एंड्रॉयड फोन पर गूगल ने चुपचाप जोड़े सभी अकाउंट्स के नंबर, जानिए इसे रोकने का तरीकाशीतलहर में बकरियों की सेहत का ऐसे रखें ख्याल, अपनाएं खान-पान और सुरक्षा के ये जरूरी उपायतेलंगाना में नीलकंठ पक्षी को पिंजरे में रखना कांग्रेस नेताओं पर भारी पड़ा, बी महेश कुमार गौड़ के कार्यक्रम पर वन विभाग का एक्शननागकेसर के फूल से चमकती है किस्मत और सेहत, शिव पूजा के साथ ज्योतिष में भी है बड़ा महत्वपटना में अनोखा अंदाज, दूध के आटे और बटर में तली लिट्टी के लिए दिए जाते हैं 225, 325 जैसे कोडटेनिस कोर्ट पर चमकता फ्रांस का नया सितारा, इंग्लिश दिग्गज रग्बी खिलाड़ी के बेटे ने तय किया शानदार सफरपूर्णिया में मटर की खेती से मालामाल हो रहे हैं किसान, इन खास किस्मों और तरीकों से होगी बंपर कमाईपीलीभीत वोटर लिस्ट गड़बड़ी पर चुनाव आयोग का कड़ा एक्शन, आराधना मिश्रा बोलीं- आयोग हुआ बेनकाबछत्तीसगढ़ में भीषण सड़क हादसा, पेड़ से टकराने के बाद बस के उड़े परखच्चे, छह लोगों की मौत और 40 घायल97 की उम्र में सोनिया गांधी का इंस्टाग्राम पर धमाका, सिर्फ तीन लोगों को कर रही हैं फॉलो
उत्तर प्रदेश की बड़ौत सीट पर बदले सियासी समीकरण, भाजपा और रालोद की नजदीकियों से सपा की राह होगी मुश्किलउत्तर प्रदेश
22 अक्तू॰ 2026, 10:10 pm (2 घंटे पहले)· 1

उत्तर प्रदेश की बड़ौत सीट पर बदले सियासी समीकरण, भाजपा और रालोद की नजदीकियों से सपा की राह होगी मुश्किल

उत्तर प्रदेश की बागपत जिले की हॉट सीट मानी जाने वाली बड़ौत विधानसभा सीट पर 2027 के चुनाव से पहले समीकरण पूरी तरह बदल चुके हैं। पिछले चुनावों में आमने-सामने रहने वाली भाजपा और रालोद अब एक ही गठबंधन में हैं, जिससे विपक्षी दलों के लिए मुकाबला दिलचस्प हो गया है।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में बागपत जिले की बड़ौत विधानसभा सीट हमेशा से ही एक बेहद अहम और चर्चित केंद्र रही है। साल 1969 के बाद जब 2008 में नए सिरे से परिसीमन हुआ, तब इस सीट का अस्तित्व फिर से सामने आया था। इसके प्रशासनिक दायरे में बड़ौत नगरपालिका क्षेत्र के साथ-साथ बागपत जिले के तमाम ग्रामीण इलाके भी आते हैं। भौगोलिक और राजनीतिक रूप से यह सीट बागपत लोकसभा क्षेत्र का एक प्रमुख हिस्सा है और निर्वाचन आयोग के रिकॉर्ड में इसे विधानसभा संख्या 51 के रूप में दर्ज किया गया है। यहाँ की चुनावी फिजा को समझने के लिए इसके सामाजिक ताने-बाने को देखना जरूरी है, जहां जाट समुदाय के मतदाताओं का दबदबा है, वहीं मुस्लिम, ओबीसी और सामान्य वर्ग के वोटर भी अच्छी खासी संख्या में अपनी राजनीतिक उपस्थिति दर्ज कराते हैं। नए परिसीमन के बाद से अब तक यहाँ कुल तीन आम विधानसभा चुनाव संपन्न हो चुके हैं, जिनमें से दो बार भारतीय जनता पार्टी को जीत हासिल हुई है और एक बार बहुजन समाज पार्टी ने बाजी मारी है। सबसे खास बात यह रही है कि इन सभी तीनों चुनावों में राष्ट्रीय लोक दल हर बार रनरअप यानी दूसरे स्थान पर काबिज रही है।

