उत्तर प्रदेश के कानपुर में अवैध नशीली दवाओं के सिंडिकेट के खिलाफ एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स की कानपुर यूनिट ने बाबूपुरवा थाना क्षेत्र के ढकनापुरवा अंतर्गत टीपी नगर में स्थित एक आवासीय मकान के गोदाम पर सुनियोजित छापेमारी की। इस गुप्त कार्रवाई में टीम ने भारी मात्रा में कोडीन युक्त कफ सिरप की पेटियां बरामद की हैं। मौके से पकड़े गए माल की कुल संख्या 25 हजार बोतलें आंकी गई हैं, जिसकी खुले बाजार में अनुमानित कीमत लगभग 2 करोड़ 95 लाख रुपये बताई जा रही है। मौके से एक मुख्य तस्कर को भी हिरासत में लिया गया है, जो इस अवैध भंडारण और आपूर्ति की देखरेख कर रहा था।
गोदाम से 2,500 लीटर नशीला सिरप बरामद
एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स यूनिट कानपुर के प्रभारी ऐनुद्दीन और उनकी टीम की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, गोदाम के भीतर 'TURBO-T' ब्रांड नाम से तैयार कोडीन सिरप का विशाल स्टॉक छिपाकर रखा गया था। जब टीम ने गिनती की, तो कुल 25 हजार सीलबंद बोतलें मिलीं, जिनमें सिरप की कुल मात्रा करीब 2,500 लीटर बैठती है। इतनी बड़ी मात्रा में नशीले सिरप का मिलना इस बात का सीधा संकेत है कि शहर को एक बड़े ट्रांजिट और डंपिंग स्टेशन के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। इस जब्ती के बाद जांच एजेंसियां केवल इसी गोदाम तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह पता लगाने में जुट गई हैं कि सिरप की यह विशाल खेप किस फैक्ट्री या स्रोत से निकली थी और इसे लाने के लिए किस रास्ते का उपयोग किया गया।
फर्जी दस्तावेजों और बिल्टी के सहारे दिल्ली कनेक्शन
छापेमारी के दौरान गिरफ्तार किए गए व्यक्ति की पहचान बिहार के मधुबनी जिले के निवासी मिहिर कुमार ठाकुर के तौर पर हुई है। प्राथमिक पूछताछ और छानबीन में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि आरोपी बेहद शातिर तरीके से इस अवैध कारोबार को अंजाम दे रहा था। वह कथित तौर पर नई दिल्ली स्थित एक फर्म के नाम पर फर्जी कागजात और फर्जी ट्रांसपोर्ट बिल्टी तैयार करता था। इन्हीं कूटरचित प्रपत्रों के सहारे सिरप की बुकिंग कराई जाती थी ताकि रास्तों में होने वाली सामान्य पुलिस या परिवहन जांच से बचा जा सके। अब जांच अधिकारी उस संबंधित व्यापारिक फर्म के रिकॉर्ड, पते और जीएसटी संबंधी विवरणों की सत्यता परख रहे हैं। पुलिस यह भी स्पष्ट करने में लगी है कि दिल्ली की उक्त फर्म की इस खेल में कोई संलिप्तता थी या फिर उसके नाम और साख का दुरुपयोग किया गया था।
प्रयागराज और वाराणसी तक फैला था डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क
जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि कानपुर इस अवैध माल का अंतिम गंतव्य नहीं था, बल्कि इसे एक क्षेत्रीय वितरण केंद्र की तरह इस्तेमाल किया जा रहा था। आरोपी मिहिर कुमार ठाकुर यहां खेप उतरवाने के बाद इसे उत्तर प्रदेश के अन्य प्रमुख जनपदों, विशेष रूप से प्रयागराज और वाराणसी में छोटे तस्करों और खरीदारों को आगे सप्लाई करता था। अब टास्क फोर्स की टीमें इस आपूर्ति श्रृंखला की हर कड़ी को खंगाल रही हैं। यह जानकारी जुटाई जा रही है कि वाराणसी और प्रयागराज में माल किन स्थानीय संपर्कों को सौंपा जाता था और इसके लिए किन वाहनों या निजी मालवाहकों की मदद ली जाती थी। इस गोरखधंधे में शामिल अन्य बिचौलियों, दवा प्रतिनिधियों और संदिग्ध व्यापारियों की सूची तैयार की जा रही है।
एनडीपीएस एक्ट में केस दर्ज, नेटवर्क की पड़ताल जारी
मौके पर तलाशी के दौरान पुलिस दल ने आरोपी के कब्जे से एक एंड्रॉयड मोबाइल फोन और 1,400 रुपये की नकद राशि बरामद की है। इस पूरे प्रकरण में बाबूपुरवा थाने में एनडीपीएस एक्ट के सख्त प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। फॉरेंसिक और तकनीकी टीमें अब बरामद मोबाइल के कॉल रिकॉर्ड, वॉट्सऐप चैट और वित्तीय लेन-देन की पड़ताल कर रही हैं, जिससे अंतरराज्यीय संपर्कों के अहम सुराग मिलने की पूरी संभावना है। इसके साथ ही इस बिंदु पर भी गहन जांच जारी है कि आरोपी इससे पहले इस तरह की कितनी खेपें मंगवा चुका है और क्या कानपुर अथवा आसपास के क्षेत्रों में उसके अन्य गुप्त ठिकाने भी मौजूद हैं।























