सर्दियों का मौसम दस्तक दे चुका है और तापमान में गिरावट के साथ ही इंसानों की तरह पशु-पक्षियों के जीवनचक्र में भी कई प्रकार के बदलाव आने शुरू हो जाते हैं। जिस प्रकार मनुष्य इस ठंडे मौसम में अपनी जीवनशैली और खान-पान में बदलाव करते हैं, ठीक उसी तरह पालतू पशुओं की देखभाल के तौर-तरीकों में भी सावधानी बरतना बेहद जरूरी हो जाता है। बिहार राज्य के ग्रामीण अंचल में बकरी पालन आजीविका चलाने का एक बहुत बड़ा और अहम जरिया माना जाता है। प्रदेश के अनगिनत ग्रामीण परिवार बकरियों को पालकर अपने घर-परिवार का खर्च आसानी से चलाते हैं। यही वजह है कि मौसम में होने वाले बदलावों के साथ ही बकरी पालकों को पशुओं के आहार पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। ठंड के इस मौसम में बकरियों को बर्फीली हवाओं और ठंडक से महफूज रखना बहुत आवश्यक होता है, क्योंकि इस अवधि में कई ऐसी गंभीर बीमारियां पनपती हैं जो बकरियों के लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं। जहानाबाद की जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ. प्रतिभा कुमारी ने इस विषय पर बेहद विस्तृत और महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की हैं ताकि पशुपालकों को सही मार्गदर्शन मिल सके।
सर्दियों के दिनों में बकरियों का आहार
डॉ. प्रतिभा कुमारी का कहना है कि इंसानों की तरह ही पशुओं का जीवन भी प्रकृति के बदलावों से प्रभावित होता है। जिस प्रकार लोग बदलते मौसम के अनुसार अपने शरीर की रक्षा करते हैं और खान-पान में जरूरी फेरबदल लाते हैं, उसी प्रकार पशुओं के आहार में भी बदलाव होना अनिवार्य है। खासतौर पर बकरी पालन से जुड़े लोगों के लिए सर्दियों का यह मौसम काफी चुनौतियां लेकर आता है। इस स्थिति से निपटने का सबसे बेहतरीन और कारगर उपाय उनके शरीर को पर्याप्त पोषक तत्वों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। जब पशु के शरीर के भीतर मजबूत इम्यून सिस्टम और भरपूर पोषण बना रहता है, तो वह किसी भी मौसमी बीमारी से आसानी से मुकाबला कर सकता है। ठंड के दिनों में बकरियों को कई प्रकार की खतरनाक और घातक बीमारियां अपनी चपेट में ले लेती हैं, जिनसे बचाव के लिए कुछ खास और जरूरी सावधानियां बरतनी बहुत जरूरी हो जाती हैं।
चना, गुड़ और बेसन का विशेष महत्व
विशेषज्ञ ने आगे जानकारी देते हुए बताया कि ठंड के मौसम के दौरान बकरियों को दिए जाने वाले हरे चारे की मात्रा में कुछ कमी कर देनी चाहिए। इसके विपरीत, उन्हें सूखा चारा और भरपूर पोषक तत्वों से युक्त खाद्य सामग्री मुहैया करानी चाहिए। बकरियों को चने, गुड़, बेसन और भूसे का मिश्रण खिलाने से उनके शरीर में दूध की मात्रा में बढ़ोतरी होती है, और यह खुराक मांस उत्पादन के लिहाज से भी काफी ज्यादा फायदेमंद साबित होती है। इस तरह का जरूरी और पौष्टिक आहार देने से बकरियों का शारीरिक विकास बहुत अच्छी गति से होता है। इसके अलावा, सर्दियों के इन दिनों में सुबह के वक्त बकरियों को बहुत जल्दी घर से बाहर नहीं निकालना चाहिए और शाम ढलने से पहले या सूर्यास्त होने से पहले उन्हें वापस सुरक्षित बाड़े या घर के अंदर ले आना बेहद जरूरी होता है।
रहने के स्थान पर सुरक्षा के प्रबंध
आवास की व्यवस्था के संबंध में बताया गया है कि ठंड के मौसम में बकरियों के रहने के स्थान की खिड़कियों को जूट की बोरियों से अच्छी तरह ढक देना चाहिए। ऐसा करने से बाहर से आने वाली सर्द और ठिठुरन भरी हवाएं बकरियों के रहने वाले आश्रय स्थल के अंदर प्रवेश नहीं कर पाती हैं। इसके साथ ही जब आप बकरियों को हरा चारा खिलाते हैं, तो इस बात का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए कि हर तीन से चार महीने के अंतराल पर पशुओं की डीवार्मिंग यानी पेट के कीड़े मारने की दवा जरूर दी जाए। इन सभी छोटी-छोटी सावधानियों को अपनाकर ग्रामीण इलाकों के पालक अपनी बकरियों को सर्दियों की घातक बीमारियों से सुरक्षित रख सकते हैं और बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं।



















