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मुजफ्फरनगर में सास बनी मां: बेटे की मौत के एक महीने बाद कराई बहू की दूसरी शादी, देवर ने निभाई भाई की जिम्मेदारीउत्तर प्रदेश
24 सित॰ 2026, 3:52 pm (1 घंटे पहले)· 0

मुजफ्फरनगर में सास बनी मां: बेटे की मौत के एक महीने बाद कराई बहू की दूसरी शादी, देवर ने निभाई भाई की जिम्मेदारी

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में बेटे के निधन के ठीक एक महीने बाद सास ने अपनी बहू को बेटी मानते हुए आर्य समाज मंदिर में पूरे रीति-रिवाज के साथ उसकी दूसरी शादी करवाई।

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के खतौली स्थित दयालपुरम इलाके से सामाजिक बंधनों को तोड़कर इंसानियत और रिश्तों की एक अनूठी मिसाल सामने आई है। यहाँ एक परिवार ने गहरे दुख के पलों में भी अपनी विधवा बहू के भविष्य की चिंता करते हुए उसका नया जीवन बसाने का निर्णय लिया। बेटे की असमय मौत के महज एक महीने के भीतर ही सास ने बहू को बेटी की तरह विदा किया, वहीं देवर ने भी एक जिम्मेदार भाई की भांति कन्यादान की रस्म निभाई।

दुखों का पहाड़ टूटने के बाद परिवार ने संभाली जिम्मेदारी

हरिद्वार के बहादुरपुर की रहने वाली मीनाक्षी की शादी 10 साल पहले यानी वर्ष 2017 में दयालपुरम निवासी रोहित के साथ हुई थी। दोनों का पारिवारिक जीवन काफी खुशहाल चल रहा था और उनकी दो बेटियां—7 वर्षीय रितु तथा डेढ़ वर्ष की अविका हैं। लेकिन अचानक इस परिवार पर विपत्तियों का पहाड़ टूट पड़ा। 14 अगस्त को रोहित के पिता ओमपाल, जो पेशे से राज मिस्त्री थे, उनका कैंसर की बीमारी के कारण निधन हो गया। पिता के जाने के गहरे सदमे को रोहित बर्दाश्त नहीं कर सके और अगले ही दिन 15 अगस्त को उनकी भी मृत्यु हो गई।

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सास और देवर की पहल से आर्य समाज मंदिर में हुआ विवाह

पति और ससुर को खोने के बाद जवान बहू मीनाक्षी पर दुखों का संकट गहरा गया। ऐसे समय में उनकी सास सुनीता ने पारंपरिक सोच से ऊपर उठकर अपनी बहू का पुनर्विवाह कराने का साहसिक फैसला लिया। सास ने मीनाक्षी की सहमति के बाद राजस्थान के नारायणपुर में चाट की दुकान चलाने वाले योगेश के साथ शादी तय की। बुधवार को आर्य समाज मंदिर में वैदिक रीति-रिवाज के साथ यह विवाह संपन्न कराया गया। इस विवाह में मीनाक्षी के देवर मोहित ने बड़े भाई की अनुपस्थिति में स्वयं भाई बनकर कन्यादान की रस्म अदा की।

परिवार का संदेश और मीनाक्षी का फैसला

इस निर्णय से परिवार का हर सदस्य संतुष्ट नजर आ रहा है। मीनाक्षी ने स्पष्ट किया कि यह शादी उन्होंने पूरी तरह अपनी मर्जी से की है और उनके ऊपर किसी का कोई दबाव नहीं था। उन्होंने अपनी सास और देवर के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि उनके सास-ससुर ने उनके लिए बहुत अच्छा सोचा है। वहीं देवर मोहित का कहना था कि भाई और पिता के जाने के बाद लगभग एक महीना हो चुका था, लेकिन भाभी की आगे लंबी उम्र पड़ी है और दोनों छोटी बच्चियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया। सास सुनीता ने कहा कि वे अपनी बहू को अपनी बेटी मानकर विदा कर रही हैं और जिंदगी भर यह रिश्ता निभाएंगी।

सवाल-जवाब

यह घटना उत्तर प्रदेश के किस जिले और कस्बे की है?
यह घटना उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जनपद के खतौली कस्बे में स्थित दयालपुरम की है।
मीनाक्षी के पति और ससुर का निधन कब हुआ था?
ससुर ओमपाल का निधन 14 अगस्त को कैंसर से हुआ था और अगले ही दिन 15 अगस्त को सदमे से पति रोहित का निधन हो गया था।
मीनाक्षी का पुनर्विवाह किसके साथ हुआ है?
मीनाक्षी का विवाह राजस्थान के नारायणपुर में चाट की दुकान चलाने वाले योगेश के साथ हुआ है।
विवाह में कन्यादान की रस्म किसने निभाई?
विवाह में मीनाक्षी के देवर मोहित ने भाई बनकर अपनी भाभी का कन्यादान किया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Ravikash Gupta@ravikash·10 मिनट पहले

ऐसी सास और परिवार किस्मत से मिलते हैं। एक तरफ जहां दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, वहीं दूसरी तरफ इन्होंने बेटी मानकर उसका भविष्य सुरक्षित कर दिया।

Arjun Mehta@arjun-mehta·10 मिनट पहले

रविकेश जी, बात तो आपकी एकदम सही है, पर क्या बच्चों की कस्टडी को लेकर कोई कानूनी पेंच नहीं फंसा होगा?

Karan Malhotra@karan-malhotra·35 मिनट पहले

ऐसी सास और परिवार किस्मत से मिलते हैं। एक महीने में पति और ससुर को खोने के बाद बहू का घर बसाना बहुत बड़ा और हिम्मत वाला फैसला है। समाज को इस सोच से सीख लेनी चाहिए।

Rohan Verma@rohan-verma·34 मिनट पहले

बिल्कुल सही कहा करण भाई, ऐसी सोच और हिम्मत हर परिवार में होनी चाहिए ताकि किसी बेटी का भविष्य अंधकार में न रहे।

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