उम्र के एक ऐसे पड़ाव पर जहां अमूमन लोग सार्वजनिक जीवन से दूरी बना लेते हैं, वहीं सोनिया गांधी ने फोटो शेयरिंग प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर कदम रखकर सबको चौंका दिया है। इससे पहले वह केवल पार्टी के आधिकारिक डिजिटल पेजों के माध्यम से ही चर्चा में रहती थीं, लेकिन अब उन्होंने अपना खुद का ऑफिशियल अकाउंट बना लिया है। इस नई शुरुआत के बाद उनकी फॉलोइंग लिस्ट काफी चर्चा में आ गई है, क्योंकि वह किसी भी बड़े राजनेता या अपने परिवार के अन्य सदस्यों को फॉलो नहीं कर रही हैं।
चुनिंदा लोगों को कर रही हैं फॉलो
सोनिया गांधी की सोशल मीडिया फॉलोइंग लिस्ट बेहद सीमित और सोची-समझी है। वह केवल तीन अकाउंट्स से जुड़ी हुई हैं, जिनमें उनके बेटे राहुल गांधी, बेटी प्रियंका गांधी वाद्रा और कांग्रेस का ऑफिशियल पेज शामिल है। परिवार के प्रति यह जुड़ाव और पार्टी के प्रति निष्ठा का अंदाज लोगों को काफी पसंद आ रहा है। इंटरनेट पर इस बात की चर्चा है कि कैसे उन्होंने अपने इस नए डिजिटल सफर की शुरुआत बिल्कुल अपने परिवार और राजनीतिक पहचान के इर्द-गिर्द रखी है।
कुछ ही घंटों में मिली जबरदस्त लोकप्रियता
जैसे ही उनका यह नया अकाउंट एक्टिव हुआ, समर्थकों के बीच उत्साह की लहर दौड़ गई। राहुल गांधी सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने तुरंत उन्हें फॉलो करना शुरू कर दिया। इस डिजिटल एंट्री का असर यह हुआ कि कुछ ही घंटों के भीतर उनके फॉलोअर्स का आंकड़ा 1 लाख को पार कर गया। इसके अलावा, उनके पहले वीडियो को 1.80 लाख से अधिक लाइक्स मिल चुके हैं, जो सोशल मीडिया पर उनकी लोकप्रियता को साफ तौर पर दर्शाता है।
किताब के पहले लुक के साथ हुई शुरुआत
अपने पहले पोस्ट में किसी पारंपरिक राजनीतिक संदेश के बजाय उन्होंने एक बहुत ही व्यक्तिगत और अपनेपन से भरा वीडियो साझा किया है। इस वीडियो में वह अपनी आने वाली किताब ‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ की पहली कॉपी हासिल करती नजर आ रही हैं और अपनी बेटी प्रियंका गांधी के साथ मिलकर इस खुशी में मिठाई बांटती दिख रही हैं। उन्होंने इसके कैप्शन में लिखा, “सभी को नमस्कार! इस पल को आप सभी के साथ शेयर करते हुए मुझे बेहद खुशी हो रही है। यह मेरी किताब की पहली झलक है जो प्यार, फर्ज, अपनों को खोने के दर्द और अपनेपन को तलाशने की कहानी है।”
जीवन यात्रा पर आधारित होगी यह किताब
यह बहुप्रतीक्षित किताब ‘हार्पर कॉलिन्स इंडिया’ के बैनर तले 10 नवंबर को प्रकाशित होने जा रही है। इसमें उनके जीवन के कई अनछुए पहलुओं को पाठकों के सामने लाया जाएगा। इस संस्मरण में उनके इटली के शुरुआती दिनों, 1965 में कैम्ब्रिज में राजीव गांधी से हुई पहली मुलाकात और भारत आकर भारतीय संस्कृति ढलने के अनुभवों का जिक्र है। इसके अलावा, इसमें संजय गांधी, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी से जुड़ी दुखद घटनाओं के साथ-साथ साल 2004 में प्रधानमंत्री पद छोड़ने के उनके ऐतिहासिक राजनीतिक फैसले का भी विस्तार से वर्णन किया गया है।



















