ई20 (E20) पेट्रोल नीति को लेकर देश में जारी चर्चाओं के बीच आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि केंद्र सरकार को E20 ईंधन नीति वापस लेने के लिए मजबूर करने का एक आसान रास्ता है। केजरीवाल के अनुसार, अगर जनता गोवा विधानसभा चुनाव में एकजुट होकर भारतीय जनता पार्टी को हराती है, तो चुनाव परिणाम आने के महज पांच दिनों के भीतर सरकार को E20 नीति वापस लेनी पड़ेगी।
ईंधन नीति और चुनावी रणनीति
देश भर में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल यानी E20 की अनिवार्यता को लेकर वाहन चालकों में विभिन्न चिंताएं देखी जा रही हैं। कई वाहन मालिकों का मानना है कि इस ईंधन से गाड़ियों के माइलेज और इंजन की कार्यप्रणाली पर असर पड़ता है। इसी मुद्दे को उठाते हुए अरविंद केजरीवाल ने इसे चुनाव से जोड़ने का दांव खेला है, ताकि जनता के असंतोष को राजनीतिक मंच पर लाया जा सके।
ओवरकॉन्फिडेंस तोड़ने का दावा
अरविंद केजरीवाल ने अपनी पोस्ट में लिखा कि गोवा चुनाव में बीजेपी की हार से उनके अत्यधिक आत्मविश्वास को झटका लगेगा। उन्होंने गारंटी देते हुए कहा कि चुनावी नतीजे सामने आते ही सरकार दबाव में आ जाएगी और 5 दिनों के भीतर इस नीति को रद्द कर देगी। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे इस फैसले के खिलाफ अपनी बात रखने के लिए चुनाव को एक माध्यम बनाएं।
E20 नीति की पृष्ठभूमि और उद्देश्य
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम को देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने, कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से लागू किया है। हालांकि, तकनीकी अनुकूलता और ईंधन दक्षता को लेकर उपभोक्ताओं द्वारा लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं।
जनता की प्रतिक्रिया
अरविंद केजरीवाल के इस बयान पर सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने तीखी और मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है। कुछ लोगों ने इसे चुनाव जीतने का एक राजनीतिक हथकंडा बताया, तो कुछ उपभोक्ताओं ने नीति पर सवाल उठाते हुए E20 ईंधन के असर पर प्रामाणिक आंकड़े जारी करने की मांग की।

























