उत्तर प्रदेश के भारत-नेपाल सीमा से सटे महराजगंज जिले में पर्यटन परिदृश्य को नया आयाम देने की तैयारी शुरू हो चुकी है। सीमावर्ती क्षेत्रों के कायाकल्प और प्राकृतिक संपदा को विश्व पटल पर लाने की योजना के तहत प्रशासन ने दर्जिनिया मगरमच्छ संरक्षण केंद्र और निकटवर्ती टेल फॉल क्षेत्र के सुंदरीकरण का खाका तैयार किया है। लंबे समय से उपेक्षा का शिकार रहे इस दुर्गम सीमांत इलाके को अब एक प्रमुख इको-टूरिज्म स्पॉट के रूप में विकसित किया जा रहा है। बुनियादी ढांचे में सुधार और सुविधाओं के विस्तार से न केवल सैलानियों का आवागमन बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।
दर्जनिया ताल और गंडक किनारे टेल फॉल का आकर्षण
स्थानीय स्तर पर दर्जनिया ताल के नाम से प्रसिद्ध दर्जनिया मगरमच्छ संरक्षण केंद्र सैकड़ों मगरमच्छों का प्राकृतिक वास स्थल है। इस जलाशय में पर्यटकों को वन्यजीवों का दीदार सुरक्षित और सहज तरीके से कराने के लिए आधुनिक नागरिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। इस केंद्र से थोड़ी ही दूरी पर पूर्व दिशा में गंडक नदी का किनारा स्थित है, जिसे टेल फॉल के नाम से जाना जाता है।
प्रशासनिक योजना के अनुसार, टेल फॉल पर व्यापक सौंदर्यीकरण कार्य किए जाएंगे। पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नदी किनारे मजबूत बैरिकेडिंग लगाई जाएगी और पूरे परिसर को आकर्षक बनाया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि गंडक नदी का मनोरम तट और मगरमच्छ संरक्षण केंद्र मिलकर इस पूरे क्षेत्र को पूर्वांचल के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल कर देंगे।
वाइब्रेंट विलेज योजना से बदलेगी भेड़िहारी गांव की तस्वीर
संरक्षण केंद्र के बिल्कुल समीप बसा भेड़िहारी गांव मुख्य रूप से मुसहर समुदाय की आबादी का घर है। सीमावर्ती क्षेत्र में अवस्थित होने के कारण यह गांव दशकों तक मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहा और पिछड़े गांवों की श्रेणी में गिना जाता रहा। हालांकि, केंद्र सरकार की वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत इस गांव का चयन होने के बाद अब इसकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति में तेजी से बदलाव आ रहा है।
गांव में पर्यटकों के ठहराव को बढ़ावा देने के लिए होमस्टे का निर्माण कराया जा रहा है। इसके साथ ही पर्यटकों की दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए अन्य आवश्यक जनसुविधाएं जुटाई जा रही हैं। धरातल पर शुरू हुए इन विकास कार्यों से जहां मुसहर समुदाय के जीवन स्तर में सुधार आएगा, वहीं गांव में बाहर से आने वाले मेहमानों को स्थानीय संस्कृति और ग्रामीण जीवन शैली को करीब से समझने का अवसर भी मिलेगा।
स्थानीय रोजगार और जलीय आजीविका को बढ़ावा
वर्तमान समय में भी महराजगंज के इस सीमांत इलाके में विभिन्न जिलों से दैनिक आधार पर पर्यटक पहुंचते हैं, लेकिन बुनियादी व्यापारिक ढांचा न होने के कारण स्थानीय लोगों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल पाता था। पर्यटन सुविधाओं के व्यवस्थित विकास से क्षेत्र में खान-पान, हस्तशिल्प और स्थानीय परिवहन से जुड़े नए व्यावसायिक अवसर उत्पन्न होंगे।
विशेष रूप से गंडक नदी में नाव चलाने वाले और पारंपरिक रूप से मछली पकड़कर जीविकोपार्जन करने वाले मल्लाहों के लिए यह योजना वरदान साबित होगी। नौकायन का विस्तार होने से नाविकों को नियमित आय का साधन मिलेगा और उन्हें केवल मछली पकड़ने पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इस प्रकार, पर्यटन गतिविधियों का विस्तार महराजगंज के सीमावर्ती निवासियों के जीवन में व्यापक आर्थिक खुशहाली लेकर आएगा।



















