उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में हाल ही में हुए दर्दनाक पटाखा फैक्ट्री विस्फोट के मामले में कानून का शिकंजा कसता जा रहा है। पुलिस ने इस बड़ी दुर्घटना के मुख्य आरोपी को एक मुठभेड़ के बाद धर दबोचा है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, आरोपी ने पुलिस दल पर गोलीबारी कर दी थी, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में उसे पैर पर गोली लगी और उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया। यह आमने-सामने की मुठभेड़ हाइवे के करीब चरवा थाना क्षेत्र के तेरह मील गांव के पास तड़के हुई।
मुठभेड़ के बाद अस्पताल में भर्ती
घटना की पृष्ठभूमि में बताया गया कि पुलिस लंबे समय से इस मामले के मुख्य आरोपी की तलाश में जुटी हुई थी। मुखबिर से मिली पुख्ता जानकारी के आधार पर सुबह लगभग 4 बजे सुरक्षा बलों ने तेरह मील गांव के आसपास के इलाके की घेराबंदी कर ली थी। जब उसे भागने से रोकने का प्रयास किया गया, तो उसने सुरक्षा कर्मियों को निशाना बनाकर गोलियां चलानी शुरू कर दीं। आत्मरक्षार्थ की गई जवाबी कार्रवाई में आरोपी के पैर में गोली जा लगी, जिसके बाद उसे हिरासत में ले लिया गया। मौके से अवैध हथियार और कारतूस भी बरामद किए जाने की बात सामने आई है। अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है और पुलिस उससे लगातार पूछताछ कर रही है ताकि इस पूरे प्रकरण से जुड़े अन्य तथ्यों का खुलासा हो सके।
लापरवाही पर पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई
इस भयानक हादसे के बाद स्थानीय प्रशासनिक और पुलिस महकमे में भी हड़कंप मच गया है और सुस्ती बरतने वाले कर्मियों पर सख्त प्रशासनिक ऐक्शन लिया गया है। पिपरी थाना प्रभारी विकास सिंह को इस मामले में लाइन हाजिर कर दिया गया है। इसके साथ ही चायल चौकी प्रभारी अमित द्विवेदी और पूर्व चौकी प्रभारी मनीष पाल को भी लाइन हाजिर कर दिया गया है। वहीं दूसरी ओर बीट आरक्षी जितेंद्र कुमार और कृष्ण कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित किए जाने की सूचना है। प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा है कि घनी आबादी वाले इलाके में अवैध रूप से चल रहे इस विस्फोटक कारोबार की जानकारी होने के बावजूद समय रहते उचित कदम न उठाए जाने के कारण इन पुलिसकर्मियों की भूमिका सवालों के घेरे में आ गई है।
विस्फोट में जा चुकी है कई लोगों की जान
गौरतलब है कि यह पूरी त्रासदी सोमवार को पिपरी थाना इलाके के महमूदपुर मनौरी कस्बे में सामने आई थी, जब एक पटाखा फैक्ट्री में अचानक भयंकर आग लगने के बाद जबर्दस्त धमाका हुआ। इस भीषण विस्फोट के कारण आसपास के कई मकान पूरी तरह मलबे में तब्दील हो गए और कई किलोमीटर दूर तक धमाके की आवाज गूंज उठी। इस दर्दनाक हादसे में मासूम बच्चों और महिलाओं समेत कुल 11 लोगों की जान चली गई, जिससे पूरे क्षेत्र में मातम छा गया।
कई आरोपियों पर गंभीर धाराओं में मुकदमा
स्थानीय पुलिस ने इस घटना के संबंध में कुल छह नामजद व्यक्तियों के खिलाफ गंभीर धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है। इस सूची में नौशाद के अलावा शकील, उनके बेटे आदिल, पत्नी शबाना, कहकशा और बेटी शाइना का नाम शामिल है। पुलिस महकमा इनमें से कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेकर गहन पूछताछ कर रहा है। कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने फरार चल रहे अन्य अभियुक्तों की धरपकड़ के लिए विशेष टीमों का गठन किया है जो विभिन्न संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।
दस्तावेजों और अवैध संचालन की पड़ताल
प्रारंभिक छानबीन में यह बात भी निकलकर सामने आई है कि नौशाद अपने बेटे आदिल के नाम पर आदिल डीजे की आड़ में इस पटाखा इकाई का संचालन कर रहा था। स्थानीय स्तर पर यह चर्चाएं भी आम हैं कि करीब दो साल पहले भी जिला प्रशासन ने इस अवैध इकाई के विरुद्ध शिकंजा कसा था, बावजूद इसके चोरी-छिपे इसका काम फिर से शुरू हो गया। हालांकि जिला प्रशासन ने अभी तक यह आधिकारिक रूप से स्पष्ट नहीं किया है कि यह फैक्ट्री कानूनी रूप से वैध थी या पूरी तरह अवैध। यही कारण है कि अब जांच का मुख्य केंद्र इसके लाइसेंस और विस्फोटक सामग्री के भंडारण से जुड़े कागजात बन गए हैं।
प्रशासन का बुलडोजर और ATS की एंट्री
हादसे के बाद हरकत में आए प्रशासन ने घनी आबादी के बीच अवैध रूप से विस्फोटक जमा करने वालों के खिलाफ एक व्यापक अभियान छेड़ दिया है। मनौरी कस्बे के एक मकान से भारी मात्रा में विस्फोटक मिलने के बाद उसे दो DCM वाहनों में सुरक्षित तरीके से लादकर दूसरी जगह पहुंचाया गया। इसके बाद बुलडोजर का इस्तेमाल करके उस मकान को पूरी तरह जमींदोज कर दिया गया। घटना की गंभीरता को भांपते हुए अब एटीएस यानी आतंकवाद निरोधक दस्ते को भी जांच में शामिल कर लिया गया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री वहां कैसे पहुंची और इस अवैध नेटवर्क के पीछे कौन-कौन लोग सक्रिय रूप से जुड़े हुए थे।




















