उत्तर प्रदेश की राजनीति में मतदाता सूचियों को लेकर घमासान छिड़ गया है, जहां पीलीभीत सदर सीट की वोटर लिस्ट में पाई गई भारी गड़बड़ियों पर चुनाव आयोग ने त्वरित और कड़ा कदम उठाया है। सूची में 13,150 मतदाताओं के नामों में खामियां मिलने के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। निर्वाचन आयोग के इस कदम के बाद से राजनीतिक दलों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है और राज्य का सियासी पारा चढ़ गया है।
चुनाव आयोग और जिला प्रशासन की कार्रवाई
पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में गड़बड़ी के इस गंभीर प्रकरण में निर्वाचन आयोग ने कड़ा एक्शन लेते हुए दो निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ERO) और एक वोटर रजिस्ट्रेशन सेंटर (VRC) ऑपरेटर को वोटर लिस्ट के काम से तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। इन सभी के खिलाफ संबंधित कोतवाली में औपचारिक मुकदमा भी दर्ज करा दिया गया है। उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने जिला कलेक्टर को इस पूरे मामले की विस्तृत और गहन जांच कराने के निर्देश जारी किए हैं। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि मतदाता सूची में जितनी भी त्रुटियां पाई गई हैं, उन्हें तुरंत प्रभाव से दुरुस्त कराया जाए।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के आधिकारिक निर्देश
इस पूरे घटनाक्रम के बीच, उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के आधिकारिक X हैंडल से एक पोस्ट के जरिए जानकारी दी गई कि विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र 127-पीलीभीत की मतदाता सूची में जो गड़बड़ी सामने आई है, उसमें वर्तमान के साथ-साथ पूर्व निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के खिलाफ भी कड़ी विधिक कार्रवाई की जाएगी। दोनों अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई के अतिरिक्त विभागीय जांच और विभागीय कार्रवाई शुरू करने के भी स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, मतदाता पंजीकरण केंद्र के कंप्यूटर सहायक की सेवाएं पूरी तरह से समाप्त कर दी जाएंगी। इस मामले से जुड़ा आधिकारिक अपडेट सोशल मीडिया पर भी साझा किया गया है।
कांग्रेस ने की चुनाव आयोग की तीखी घेराबंदी
चूंकि पीलीभीत की वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का यह पूरा मामला सबसे पहले कांग्रेस द्वारा उठाया गया था, इसलिए जैसे ही चुनाव आयोग ने कार्रवाई की, कांग्रेस ने आयोग के खिलाफ आक्रामक रुख अपना लिया। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष आराधना मिश्रा ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि चुनाव आयोग अब पूरी तरह से बेनकाब हो चुका है। आराधना मिश्रा ने आरोप लगाया कि आयोग अभी भी जनता से बहुत कुछ छिपाने की कोशिश कर रहा है और अधिकारियों को केवल बलि का बकरा बनाया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब उन ईआरओ के पास डेटा और सॉफ्टवेयर का एक्सेस ही नहीं था, तो वे इस गड़बड़ी के लिए दोषी कैसे ठहराए जा सकते हैं।
अखिलेश यादव का बड़ा बयान और चुनावी राजनीति
कांग्रेस के बाद समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव भी इस मुद्दे पर खुलकर मैदान में उतर आए। उन्होंने बयान दिया कि पीलीभीत में सामने आई यह गड़बड़ी तो महज एक छोटा सा सैंपल भर है, जबकि वोटों का असली घोटाला और स्कैम इससे कहीं अधिक बड़ा है। अखिलेश यादव ने कहा कि अभी तो केवल नाम में हेरफेर की बात ही साबित हो पाई है, लेकिन आने वाले समय में चुनाव आयोग को डुप्लीकेट वोटर्स के मुद्दे पर भी कड़ा जवाब देना पड़ेगा। इससे पहले विपक्ष की अन्य रणनीतिक बैठकों में भी मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हो चुकी है।
भाजपा का पलटवार और मंत्री जयवीर सिंह की सफाई
अखिलेश यादव द्वारा इस पूरे प्रकरण में लगातार भारतीय जनता पार्टी का नाम घसीटे जाने और इसे एक सोची-समझी साजिश बताए जाने पर सत्ताधारी दल ने भी कड़ा पलटवार किया। उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री जयवीर सिंह ने मोर्चा संभालते हुए कहा कि छोटी-छोटी क्लेरिकल गलतियों को आधार बनाकर अखिलेश यादव को बेवजह राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। जयवीर सिंह ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची में नामों की मामूली गड़बड़ियां आना एक सामान्य प्रक्रिया है और चुनाव से पहले इन्हें पूरी तरह से ठीक कर लिया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष को वोट चोरी के इस तरह के झूठे नैरेटिव से आगामी चुनावों में कोई भी फायदा नहीं मिलने वाला है।



















