मवेशियों के आ जाने से गंभीर सड़क हादसों की संख्या भी बढ़ रही है। कई बार वाहन चालकों और राहगीरों के लिए ये लावारिस जानवर जानलेवा साबित होते हैं। संभल नगर पालिका का यह नया आदेश और कड़ी कार्रवाई का खाका इसी दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है, ताकि सड़कों को सुरक्षित बनाया जा सके और पशुपालकों की जवाबदेही तय की जा सके।





















