उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव की सरगर्मियों के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी द्वारा राज्यसभा के लिए अपना तीसरा उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारने के फैसले और 403 विधानसभा सीटों पर ध्यान केंद्रित करने के दावे के बाद सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और योगी सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर सीधा निशाना साधा है। राजभर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर टिप्पणी करते हुए कहा कि सपने देखना कोई गलत बात नहीं है, साथ ही तीसरा प्रत्याशी न उतारने को उन्होंने एक समझदारी भरा फैसला भी बताया।
तीसरे उम्मीदवार की अटकलों पर अखिलेश यादव का विराम
उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की कुल 10 सीटों के लिए होने वाले चुनाव में समाजवादी पार्टी पहले ही अपने दो प्रत्याशियों का नामांकन पूरा करा चुकी थी। इसके बाद सियासी गलियारों और पार्टी के भीतर से लगातार ऐसे कयास लगाए जा रहे थे कि सपा अपना तीसरा प्रत्याशी भी उतार सकती है। समाजवादी पार्टी के कई नेता भी इस बात के संकेत दे रहे थे कि आखिरी वक्त में तीसरा नाम सामने लाया जा सकता है। नामांकन के आखिरी दिन तक सभी की निगाहें इसी बात पर टिकी हुई थीं कि क्या पार्टी तीसरे चेहरे का ऐलान करके पर्चा दाखिल करवाएगी।
इन तमाम चर्चाओं को खारिज करते हुए अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया के माध्यम से स्थिति स्पष्ट कर दी। उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी मौजूदा 3 सीटों की होड़ में उलझने के बजाय राज्य की 403 विधानसभा सीटों के भविष्य के बड़े लक्ष्य की ओर देख रही है। उन्होंने स्पष्ट तौर पर लिखा कि अब उनकी नजर तीन पर नहीं बल्कि चार सौ तीन सीटों पर टिकी है। इस बयान के साथ ही राज्यसभा में तीसरे उम्मीदवार को लेकर बना हुआ सारा संशय पूरी तरह खत्म हो गया।
सपा के 403 सीटों के लक्ष्य पर राजभर का पलटवार
अखिलेश यादव के इस बयान के तुरंत बाद ओम प्रकाश राजभर ने एक्स पर लिखा, "मित्र अखिलेश जी, बस हो गया टांय टांय फिस्स! वैसे कभी कभी ही सही, आप कुछ समझदारी का काम भी कर ही लेते हैं। जैसे आज किया। रही बात 403 की तो बस यही कहूंगा कि सपने देखना बुरी बात नहीं है।" राजभर ने इस तंज के जरिए सपा की रणनीति पर सवाल खड़े किए और कहा कि मैदान से हटना समझदारी तो है लेकिन सभी 403 सीटों पर जीत का ख्वाब देखना हकीकत से परे है।
ओम प्रकाश राजभर पिछले कुछ समय से समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव के राजनीतिक रुख पर लगातार हमलावर रहे हैं। इससे पहले जब राज्यसभा चुनाव की शुरुआती प्रक्रिया शुरू हुई थी और सपा की तरफ से रामगोपाल यादव की उम्मीदवारी तय की गई थी, तब भी राजभर ने सोशल मीडिया पर पार्टी की नीतियों की आलोचना की थी। उन्होंने बाकी उम्मीदवारों के चयन को लेकर सपा के पीडीए नारे का उल्लेख करते हुए तीखे सवाल खड़े किए थे। अब तीसरे उम्मीदवार के मैदान से हटने के फैसले ने दोनों नेताओं के बीच जुबानी तकरार को एक बार फिर हवा दे दी है।