साल 2012 के चुनाव में बसपा के ब्राह्मण उम्मीदवार ने मारी थी बाजी

परिसीमन के बाद बड़ौत विधानसभा क्षेत्र में पहला चुनाव वर्ष 2012 में आयोजित हुआ था। इस पहले ही मुकाबले में बहुजन समाज पार्टी ने बाजी अपने नाम कर ली थी। बसपा के टिकट पर मैदान में उतरे लोकेश दीक्षित ने कुल 57,209 वोट हासिल किए थे और उन्होंने राष्ट्रीय लोक दल के उम्मीदवार अश्वनी कुमार को 5,676 मतों के अंतर से शिकस्त दी थी। उस समय राष्ट्रीय लोक दल का कांग्रेस पार्टी के साथ गठबंधन था और रालोद प्रत्याशी अश्वनी कुमार को 51,533 वोट पाकर ही संतोष करना पड़ा था। इस चुनाव में समाजवादी पार्टी को तीसरे पायदान से संतोष करना पड़ा था और उनके प्रत्याशी अजय कुमार केवल 15,212 वोट ही जुटा सके थे। दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी के लिए यह मुकाबला बेहद निराशाजनक रहा था और उनकी पार्टी के उम्मीदवार नवीन कुमार को जनता ने महज 8,395 वोट देकर चौथे स्थान पर धकेल दिया था।

ये भी पढ़ें

वर्ष 2017 में चली भाजपा की आंधी, बसपा फिसली चौथे स्थान पर

वक्त के साथ सियासी हालात तेजी से बदले और 2017 के विधानसभा चुनावों में बड़ौत की तस्वीर पूरी तरह पलट गई। उस साल पूरे उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की जबरदस्त लहर चल रही थी, जिसके दम पर भाजपा ने अकेले अपने बूते पर राज्य में 312 सीटों पर शानदार जीत दर्ज की थी। बड़ौत की विधानसभा सीट भी उसी भगवा लहर का हिस्सा बन गई थी। भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले कृष्णपाल मलिक ने 79,427 वोटों के भारी समर्थन के साथ यह सीट जीत ली थी। उनके मुकाबले राष्ट्रीय लोक दल के साहब सिंह 52,941 वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे थे। भाजपा प्रत्याशी ने अपने प्रतिद्वंद्वी को 26,486 वोटों के बहुत बड़े अंतर से हराया था। इसके उलट, 2012 में इस सीट पर कब्जा जमाने वाले बसपा के मौजूदा विधायक लोकेश दीक्षित इस चुनाव में काफी पिछड़ गए और 22,071 वोट पाकर चौथे नंबर पर खिसक गए। वहीं, समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार शोकेन्द्र ने 28,376 वोट हासिल करते हुए इस बार तीसरा स्थान अपने नाम किया था।

वर्ष 2022 के कड़े मुकाबले में महज 315 वोटों से जीती थी भाजपा

वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने बड़ौत सीट पर अपनी लगातार दूसरी विजय दर्ज की। हालांकि इस बार का मुकाबला बेहद रोमांचक और कांटे की टक्कर वाला रहा था। भाजपा के कृष्णपाल मलिक ने कुल 90,931 वोट प्राप्त किए और उन्होंने राष्ट्रीय लोक दल के उम्मीदवार जयवीर को महज 315 वोटों के अति सूक्ष्म अंतर से मात दी थी। यह मुकाबला इतना संघर्षपूर्ण था कि आखिरी वक्त तक परिणाम को लेकर संशय बना रहा था, लेकिन अंततः बाजी भाजपा के हाथ लगी। रालोद प्रत्याशी जयवीर को 90,616 वोट मिले थे और वे बेहद मामूली अंतर से चुनाव हार गए थे। इस चुनाव में बहुजन समाज पार्टी तीसरे स्थान पर रही थी, जिसके उम्मीदवार अंकित शर्मा के खाते में 11,244 वोट आए थे। कांग्रेस पार्टी के राहुल कश्यप इस बार भी चौथे पायदान पर रहे थे जिन्हें केवल 1,849 वोट ही नसीब हुए थे। निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक बड़ौत का यह चुनावी इतिहास हर बार नए राजनीतिक समीकरणों को जन्म देता रहा है।

आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए नए राजनीतिक समीकरण

बड़ौत विधानसभा सीट पर 2012 से लेकर 2022 तक के सभी चुनावी परिणामों का विश्लेषण किया जाए तो यह साफ तौर पर उभरकर सामने आता है कि यहाँ हर बार विजेता पार्टी को सबसे कड़ी चुनौती राष्ट्रीय लोक दल की तरफ से ही मिली है। भाजपा ने यहाँ लगातार दो बार सफलता हासिल की है जबकि एक बार बसपा यहाँ जीती है, और 2022 का चुनाव तो बेहद मामूली फासले पर तय हुआ था। अब जब उत्तर प्रदेश में आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, तो बड़ौत का सियासी परिदृश्य पूरी तरह बदला हुआ नजर आ रहा है। इस बार के चुनावों में पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी रही भाजपा और राष्ट्रीय लोक दल एक ही पाले में यानी गठबंधन के रूप में नजर आ सकती हैं। इसके चलते मैदान में एक तरफ भाजपा और रालोद का मजबूत संयोजन होगा तो दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का गठबंधन मुकाबले में खड़ा दिखाई देगा। दूसरी ओर, बहुजन समाज पार्टी का जनाधार इस सीट पर लगातार नीचे गिरा है, जिसके कारण यह देखना दिलचस्प होगा कि उनका प्रत्याशी किस पार्टी के वोट बैंक में सेंध लगाने में कामयाब होता है। आने वाले समय में बड़ौत सीट का परिणाम पूरी तरह से सही उम्मीदवारों के चयन, आपसी सीट शेयरिंग के फॉर्मूले और जातियों की मजबूत गोलबंदी पर ही निर्भर करेगा।

सवाल-जवाब

बड़ौत विधानसभा सीट किस जिले के अंतर्गत आती है?
बड़ौत विधानसभा सीट उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के अंतर्गत आती है और यह बागपत लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है।
वर्ष 2022 के चुनाव में बड़ौत सीट से किसने जीत दर्ज की थी?
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के कृष्णपाल मलिक ने 90,931 वोट पाकर जीत हासिल की थी।
वर्ष 2022 में हार-जीत का अंतर कितना था?
वर्ष 2022 के चुनाव में भाजपा उम्मीदवार ने रालोद के उम्मीदवार जयवीर को महज 315 वोटों के अंतर से हराया था।
बड़ौत सीट पर 2012 में किसने जीत हासिल की थी?
वर्ष 2012 के चुनाव में बसपा के उम्मीदवार लोकेश दीक्षित ने जीत दर्ज की थी।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के लिए बड़ौत में क्या समीकरण बन रहे हैं?
वर्ष 2027 के चुनाव में भाजपा और रालोद के गठबंधन में होने के कारण मुकाबला पूरी तरह बदल गया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Divya Reddy@divya-reddy·16 मिनट पहले

गठबंधन होने से समीकरण आसान नहीं होते, ज़मीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं का तालमेल बिठाना सबसे बड़ी चुनौती होगी।

Arjun Mehta@arjun-mehta·36 मिनट पहले

बड़ौत में भाजपा और रालोद का साथ आना वाकई सपा के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। पिछले चुनावों में जो रालोद हमेशा दूसरे नंबर पर रहकर टक्कर देती थी, अब अगर वही वोट भाजपा के साथ जुड़ गए तो विपक्ष के लिए यहाँ वापसी करना बेहद मुश्किल होगा।

Ravikash Gupta@ravikash·36 मिनट पहले

अर्जुन जी, आपकी बात बिल्कुल सही है। पिछली बार जब मैं बागपत गया था, तब भी रालोद और जाट मतदाताओं की चर्चा हर नुक्कड़ पर थी। अब समीकरण सचमुच बदल चुके हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·55 मिनट पहले

पिछली बार जब मैं चुनाव कवरेज के सिलसिले में बड़ौत गया था, तो रालोद के दफ़्तर के बाहर चाय की दुकान पर लोगों को आपस में बहस करते सुना था कि जाट वोटों का समीकरण इस बार किधर जाएगा। अब जब भाजपा और रालोद एक साथ आ गए हैं, तो वही चाय की टपरी वाले दोस्त कह रहे हैं कि इस बार मुकाबला वाकई दिलचस्प हो गया है।

Rohan Verma@rohan-verma·54 मिनट पहले

करन भाई, बात तो सही है! 2012 में चौथे नंबर पर रहने वाली बीजेपी और हमेशा रनरअप रही रालोद का अब साथ आना वाकई खेल बदल देगा।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp