उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर स्थित नौबस्ता थाने के भीतर मंगलवार देर रात उस समय भारी हड़कंप मच गया, जब महिला उत्पीड़न के एक मामले में पूछताछ के लिए पहुंचे युवक ने थाने के ही शौचालय में जाकर टॉयलेट क्लीनर पी लिया। पुलिस हिरासत और सुरक्षा व्यवस्था के बीच घटी इस अप्रत्याशित घटना से पुलिसकर्मियों के हाथ-पांव फूल गए। आनन-फानन में युवक को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसकी अत्यंत नाजुक हालत को देखते हुए उसे गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में भर्ती किया गया है। थाने के भीतर हुई इस गंभीर लापरवाही का संज्ञान लेते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने सख्त कार्रवाई की है और ड्यूटी पर तैनात दरोगा व हेड कांस्टेबल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
महिला उत्पीड़न की शिकायत और पुलिस समन का मामला
पूरे घटनाक्रम की शुरुआत नौबस्ता थाना क्षेत्र की एक महिला को फोन पर परेशान किए जाने की शिकायत से हुई। नौबस्ता थाना प्रभारी बहादुर सिंह द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, नौबस्ता निवासी एक महिला के ससुर ने पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत में सरसौल क्षेत्र के महोली गांव के निवासी आशीष द्विवेदी नाम के युवक पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। पीड़ित परिवार का कहना था कि आशीष लगातार अलग-अलग मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करके महिला को कॉल करता था और अनुचित बातें कहकर उसे परेशान करता था।
शिकायतकर्ता पक्ष का यह भी आरोप था कि जब महिला और उसके परिवार के सदस्यों ने आशीष के इस व्यवहार का कड़ा विरोध किया और उसे दोबारा फोन न करने की चेतावनी दी, तो वह शांत होने के बजाय और अधिक आक्रामक हो गया। आशीष ने परिवार के सदस्यों को जान से मारने की धमकी दी। इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए नौबस्ता थाना पुलिस ने मामले की प्राथमिक जांच शुरू की और आरोपी आशीष द्विवेदी को पूछताछ के लिए थाने में उपस्थित होने का समन भेजा था।
अत्यधिक नशे की हालत में थाने पहुंचा आरोपी
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आशीष को मंगलवार को दिन के समय ही थाने आकर अपना पक्ष रखने और पूछताछ में शामिल होने का निर्देश दिया गया था। हालांकि, वह दिन में थाने नहीं आया और टालमटोल करता रहा। इसके बाद मंगलवार रात करीब 11:30 बजे आशीष अपने एक दोस्त के साथ अचानक नौबस्ता थाने पहुंच गया। थाने पहुंचते ही यह स्पष्ट हो गया कि आशीष और उसका साथी दोनों अत्यधिक नशे की हालत में थे।
थाने के भीतर दाखिल होते ही आशीष ने वहां तैनात पुलिसकर्मियों के साथ उलझना शुरू कर दिया। वह पुलिसकर्मियों से तेज आवाज में बहस करने लगा और उनके साथ अभद्रता पर उतर आया। पुलिसकर्मियों ने उसकी स्थिति को देखते हुए उसे समझाने का प्रयास किया और कहा कि वह इस समय नशे में है, इसलिए वह सुबह आकर बात करे। इसके बावजूद आशीष उसी समय पूछताछ कराने की बात पर अड़ गया और लगातार हंगामा करता रहा। उसकी इस हरकत और नशे की हालत को देखते हुए पुलिसकर्मियों ने शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए दोनों युवकों को थाने परिसर में ही बैठा लिया।
थाने के भीतर हंगामा और खुद को चोट पहुंचाने का प्रयास
थाने में बैठाए जाने के बाद भी आशीष का आक्रामक व्यवहार कम नहीं हुआ। कुछ ही देर में उसने थाने के भीतर ही अपना सिर दीवार और फर्श पर पटकना शुरू कर दिया, जिससे वहां मौजूद पुलिसकर्मियों में हड़कंप मच गया। पुलिसकर्मियों ने तुरंत बीच-बचाव करते हुए उसे रोका और खुद को नुकसान पहुंचाने से बचाया। आशीष के इस अप्रत्याशित आचरण और नशे की स्थिति को देखते हुए ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने निर्णय लिया कि दोनों युवकों का पहले चिकित्सीय परीक्षण (मेडिकल चेकअप) कराया जाए।
पुलिसकर्मी जब दोनों का मेडिकल कराने के लिए आवश्यक कागजी कार्रवाई और ले जाने की तैयारी कर रहे थे, उसी समय आशीष ने लघुशंका (टॉयलेट) जाने की बात कही। इस पर थाने में तैनात एक सिपाही उसे सुरक्षित रूप से थाने के शौचालय तक लेकर गया।
बाथरूम में रखी रसायन की बोतल उठाई और पी लिया टॉयलेट क्लीनर
आरोप है कि जैसे ही आशीष शौचालय के भीतर गया, उसकी नजर वहां पहले से रखी टॉयलेट क्लीनर की बोतल पर पड़ी। उसने बिना समय गंवाए तुरंत वह रसायन की बोतल उठा ली और उसे पी लिया। हालांकि, पुलिस के आधिकारिक बयान में यह भी कहा गया है कि सिपाही ने उसे रसायन पीते देख तुरंत बोतल छीनने का प्रयास किया था, लेकिन तब तक वह रसायन की कुछ मात्रा निगल चुका था। टॉयलेट क्लीनर पेट में जाते ही आशीष की तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी और वह दर्द से तड़पने लगा।
थाने के शौचालय में हुई इस घटना के सामने आते ही पुलिसकर्मियों के बीच अफरा-तफरी मच गई। पुलिसकर्मियों ने बिना किसी देरी के आशीष को गाड़ी में बैठाया और नजदीकी कांशीराम अस्पताल लेकर पहुंचे।
कांशीराम से हैलट अस्पताल रेफर, आईसीयू में जीवन रक्षा प्रयास
कांशीराम अस्पताल के आपातकालीन विभाग में डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार शुरू किया, लेकिन रसायन के प्रभाव और युवक की गिरती स्थिति को देखते हुए उसे तुरंत उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर करने की सलाह दी। इसके बाद पुलिसकर्मी अतिशीघ्र उसे कानपुर के प्रमुख हैलट अस्पताल लेकर पहुंचे। हैलट अस्पताल के डॉक्टरों ने मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे तुरंत गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में भर्ती कर लिया।
फिलहाल आशीष का इलाज हैलट अस्पताल के आईसीयू में विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में चल रहा है। डॉक्टरों की टीम उसकी हालत पर लगातार नजर बनाए हुए है और उसकी स्थिति अत्यंत संवेदनशील बनी हुई है।
सुरक्षा में भारी चूक पर दो पुलिसकर्मी सस्पेंड, जांच शुरू
थाने के भीतर एक आरोपी द्वारा जहरीला रसायन पी लिए जाने की घटना ने पुलिस प्रशासन की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस के उच्च अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया। डीसीपी साउथ दीपेंद्र नाथ चौधरी ने थाने की सुरक्षा और आरोपी की कस्टडी निगरानी में लापरवाही पाए जाने पर सख्त कदम उठाया।
डीसीपी साउथ ने मामले में नाइट अफसर के रूप में तैनात दरोगा विकास गौड़ और हेड कांस्टेबल अरविंद को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही इस बात की विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं कि नशे में धुत आरोपी की उचित निगरानी क्यों नहीं की गई और उसे शौचालय ले जाते समय आवश्यक सुरक्षा मानकों का पालन क्यों नहीं किया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी आशीष के खिलाफ दर्ज महिला उत्पीड़न की शिकायत की जांच जारी है, और उसके स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद नियमानुसार आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।





















