उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक बड़े दवा कारोबारी की रहस्यमयी हत्या के मामले में पुलिस ने सनसनीखेज पर्दाफाश किया है। इस पूरे मामले के पीछे कोई बाहरी गिरोह नहीं, बल्कि घर के भीतर ही रची गई एक खौफनाक साजिश सामने आई है। पुलिस की जांच में यह बात खुलकर सामने आई है कि कारोबारी की जान लेने के पीछे किसी और का नहीं, बल्कि उनकी अपनी बहू का ही हाथ था। खर्चों पर रोक लगाए जाने से खफा होकर बहू ने इस कत्ल की पूरी रूपरेखा तैयार की थी।
रतन ऑर्बिट अपार्टमेंट में हुई थी वारदात
यह पूरी घटना कानपुर के कल्याणपुर इलाके में स्थित रतन ऑर्बिट अपार्टमेंट के सी-104 फ्लैट की है। यहां रहने वाले विनीत मीनोचा बिरहाना रोड पर ‘फार्मा ट्रेडर्स’ नाम की फर्म के मालिक थे और उनका सालाना कारोबार 40 से 50 करोड़ रुपये के आसपास था। शनिवार की रात जब विनीत घर में अकेले थे, तब उन्हें बेहद बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया गया। रविवार तड़के करीब तीन बजे जब उनका बेटा सुब्रत, बहू शालू और उनका छह साल का बच्चा वापस लौटे, तो उन्होंने विनीत का खून से सना हुआ शव बेडरूम में पड़ा देखा। कमरे में संघर्ष के स्पष्ट निशान मौजूद थे और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि उनके शरीर पर चाकू से कुल 26 वार किए गए थे।
पुराने नौकर को दी गई थी छह लाख की सुपारी
मामले की तह तक जाने के लिए जब पुलिस ने कड़ियां जोड़ीं, तो चौंकाने वाले तथ्य बाहर आए। पुलिस के मुताबिक, शालू अपने रोजमर्रा के खर्चों और गतिविधियों पर लगाई जा रही पाबंदियों से काफी नाराज चल रही थी। इसी रंजिश के चलते उसने अपने पुराने नौकर विशाल गौतम को अपने ससुर को रास्ते से हटाने के लिए चुना और उसे छह लाख रुपये की सुपारी दी। इस काम को अंजाम देने के लिए विशाल ने अपने साथी राज किशोर को भी साथ मिला लिया। दोनों ने एक डुप्लीकेट चाबी का इस्तेमाल किया और फ्लैट के अंदर दाखिल होकर विनीत मीनोचा पर चाकुओं से हमला कर दिया।
गार्ड को गुमराह कर फ्लैट में घुसे आरोपी
वारदात को अंजाम देने से पहले आरोपियों ने बड़ी चालाकी से सुरक्षा तंत्र को चकमा दिया था। जब विशाल और राज किशोर रतन ऑर्बिट अपार्टमेंट के मुख्य गेट पर पहुंचे, तो वहां तैनात सुरक्षा गार्ड ने उन्हें ऊपर जाने से रोक दिया। इसके बाद दोनों ने शालू से फोन पर संपर्क किया। आरोप है कि शालू ने गार्ड को निर्देश दिया कि वे दोनों दवाइयां लेकर आए हैं, इसलिए उन्हें अंदर जाने दिया जाए। इसके बाद दोनों आसानी से फ्लैट तक पहुंच गए। कुछ समय बाद शालू अपने पति सुब्रत और बच्चे के साथ घर से बाहर चली गई, जिससे विनीत घर में अकेले रह गए। इसी सुनहरे मौके का फायदा उठाकर दोनों हमलावरों ने इस खूनी खेल को अंजाम दिया और वहां से फरार हो गए। घर से किसी भी तरह की कीमती वस्तु या सामान की चोरी नहीं की गई थी, जिससे पुलिस को पहले ही यह संकेत मिल गया था कि यह लूटपाट का मामला नहीं है।
शोक का नाटक और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की मदद
अपराध को अंजाम देने के बाद आरोपी शातिर तरीके से वापस लौटे। रविवार की सुबह शालू अपने पति और बच्चे के साथ घर पहुंची और ससुर की लाश देखकर रोने का नाटक करने लगी ताकि किसी को उस पर शक न हो। हालांकि, पुलिस की तकनीकी जांच ने उसकी सारी पोल खोल दी। पुलिस अधिकारियों ने अपार्टमेंट की सीसीटीवी फुटेज, मुख्य गेट के रजिस्टर और कॉल डिटेल रिकॉर्ड की गहराई से समीक्षा की। उस दिन अपार्टमेंट में करीब 45 सुरक्षाकर्मी तैनात थे और मुख्य गेट पर तीन गार्ड ड्यूटी पर थे। रात करीब 8:28 बजे की एंट्री समेत तमाम संदिग्ध गतिविधियों की कड़ियों को आपस में जोड़ा गया, जिससे शालू और हत्यारों के बीच की आपसी मिलीभगत पूरी तरह साफ हो गई।
मुठभेड़ के बाद हुई आरोपियों की गिरफ्तारी
मामले में तेजी दिखाते हुए पुलिस ने रविवार रात करीब 8:15 बजे एक मुठभेड़ के बाद विशाल गौतम और राज किशोर को धर दबोचा। पूछताछ के दौरान विशाल ने अपना जुर्म कबूल कर लिया और बताया कि उसने शालू के कहने पर ही इस कत्ल को अंजाम दिया था। इस इकबालिया बयान और अन्य पुख्ता साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने मुख्य साजिशकर्ता शालू को भी गिरफ्तार कर लिया। डीसीपी वेस्ट कासिम आब्दी ने इस पूरे मामले में बहू की संलिप्तता और गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि की है। अब पुलिस इस बात की गहराई से छानबीन कर रही है कि इस साजिश की नींव कब रखी गई थी और इसमें कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था या नहीं।



















